यूपी में रियल एस्टेट निवेश 54% उछला, नोएडा बना हॉटस्पॉट, लखनऊ दूसरे नंबर पर, धार्मिक शहरों में भी बढ़ा इंवेस्टमेंट
एक बड़े राज्य में प्रॉपर्टी सेक्टर ने निवेशकों का ध्यान खींचा है. बढ़ते रजिस्ट्रेशन, नई जगहों तक फैलता विकास और नीति सुधारों के असर से रियल एस्टेट बाजार में नई रफ्तार दिख रही है. यह ट्रेंड आने वाले समय के लिए अहम संकेत दे रहा है.
Uttar Pradesh real estate growth: उत्तर प्रदेश का रियल एस्टेट बाजार 2025 में निवेशकों के लिए एक मजबूत निवेश गंतव्य बनकर उभरा है. सरकारी आंकड़े बताते हैं कि बीते एक साल में राज्य में आवासीय और वाणिज्यिक परियोजनाओं में निवेश तेजी से बढ़ा है. रजिस्ट्रेशन, मंजूर इकाइयों और पूंजी निवेश, तीनों मोर्चों पर आई इस उछाल ने यह साफ कर दिया है कि प्रदेश के प्रॉपर्टी बाजार में निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है.
एक साल में निवेश में 54% की छलांग
Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority (UPRERA) के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में कुल निवेश बढ़कर 68,328 करोड़ रुपये पहुंच गया. यह 2024 के 44,526 करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 54 फीसदी ज्यादा है. यह बढ़ोतरी उत्तर प्रदेश को देश के सबसे तेज़ी से बढ़ते रियल एस्टेट निवेश गंतव्यों में शामिल करती है.
2025 में UPRERA के तहत कुल 308 प्रोजेक्ट्स रजिस्टर किए गए, जो किसी एक साल में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है. यह संख्या पिछले साल के 259 प्रोजेक्ट्स से करीब 19 फीसदी ज्यादा है.
यूनिट्स की संख्या में भी तेज बढ़त
राज्य में मंजूर की गई आवासीय और वाणिज्यिक इकाइयों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है. 2025 में कुल 84,976 यूनिट्स को मंजूरी दी गई, जो 2024 के 69,365 यूनिट्स से 22.5 फीसदी ज्यादा है. पिछले दो सालों में ही UPRERA ने 1.54 लाख से अधिक यूनिट्स को हरी झंडी दी है, जिससे हाउसिंग, रिटेल और मिक्स्ड-यूज प्रोजेक्ट्स में लगातार मांग का संकेत मिलता है.
नोएडा सबसे आगे, लखनऊ दूसरे नंबर पर
जिलों की बात करें तो गौतम बुद्ध नगर, 2025 में सबसे आगे रहा. यहां 69 प्रोजेक्ट्स और 37,199 यूनिट्स को मंजूरी मिली. लखनऊ 67 प्रोजेक्ट्स और 13,668 यूनिट्स के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि गाजियाबाद में 29 प्रोजेक्ट्स के तहत 10,747 यूनिट्स को स्वीकृति दी गई.
निवेश के लिहाज से भी नोएडा शीर्ष पर रहा, जहां 37,161 करोड़ रुपये का निवेश दर्ज किया गया. इसके बाद गाजियाबाद में 12,750 करोड़ और लखनऊ में 9,398 करोड़ रुपये का निवेश हुआ.
NCR से बाहर भी बढ़ा दायरा
308 में से 186 प्रोजेक्ट्स NCR से बाहर के जिलों में हैं, जो यह दिखाता है कि निवेश का दायरा अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है. 2025 में रियल एस्टेट गतिविधियां 27 जिलों तक फैल गईं, जबकि 2024 में यह 23 जिलों तक सीमित थीं. बुलंदशहर, रामपुर, चंदौली, गोंडा और मिर्जापुर जैसे नए जिलों में भी 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का संयुक्त निवेश देखने को मिला.
अयोध्या, मथुरा, वाराणसी और प्रयागराज जैसे धार्मिक शहरों में भी रियल एस्टेट गतिविधियां तेज हुई हैं. बढ़ते पर्यटन और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण यहां होटल, मिक्स्ड-यूज और आवासीय प्रोजेक्ट्स की मांग बढ़ी है. मथुरा में 23, वाराणसी में 9, प्रयागराज में 7 और अयोध्या में 5 प्रोजेक्ट्स का रजिस्ट्रेशन इसी ट्रेंड को दिखाता है.
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नीति बदलावों का असर
सरकार द्वारा टाउनशिप नीति में किए गए बदलावों, जैसे न्यूनतम भूमि आवश्यकता को 25 एकड़ से घटाकर 12.5 एकड़ करना और समयसीमा तय करना, ने भी निवेश को बढ़ावा दिया है. UPRERA के अनुसार, इन कदमों से न सिर्फ निवेशकों का भरोसा बढ़ा है, बल्कि खरीदारों के हितों की भी बेहतर सुरक्षा हुई है.