GMP का खेल होगा खत्म! SEBI का बड़ा ऐलान; IPO शेयर की प्री-लिस्टिंग ट्रेडिंग का बनेगा प्लेटफॉर्म
IPO GMP को लेकर SEBI बड़े बदलाव की तैयारी में है. इन्वेस्टमेंट बैंकर संघ के मुताबिक अगले दो वित्त वर्ष के दौरान देश में 1,000 से ज्यादा IPO आने वाले हैं. SME कैटेगरी के IPO नियमों में सख्ती की चर्चा के बीच सेबी ने IPO इकोसिस्टम से जुड़ी ग्रे मार्केट गतिवियों को खत्म करने के लिए कमर कस ली है.
IPO GMP को लेकर SEBI प्रमुख ने एक बड़ा ऐलान किया है. असल में IPO मामले में ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) एक ऐसे अनाधिकारिक इंडिकेटर के तौर पर काम करता है. इससे निवेशकों को लिस्टिंग गेन को लेकर अंदाजा मिलता है. बाजार से बाहर प्री-लिस्टिंड ट्रेडिंग आधारित ग्रे मार्केट गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए सेबी की तरफ से नई योजना बनाई जा रही है.
मंगलवार को सेबी प्रमुख माधबी पुरी बुच ने बताया कि एक ऐसा सिस्टम बनाने पर विचार किया जा रहा है, जिससे निवेशक IPO में शेयर आवंटित होते ही उन्हें बेच सकेंगे, ताकि ग्रे मार्केट गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सके. बाजार नियामक सेबी प्रमुख ने इसके साथ ही ऐलान किया कि दो शीर्ष प्रॉक्सी सलाहकार फर्म एक पोर्टल शुरू करने जा रही हैं, जो संबंधित पक्षों के लेनदेन की रिपॉजिटरी का काम करेगा और किसी भी हितधारक के लिए कंपनी में शासन मानकों का आकलन करने में उपयोगी होगा.
कर्ब ट्रेडिंग पर बोलीं बुच
पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक एसोसिएशन ऑफ इन्वेस्टमेंट बैंकर्स ऑफ इंडिया (एआईबीआई) के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बुच ने कहा कि हाल के दिनों में कई IPO में बहुत ज्यादा सब्सक्रिप्शन देखने को मिला और कई IPO ने लिस्टिंग के दिन ही जबरदस्त लिस्टिंग गेन हासिल किया है. असल में इसके पीछे की वजह अलॉटेड शेयरों की ग्रे मार्केट में होने वाली खरीद-फरोख्त है. इन्वेस्टमेंट बैंकर से बाजार नियामक बनी बुच ने कहा कि जब वे इन्वेस्टमेंट बैंकर थीं, तो ग्रे मार्केट गतिविधियों को “कर्ब ट्रेडिंग” कहा जाता था.
प्री-लिस्टिंग ट्रेड का मौका
माधबी बुच ने कहा सेबी निवेशकों को सुरक्षित रखने के पक्ष में है. अगर निवेशक प्री-लिस्टिंग ट्रेड करना चाहते हैं, तो उन्हें इसका मौका दिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि अगर निवेशक ऐसा करना चाहते हैं, तो उन्हें उचित विनियमित तरीके से यह अवसर क्यों न दिया जाए?” इसके साथ ही उन्होंने कहा, “हमारा विचार यह है कि जो भी ग्रे मार्केट चल रहा है, प्री-लिस्टिंग, हमें लगता है कि वह सही नहीं है. यदि आपको आवंटन मिला है और आप इसे बेचना चाहते हैं, तो उसे बाजार में बेचें.”
योजना जिस पर चल रही चर्चा
बुच ने सेबी की तरफ से आईपीओ के तहत अलॉट किए जाने वाले शेयरों की प्री-लिस्टिंड ट्रेडिंग की योजना पर बात करते हुए कहा, बुच ने कहा कि एक्सचेंजों के साथ When Listed सुविधा शुरू की जाएगी. यानी स्टॉक जब सूचीबद्ध हो, तब उसे ट्रेड किए जाने की सुविधा होगी, हालांकि इन तरह शेयरों के बाय और सेल के ऑर्डर अलॉटमेंट और लिस्टिंग के बीच तीन दिनों के दौरान प्लेस किए जा सकेंगे. बुच ने कहा, “सेबी इस पक्ष में है कि जैसे ही अलॉटमेंट होता है, उस शेयर को अलॉटी को बेचने का पर अधिकार होना चाहिए.”
कंपनी के गवर्नेंस की मिलेगी जानकारी
प्रॉक्सी सलाहकारों की तरफ से रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन (RPT) पोर्टल शुरू करने की योजना पर सेबी प्रमुख ने कहा कि इस दौड़ में शामिल दो प्रमुख संस्थाएं इस सुविधा को शुरू करने की तैयारी में हैं. उन्होंने कहा कि यह किसी भी कंपनी के प्रशासन का आकलन करने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए एक मूल्यवान संसाधन होगा. यह RPT पर सूचना के लोकतंत्रीकरण की दिशा में एक कदम होगा. बुच ने कहा कि प्रॉक्सी फर्म बाजार में अहम भूमिका निभाती हैं और उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय जारीकर्ता की तरफ से भुगतान करने के बजाय ग्राहक की तरफ से भुगतान किए जाने वाले मॉडल पर निर्भरता को दिया है.
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