NSE के IPO का रास्ता साफ, गवर्निंग बोर्ड ने दी मंजूरी; OFS प्लान के जरिए मार्केट में होगी लिस्ट
NSE ने कहा कि IPO में लागू रेगुलेटरी अप्रूवल, मौजूदा मार्केट स्थितियों और दूसरे जरूरी फैक्टर्स के आधार पर, एक या ज्यादा मान्यता प्राप्त भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों पर उसके इक्विटी शेयरों की लिस्टिंग शामिल होगी. इसके पब्लिक इश्यू के लिए अप्रूवल का एक दशक लंबा इंतजार खत्म हो गया है.
NSE IPO: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) के इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) का रास्ता साफ हो गया है. NSE ने शुक्रवार को कहा कि उसके गवर्निंग बोर्ड ने मौजूदा शेयरहोल्डर्स द्वारा ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) करने के प्लान को मंजूरी दे दी है. NSE ने कहा कि IPO में लागू रेगुलेटरी अप्रूवल, मौजूदा मार्केट स्थितियों और दूसरे जरूरी फैक्टर्स के आधार पर, एक या ज्यादा मान्यता प्राप्त भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों पर उसके इक्विटी शेयरों की लिस्टिंग शामिल होगी.
खत्म हुआ लंबा इंतजार
यह डेवलपमेंट NSE को हाल ही में मार्केट रेगुलेटर सेबी से अपने IPO के साथ आगे बढ़ने के लिए नो-ऑब्जेक्शन मिलने के तुरंत बाद हुआ है, जिससे इसके पब्लिक इश्यू के लिए अप्रूवल का एक दशक लंबा इंतजार खत्म हो गया है.
लिस्टिंग की तैयारियों के हिस्से के तौर पर, बोर्ड ने अपनी IPO कमेटी के रीकॉन्स्टिट्यूशन को भी मंजूरी दी, जो IPO प्रोसेस को आसान बनाने के लिए गवर्निंग बोर्ड द्वारा खास तौर पर सौंपे गए कामों को करेगी.
कमेटी में कौन-कौन शामिल
इस दोबारा बनाई गई कमेटी की अध्यक्षता तबलेश पांडे करेंगे और इसमें पब्लिक इंटरेस्ट डायरेक्टर श्रीनिवास इंजेती, प्रो. ममता बिस्वाल, अभिलाषा कुमारी और प्रो. शिवकुमार के साथ-साथ NSE के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO आशीष चौहान भी शामिल होंगे.
उम्मीद है कि यह कमेटी लिस्टिंग प्रोसेस के लिए सेंट्रल अथॉरिटी के तौर पर काम करेगी, जिसमें लिस्टिंग के तरीके तय करना और रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए जरूरी मर्चेंट बैंकर और लीगल एडवाइजर को अपॉइंट करने के लिए क्राइटेरिया तय करना शामिल है.
हो सकता है सबसे बड़ा आईपीओ
प्रस्तावित IPO भारत के कैपिटल मार्केट में सबसे बड़े IPO में से एक होने की उम्मीद है, क्योंकि NSE का स्केल और घरेलू इक्विटी डेरिवेटिव मार्केट में इसका दबदबा है. अलग-अलग एनालिस्ट के अनुसार, NSE के पास लगभग 1.77 लाख शेयरहोल्डर हैं और ग्रे मार्केट में इसकी वैल्यू 5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है.
इस लिस्टिंग को भारत के कैपिटल मार्केट्स इकोसिस्टम के लिए एक ऐतिहासिक घटना के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि NSE वॉल्यूम के हिसाब से देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है और फाइनेंशियल मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर में इसकी अहम भूमिका है.
यह भी पढ़ें: Tata Steel Q3 Results: स्टील कंपनी का मुनाफा 723 फीसदी उछला, रेवेन्यू रहा 57002 करोड़




