NSC vs FD: 5 साल में कहां है अधिक रिटर्न? जानें 2026 में आपके लिए कौन बेहतर है, निवेश से पहले इन 5 बातों का रखें ध्यान
टैक्स बचाने और सुरक्षित निवेश के लिए NSC और टैक्स-सेविंग FD दो लोकप्रिय विकल्प हैं. दोनों में 5 साल का लॉक-इन और टैक्स छूट का फायदा मिलता है, लेकिन ब्याज दर, टैक्स नियम और रिटर्न में अंतर है. ऐसे में 2026 में निवेश से पहले इन दोनों विकल्पों की सही तुलना करना जरूरी है, ताकि बेहतर रिटर्न मिल सके.

NSC vs Tax Saving FD: टैक्स बचाने और सुरक्षित निवेश करने के लिए भारत में दो लोकप्रिय विकल्प हैं. पहला नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) और दूसरा टैक्स-सेविंग फिक्स्ड डिपॉजिट (FD). दोनों में 5 साल का लॉक-इन होता है और दोनों पर टैक्स छूट का फायदा मिलता है. लेकिन इनकी ब्याज दर, टैक्सेशन और रिटर्न का तरीका अलग है. ऐसे में निवेश से पहले सही तुलना जरूरी है.
NSC: सुरक्षित और बेहतर ब्याज वाला विकल्प
NSC एक सरकारी योजना है, जिसमें निवेश पूरी तरह सुरक्षित रहता है. 2026-27 की पहली तिमाही के लिए इसकी ब्याज दर 7.7% तय की गई है. यह दर टैक्स-सेविंग FD से थोड़ी ज्यादा है, इसलिए लंबे समय में रिटर्न बेहतर हो सकता है.
टैक्स-सेविंग FD: बैंक का भरोसा, आसान निवेश
टैक्स-सेविंग FD बैंकों द्वारा दी जाती है और इसमें ब्याज दर करीब 7% के आसपास होती है. यह भी सुरक्षित निवेश है, लेकिन इसमें ब्याज दर बैंक के अनुसार बदल सकती है.
टैक्स छूट: दोनों में मिलती है, लेकिन नियम अलग
दोनों योजनाओं में ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट मिलती है (पुराने टैक्स सिस्टम में).
- NSC में पहले 4 साल का ब्याज दोबारा निवेश माना जाता है, जिस पर हर साल टैक्स छूट मिल सकती है.
- FD में सिर्फ निवेश की राशि पर छूट मिलती है, ब्याज पूरी तरह टैक्सेबल होता है.
ब्याज पर टैक्स: यहां पड़ता है फर्क
- NSC: आखिरी साल का ब्याज टैक्सेबल होता है, बाकी सालों में टैक्स का फायदा मिल सकता है.
- FD: हर साल मिलने वाला ब्याज टैक्सेबल होता है और बैंक TDS भी काट सकता है.
पैसा कब निकाल सकते हैं?
दोनों में 5 साल का लॉक-इन है, लेकिन:
- NSC में कुछ खास परिस्थितियों (जैसे मृत्यु या कोर्ट आदेश) में पैसा पहले निकाला जा सकता है.
- FD में समय से पहले पैसा निकालने की अनुमति नहीं होती, और न ही इसके खिलाफ लोन मिलता है.
आपके लिए कौन बेहतर?
अगर आप ज्यादा रिटर्न और टैक्स में अतिरिक्त फायदा चाहते हैं, तो NSC बेहतर विकल्प हो सकता है. वहीं, अगर आप बैंकिंग सिस्टम में आसान निवेश और स्थिरता चाहते हैं, तो टैक्स-सेविंग FD सही रहेगा. निवेश करने से पहले अपनी टैक्स स्थिति, जरूरत और जोखिम क्षमता जरूर समझें. तभी सही फैसला ले पाएंगे.
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