देश का सबसे बड़ा IPO जल्द, अंतिम दौर में लिस्टिंग की तैयारी; 45000 करोड़ रुपये जुटाने का टारगेट

रिलायंस इंडस्ट्रीज की Jio प्लेटफॉर्म्स भारत के सबसे बडे़ आईपीओ की ओर तेजी से बढ़ रही है. कंपनी सरकार की ओर से आईपीओ नियमों में बदलाव की अंतिम नोटिफिकेशन का इंतजार कर रही है. सेबी के नए नियमों से Jio को कम हिस्सेदारी बेचकर बड़ी रकम जुटाने में मदद मिलेगी.

भारत के सबसे बड़ा IPO जल्द. Image Credit: Money9live

Jio IPO: देश के शेयर बाजार में अब तक का सबसे बड़ा IPO जल्द देखने को मिल सकता है. रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल यूनिट Jio प्लेटफॉर्म्स के IPO की तैयारी अंतिम चरण में है. कंपनी सरकार की ओर से IPO नियमों में बदलाव के आधिकारिक नोटिफिकेशन का इंतजार कर रही है. इसके बाद ड्राफ्ट पेपर दाखिल किया जाएगा. कंपनी संकेत दे चुकी है कि लिस्टिंग अगले कुछ महीनों में हो सकती है.

Jio IPO क्यों है इतना खास

Jio प्लेटफॉर्म्स का IPO भारत के इतिहास का सबसे बड़ा IPO माना जा रहा है. इससे करीब 33000 से 37000 करोड़ रुपये जुटाए जाने की संभावना है. इससे पहले हुंडई मोटर इंडिया का 27000 करोड़ रुपये का IPO सबसे बड़ा था. Jio की लिस्टिंग भारतीय कैपिटल मार्केट के लिए एक नया अध्याय साबित हो सकती है.

नियमों में बदलाव का इंतजार

सेबी ने बड़ी कंपनियों के लिए न्यूनतम IPO हिस्सेदारी को 5 फीसदी से घटाकर 2.5 फीसदी करने की सिफारिश की है. सरकार ने इसे मंजूरी दे दी है लेकिन फाइनेंस मंत्रालय की लिस्टिंग अभी बाकी है. इस बदलाव से Jio जैसी बड़ी कंपनी को कम हिस्सेदारी बेचकर भी भारी रकम जुटाने में मदद मिलेगी.

कितनी हो सकती है Jio की वैल्यू

निवेश बैंकों के अनुसार Jio प्लेटफॉर्म्स की वैल्यू करीब 1500000 करोड़ रुपये आंकी जा रही है. अगर कंपनी सिर्फ 2.5 फीसदी हिस्सेदारी भी बेचती है तो लगभग 30000 से 45000 करोड़ रुपये तक जुटाए जा सकते हैं. नए नियमों के बिना इतनी रकम जुटाने के लिए दोगुनी हिस्सेदारी बेचनी पड़ती.

निवेशकों की भूमिका क्या होगी

जानकारों का मानना है कि यह IPO ज्यादातर ऑफर फॉर सेल हो सकता है. रिलायंस इंडस्ट्रीज मेटा और गूगल जैसे रणनीतिक निवेशक अपनी हिस्सेदारी बनाए रख सकते हैं. वहीं फाइनेंशियल निवेशक इस IPO के जरिए आंशिक एग्जिट ले सकते हैं.

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रिलायंस के लिए क्या चुनौती

Jio की लिस्टिंग के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज एक होल्डिंग कंपनी बन सकती है. इससे कंपनी के शेयर पर वैल्यूएशन डिस्काउंट आने की आशंका है. कुछ ब्रोकरेज हाउस इसे 5 से 20 फीसदी तक मान रहे हैं. हालांकि नए सेबी नियमों से इस जोखिम को काफी हद तक कम किया गया है.

डिसक्लेमर: मनी9लाइव का GMP तय करने से कोई संबंध नहीं है. मनी9लाइव निवेशकों को यह भी सचेत करता है कि केवल जीएमपी के आधार पर निवेश पर फैसला नहीं करें. निवेश से पहले कंपनी के फंडामेंटल जरूर देखें और एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.