बिहार के कर्मचारियों को तोहफा, सरकार ने बढ़ाया DA; इतनी बढ़ेगी सैलरी
Bihar DA Hike News: बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद सम्राट चौधरी कैबिनेट की ये पहली बैठक थी, जिसमें सरकारी कर्मचारियों को बड़ा तोहफा मिला है. बैठक में 18 एजेंडो पर मुहर लगाई गई. DA एक बेसिक कॉस्ट-ऑफ-लिविंग एडजस्टमेंट है, जिसे सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को सपोर्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है
Bihar DA Hike News: बिहार सरकार ने राज्य के 9 लाख कर्मचारियों को खुशखबरी दी है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कैबिनेट की बैठक में कर्मचारियों के डीए में बढ़ोतरी पर मुहर लगाई. सरकार के फैसले के बाद कर्मचारियों का डीए 58 फीसदी से बढ़कर 60 फीसदी हो गया. ये फैसला 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होगा. इस बढ़ोतरी के बाद कर्मचारियों और पेंशनर्स दोनों को फायदा मिलेगा. डीए में इस बढ़ोतरी से मिनिमम 390 रुपये और अधिकतम 4500 रुपये का फायदा होगा.
कितनी बढ़ेगी सैलरी?
राज्य में सबसे कम 19000 रुपये की बेसिक सैलरी पाने वाले कर्मचारियों की सैलरी में 390 रुपये प्रतिमाह की बढ़ोतरी होगी. वहीं, 2.25 लाख रुपये की बेसिक सैलरी पाने वाले भारतीय प्रशासनिक सेवा के सीनियर अधिकारियों के वेतन में 4500 रुपये प्रतिमाह का इजाफा होगा. वहीं, पेंशर्स को 250 रुपये से 2200 रुपये प्रति माह का फायदा मिलेगा.
बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद सम्राट चौधरी कैबिनेट की ये पहली बैठक थी, जिसमें सरकारी कर्मचारियों को बड़ा तोहफा मिला है. बैठक में 18 एजेंडो पर मुहर लगाई गई.
साल में दो बार इजाफा
केंद्र सरकार और राज्य सरकारें महंगाई को देखते हुए अपने कर्मचारियों के डीए में साल में दो बार इजाफा करती हैं. यह बढ़ोतरी आमतौर पर हर छह महीने में की जाती है. डीए कर्मचारियों की सैलरी का अहम हिस्सा होता है और सरकारें महंगाई को एडजस्ट करने के लिए यह इजाफा करती हैं, ताकी कर्मचारियों के जीवनयापन में किसी भी तरह की परेशानी न हो.
क्या है डीए?
DA एक बेसिक कॉस्ट-ऑफ-लिविंग एडजस्टमेंट है, जिसे सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को सपोर्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है. यह खास तौर पर फिक्स्ड इनकम पर महंगाई के असर को कम करने के लिए भी काम करता है.
अलाउंस को बेसिक सैलरी के परसेंटेज के तौर पर कैलकुलेट किया जाता है और वर्कफोर्स की परचेजिंग पावर बनाए रखने के लिए तय महंगाई इंडेक्स के आधार पर इसमें समय-समय पर बदलाव होते रहते हैं. महंगाई से जुड़ा यह अलाउंस साल में दो बार, आमतौर पर जनवरी और जुलाई में बदला जाता है. इसे लेबर ब्यूरो द्वारा हर महीने जारी किए जाने वाले कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स (CPI-IW) के आधार पर निकाला जाता है.
Latest Stories
दोस्तों और रिश्तेदारों को क्रेडिट कार्ड देना पड़ सकता है भारी, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट भेज सकता है नोटिस
रेलवे पेंशनर्स की हुई बल्ले-बल्ले… बढ़ गया DR, इस महीने से खाते में आएगा ज्यादा पैसा, जानें पूरा हिसाब
8वें वेतन आयोग पर अभी भी कई सवाल, लागू होने की तारीख से लेकर एरियर तक… 5 पॉइंट्स में जानें सबकुछ
