Uber-Rapido की टक्कर में कमजोर पड़ रही Ola, नकदी संकट के बीच IPO का सहारा; जानें कितनी है मजबूत
कैब एग्रीगेटर कंपनी Ola Consumer ने IPO लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. कंपनी के बोर्ड ने IPO को मंजूरी दे दी है, ऐसे समय में जब Ola की कैश पोजिशन कमजोर हो रही है और Uber व Rapido बाजार में आक्रामक निवेश कर रहे हैं. कंपनी की मार्केट हिस्सेदारी घटकर 20-25% तक पहुंच गई है, जबकि घाटा और नकदी संकट निवेशकों की चिंता बढ़ा रहे हैं.
Ola Consumer IPO: भारतीय राइड-हेलिंग बाजार की दिग्गज कंपनी ओला कंज्यूमर (Ola Consumer) अब शेयर बाजार का रुख करने वाली है. एक तरफ प्रतिद्वंदी कंपनियां उबर (Uber) और रैपिडो (Rapido) बाजार में अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ ओला का कैश रिजर्व तेजी से खत्म हो रहा है. कंपनी ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में पुष्टि की है कि उसके बोर्ड ने आईपीओ (IPO) के लिए हरी झंडी दे दी है और इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
नकदी की किल्लत और गिरती नेटवर्थ
ओला कंज्यूमर की वित्तीय स्थिति फिलहाल चिंताजनक नजर आ रही है. कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) को दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2025 तक कंपनी की नेटवर्थ 57% घटकर ₹1,490 करोड़ रह गई है, जो पिछले साल ₹3,451 करोड़ थी. इस गिरावट के पीछे दो मुख्य कारण हैं:
- बढ़ता घाटा: कंपनी का ऑपरेटिंग लॉस ₹334.3 करोड़ से बढ़कर ₹662.2 करोड़ हो गया है.
- ओला इलेक्ट्रिक का असर: ओला इलेक्ट्रिक के शेयरों में अगस्त 2024 से मार्च 2025 के बीच आई लगभग 50% की गिरावट ने कंपनी को ₹1,312.3 करोड़ का बड़ा झटका दिया है.
हाथ से फिसल रहा है मार्केट शेयर
एक समय बाजार पर राज करने वाली ओला अब पिछड़ती दिख रही है. उद्योग के अनुमानों और रेटिंग एजेंसियों के अनुसार, कैब बिजनेस में ओला की हिस्सेदारी 2023 के 40-45% से गिरकर अब महज 20-25% रह गई है.
इसके उलट, उबेर 45% हिस्सेदारी के साथ मजबूती से डटा है और रैपिडो ने तेजी से बढ़ते हुए 20% से अधिक मार्केट शेयर पर कब्जा कर लिया है. उबेर ने हाल ही में अपने भारतीय यूनिट में ₹3,000 करोड़ का निवेश किया है, जिससे ओला पर दबाव और बढ़ गया है.
क्या IPO बचा पाएगा ओला की नैया?
2010 में शुरुआत के बाद से ओला कंज्यूमर अब तक ₹21,213 करोड़ का कुल घाटा झेल चुकी है. मार्च 2025 के अंत में कंपनी के पास कैश और बैंक बैलेंस (म्यूचुअल फंड निवेश सहित) घटकर ₹652.8 करोड़ रह गया है, जो पिछले साल ₹1,394.8 करोड़ था. प्रमुख वित्तीय आंकड़े (FY25):
- कुल रेवेन्यू: ₹1,170.9 करोड़
- कैब बिजनेस से कमाई: ₹924.5 करोड़
- फाइनेंशियल सर्विसेज: ₹185.5 करोड़
- लॉजिस्टिक्स व अन्य: ₹60.9 करोड़
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विशेषज्ञों का मानना है कि ओला के लिए यह आईपीओ सिर्फ विस्तार का जरिया नहीं, बल्कि सर्वाइवल के लिए ‘लाइफलाइन’ है. एसएंडपी और मूडीज जैसी रेटिंग एजेंसियों ने भी आगाह किया है कि घटती नकदी और कर्ज की देनदारियां कंपनी के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं. अब देखना यह है कि निवेशक ओला के इस भविष्य के दांव पर कितना भरोसा जताते हैं.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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