नौकरी लगते ही शुरू कर दें SIP में निवेश, 40000 की सैलरी से भी बन सकता है 1 करोड़ का फंड; ये है असली फॉर्मूला

अगर आपकी सैलरी 40000 रुपये है तो भी आप SIP के जरिए 1 करोड़ रुपये का फंड बना सकते हैं. सही समय पर निवेश शुरू करना, कंपाउंडिंग की ताकत और अनुशासित बचत इस लक्ष्य को संभव बनाते हैं. इक्विटी म्युचुअल फंड SIP से हर महीने थोड़ी रकम निवेश कर लंबे समय में बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है. जितनी जल्दी निवेश शुरू करेंगे, उतना ही ज्यादा फायदा मिलेगा.

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SIP investment: आज के समय में अगर किसी युवा की शुरुआती सैलरी 40000 रुपये महीने है, तो अक्सर उसे लगता है कि महानगरों जैसे मुंबई, दिल्ली या बेंगलुरु में इतने पैसों से बचत करना मुश्किल होगा. किराया, ट्रांसपोर्ट, खाना और दूसरी जरूरतों के बाद बहुत कम रकम बचती है. लेकिन फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर शुरुआत से ही सही आदतें बना ली जाएं, तो यही 40000 रुपये की सैलरी भी भविष्य में 1 करोड़ रुपये का मजबूत फंड तैयार कर सकती है.

इसका सबसे बड़ा हथियार है कंपाउंडिंग यानी ब्याज पर ब्याज. समय के साथ आपका निवेश सिर्फ आपके डाले हुए पैसों से नहीं, बल्कि उस पर मिलने वाले रिटर्न से भी बढ़ता है. यही वजह है कि जितनी जल्दी आप निवेश शुरू करते हैं, उतना ही बड़ा फायदा मिलता है.

SIP से कैसे बनता है 1 करोड़

भारत में सबसे लोकप्रिय निवेश तरीकों में से एक है इक्विटी म्युचुअल फंड के जरिए SIP. इसमें हर महीने एक तय रकम निवेश की जाती है, जिससे बाजार के उतार चढाव का असर औसतन संतुलित हो जाता है. मान लीजिए कोई व्यक्ति हर महीने 10000 रुपये की SIP करता है और उसे सालाना करीब 12 फीसदी का रिटर्न मिलता है. अगर वह यह निवेश लगातार 21 साल तक जारी रखता है, तो उसका कुल निवेश करीब 25.2 लाख रुपये होगा.

लेकिन कंपाउंडिंग की ताकत से उसका फंड बढ़कर करीब 1.13 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. यानी निवेश किया गया पैसा चार गुना से भी ज्यादा हो जाता है. अगर कोई व्यक्ति अपनी बचत बढ़ाकर हर महीने 20000 रुपये निवेश कर सके, तो यही लक्ष्य और जल्दी हासिल किया जा सकता है. इसी 12 फीसदी अनुमानित रिटर्न पर करीब 15 साल में 1 करोड़ रुपये का फंड बन सकता है. इससे साफ है कि जितनी ज्यादा बचत और जितना लंबा समय, उतनी तेजी से फाइनेंशियल आजादी के करीब पहुंचा जा सकता है.

सैलरी का कितना हिस्सा बचाएं

40000 रुपये की सैलरी में शुरुआत से ही 20 से 30 फीसदी बचत का लक्ष्य रखना चाहिए. यानी हर महीने करीब 8000 रुपये से 12000 रुपये. इसका सबसे अच्छा तरीका यह है कि जैसे ही सैलरी अकाउंट में आए, निवेश अपने आप कट जाए. इसे ऑटोमैटिक मोड में डाल देने से खर्च करने से पहले बचत हो जाती है और अनुशासन बना रहता है.

जैसे जैसे आपकी सैलरी बढ़े, बचत भी बढ़ाते जाएं. प्रमोशन, नई नौकरी या स्किल अपग्रेड से इनकम बढ़ना स्वाभाविक है. ऐसे में पूरी बढ़ी हुई रकम खर्च करने के बजाय कम से कम आधी रकम निवेश में डालनी चाहिए. इससे आपकी वेल्थ तेजी से बढ़ेगी.

सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी

निवेश के साथ साथ सुरक्षा की भी योजना बनाना जरूरी है. कम से कम 6 महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड होना चाहिए ताकि नौकरी जाने या मेडिकल खर्च जैसी स्थिति में निवेश को तोड़ना न पड़े. इसके अलावा हेल्थ इंश्योरेंस और टर्म इंश्योरेंस भी बहुत जरूरी हैं, खासकर उन लोगों के लिए जिन पर परिवार की जिम्मेदारी है.

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