हेल्थ इंश्योरेंस पर लगने वाले GST रेट में होगी बड़ी कटौती, 18 के बजाय 5 फीसदी करने की तैयारी
जीएसटी परिषद की बैठक अप्रैल या मई में होने की संभावना है. इस बैठक में health & life insurance पर जीएसटी दर को लेकर चर्चा हो सकती है. लंबे समय से इस पर जीएसटी दर में पूरी तरह छूट देने की बात हो रही है. हालांकि, अब यह संभावना जताई जा रही है कि इसे पूरी तरह खत्म करने के बजाय 5 फीसदी किया जा सकता है. अब जब कुछ महीनों में जीएसटी परिषद की बैठक होगी, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि परिषद इस पर क्या निर्णय लेती है.
GST on insurance premium: पिछले कुछ समय से यह कयास लगाया जा रहा है कि health & life insurance पर जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) पूरी तरह से खत्म किया जा सकता है. हालांकि, जीएसटी परिषद इसमें पूरी तरह छूट देने के बजाय रेट में कटौती कर सकती है. फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जीएसटी परिषद health & life insurance पर जीएसटी की दरों में पूरी तरह छूट देने के बजाय इसे कम करने पर सहमत हो सकती है. रिपोर्ट के अनुसार, इसे 18 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी किया जा सकता है. फिलहाल, इन इंश्योरेंस पॉलिसियों पर 18 फीसदी टैक्स लागू है.
जीओएम के सदस्य कटौती के पक्ष में
जीओएम (ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स) ने इस मामले की समीक्षा की है. अधिकांश सदस्य टैक्स रेट में कटौती के पक्ष में हैं. हालांकि, उनका मानना है कि अगर पूरी छूट दी जाती है, तो बीमा कंपनियों की लागत बढ़ सकती है. ऐसा इसलिए होगा क्योंकि वे इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ नहीं ले पाएंगे, जिससे उनके ऊपर टैक्स का बोझ बढ़ जाएगा.
वहीं, इंश्योरेंस इंडस्ट्री के कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जीएसटी की दर 5 फीसदी कर दी जाती है, तो भी बीमा कंपनियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ नहीं मिलेगा. इसलिए, वे 12 फीसदी आउटपुट टैक्स (यानी बीमा प्रीमियम पर लगने वाला टैक्स) की वकालत कर रहे हैं.
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जल्द होगी जीएसटी परिषद की बैठक
जीएसटी परिषद की बैठक अप्रैल या मई में होने की संभावना है. इस बैठक में बीमा प्रीमियम पर टैक्स से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी. परिषद आईआरडीएआई द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट पर भी विचार करेगी. फाइनेंशियल एक्सप्रेस ने जीओएम के एक सदस्य के हवाले से बताया है कि जीओएम, health insurance प्रीमियम पर जीएसटी पूरी तरह हटाने के पक्ष में नहीं है, बल्कि इसे कम करने पर विचार कर रहा है.
12 फीसदी करने का सुझाव
बीमा कंपनियों ने आईआरडीएआई और वित्तीय सेवा विभाग (DFS) को सुझाव दिया है कि स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम पर जीएसटी की दर कम से कम 12 फीसदी होनी चाहिए. साथ ही, उन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ भी मिलना चाहिए. बीमा कंपनियों का कहना है कि टर्म प्लान पर उनका लगभग 8-11 फीसदी खर्च इनपुट टैक्स के रूप में चुकाया जाता है. यदि जीएसटी दर घटाकर 5 फीसदी कर दी जाती है, तो उन्हें ITC का लाभ नहीं मिलेगा, जिससे उनकी लागत बढ़ जाएगी.
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