Gorakhpur Link Expressway पर टोल रेट तय, 91KM के लिए देने होंगे इतने रुपये; जानें अन्य एक्सप्रेसवे के मुकाबले क्या है चार्ज
उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे नेटवर्क लगातार मजबूत हो रहा है और Gorakhpur Link Expressway इसकी नई कड़ी बनकर सामने आया है. इस 91 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे पर एक तरफ के सफर के लिए कारों से 285 रुपये टोल वसूला जाएगा, जिसे UPEIDA ने मंजूरी दी है. यह एक्सप्रेसवे आजमगढ़ के सलारपुर को गोरखपुर के जैतपुर से जोड़ता है.
Gorakhpur Expressway Toll: उत्तर प्रदेश इस समय भारत में एक्सप्रेसवे के मामले में सबसे आगे निकल चुका है और राज्य में कई एक्सप्रेसवे पर काम चल रहा है. जून 2025 में Gorakhpur Link Expressway उत्तर प्रदेश की सूची में नया शामिल हुआ था और अब इस पर टोल रेट को आधिकारिक मंजूरी मिल गई है. उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (UPEIDA) ने इस एक्सप्रेसवे पर एक तरफ के सफर के लिए कारों से 285 रुपये टोल वसूलने को मंजूरी दी है. यह एक्सप्रेसवे करीब 91 किलोमीटर लंबा है और आजमगढ़ के सलारपुर को गोरखपुर के जैतपुर से जोड़ता है.
अन्य एक्सप्रेसवे के मुकाबले टोल कितना महंगा
Gorakhpur Link Expressway पर प्रति किलोमीटर टोल करीब 3.12 रुपये बैठता है, जो राज्य के अन्य एक्सप्रेसवे की तुलना में ज्यादा है. उदाहरण के तौर पर, इससे लंबा पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर प्रति किलोमीटर करीब 1.98 रुपये और लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर करीब 2.10 रुपये टोल वसूला जाता है. अधिकारियों के अनुसार, इस एक्सप्रेसवे की लागत ज्यादा आने की वजह इसके निर्माण में आई चुनौतियां हैं.
एक्सप्रेसवे पर कई पुल और कल्वर्ट बनाए गए हैं, वहीं बाढ़ संभावित इलाकों में मजबूत तटबंध तैयार किए गए हैं. मानसून के दौरान क्षति के कारण बार-बार मरम्मत करनी पड़ी, जिससे परियोजना की लागत बढ़ गई. 340 किलोमीटर लंबे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर 675 रुपये टोल चार्ज है, जबकि 302 किलोमीटर लंबे लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर कुल 635 रुपये टोल लगता है.
| एक्सप्रेसवे का नाम | कुल लंबाई (किलोमीटर) | कुल टोल (रुपये) | प्रति किलोमीटर टोल (रुपये) |
|---|---|---|---|
| गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे | 91 | 285 | 3.12 |
| पूर्वांचल एक्सप्रेसवे | 340 | 675 | 1.98 |
| लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे | 302 | 635 | 2.10 |
क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में अहम भूमिका
यह एक्सप्रेसवे सीधे गोरखपुर को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ता है, जिससे लखनऊ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ओर तेज यात्रा संभव हो पाती है. अब वाहनों को भीड़भाड़ वाले कस्बों और शहरों से होकर नहीं गुजरना पड़ता. यह एक्सप्रेसवे गोरखपुर, संत कबीर नगर, अंबेडकर नगर और आजमगढ़ जिलों से होकर गुजरता है. गोरखपुर और आजमगढ़ के बीच यात्रा समय में कमी आई है, जिससे आपात सर्विस और लॉजिस्टिक्स मूवमेंट को भी फायदा मिला है. पूरी तरह एक्सेस कंट्रोल्ड यह एक्सप्रेसवे सुरक्षा और सुचारू यातायात दोनों को बेहतर बनाता है.
व्यापार और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
गोरखपुर भारत-नेपाल सीमा के नजदीक स्थित है, ऐसे में यह एक्सप्रेसवे सीमा से जुड़े व्यापार और पर्यटन के लिए भी अहम साबित हो सकता है. सोनौली जैसे बॉर्डर टाउन तक पहुंच आसान होने से क्रॉस-बॉर्डर ट्रेड को गति मिलने की उम्मीद है. तेज यात्रा से ईंधन की खपत घटती है. किसानों को भी फायदा होगा, क्योंकि कृषि उत्पाद कम समय में बाजार तक पहुंच सकेंगे.
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