टॉरेंट गैस ने गोपनीय रूट से IPO के लिए फाइल किए ड्राफ्ट पेपर्स, जानें कितना बड़ा है कंपनी का कारोबार
अगर लिस्टिंग की योजनाएं सफल होती हैं, तो Torrent Gas, Torrent Pharmaceuticals और Torrent Power के बाद, गुजरात के इस डायवर्सिफाइड कारोबार वाले समूह की तीसरी लिस्टेड कंपनी बन जाएगी. कंपनी ने FY24-25 में 45,638.2 करोड़ रुपये का रेवेन्यू और 4,706 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट कमाया.
टॉरेंट ग्रुप के इंटीग्रेटेड सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) बिजनेस, टॉरेंट गैस ने मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास गोपनीय प्री-फाइलिंग रूट के ज़रिए ड्राफ्ट पेपर्स जमा किए हैं. अगर लिस्टिंग की योजनाएं सफल होती हैं, तो Torrent Gas, Torrent Pharmaceuticals और Torrent Power के बाद, गुजरात के इस डायवर्सिफाइड कारोबार वाले समूह की तीसरी लिस्टेड कंपनी बन जाएगी.
मनीकंट्रोल ने इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के हवाले से बताया कि ड्राफ्ट पेपर्स जमा कर दिए गए हैं. इसमें कोई प्राइमरी हिस्सा नहीं है और यह इश्यू पूरी तरह से ऑफर फ़ॉर सेल (OFS) है.
इन्वेस्टमेंट बैंक
दूसरे व्यक्ति ने बताया कि Axis Capital, Kotak Mahindra Capital और Citi इस प्रस्तावित इश्यू पर काम कर रहे इन्वेस्टमेंट बैंक हैं. ऊपर बताए गए दोनों व्यक्तियों ने अपनी पहचान जाहिर न करने की शर्त पर बात की.
कंपनी का कारोबार
अपनी वेबसाइट के अनुसार, Torrent Gas को सात राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के 34 जिलों में CGD इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करने और वाहनों के इस्तेमाल करने वालों को कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) तथा उद्योगों और घरों को पाइप से नेचुरल गैस (PNG) बेचने का अधिकार दिया गया है. प्राइवेट मार्केट डेटा देने वाली कंपनी Tracxn के अनुसार, कंपनी ने FY24-25 में 45,638.2 करोड़ रुपये का रेवेन्यू और 4,706 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट कमाया.
कंपीटीटर कंपनियां
Jinal Mehta Torrent Gas के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के चेयरमैन हैं. कंपनी ने 2023 में तेल और गैस उद्योग के अनुभवी मनोज जैन को मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर नियुक्त किया था. Torrent Gas की लिस्टेड समकक्ष कंपनियों में Indraprastha Gas, Mahanagar Gas, Gujarat Gas और Adani Total Gas शामिल हैं.
गोपनीय फाइलिंग का तरीका
नवंबर 2022 में सेबी द्वारा मुख्य बोर्ड जारीकर्ताओं के लिए एक विकल्प के तौर पर शुरू की गई ‘प्री-फाइलिंग’ सुविधा कंपनियों को अपनी संवेदनशील व्यावसायिक जानकारी, वित्तीय आंकड़े और जोखिमों को गोपनीय रखने की अनुमति देती है. विशेष रूप से अपने प्रतिस्पर्धियों से. दूसरी ओर, मानक प्रारूप में, DRHP (ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस) फाइलिंग के बाद एक सार्वजनिक दस्तावेज बन जाता है.
यह जारीकर्ताओं को तब तक गोपनीयता का लाभ देता है जब तक वे लिस्टिंग पर कोई अंतिम निर्णय नहीं ले लेते. अगर आवश्यक हो, तो वे बाजार की स्थितियों के आधार पर, बिना किसी महत्वपूर्ण जानकारी का खुलासा किए, बाद में अपना आवेदन वापस भी ले सकते हैं.
इस रास्ते को पहले भी अपना चुकी हैं कई कंपनियां
पहले भी कई अन्य जारीकर्ताओं ने भी गोपनीय प्री-फाइलिंग के तरीके को अपनाया है, जिनमें टाटा कैपिटल, टाटा प्ले, ओयो, स्विगी, विशाल मेगा मार्ट, क्रेडिला फाइनेंशियल सर्विसेज, इंदिरा आईवीएफ, फिजिक्सवाला और फोनपे जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं.
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