Closing Bell: सेंसेक्स 750 अंक टूटकर और निफ्टी 24400 के नीचे बंद, IT शेयरों में गिरावट ने तोड़ा 3 दिन की तेजी का सिलसिला
Closing Bell: भारतीय शेयर बाजार के बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी50 को बुधवार 22 अप्रैल को भारी नुकसान उठाना पड़ा, जिससे उनकी लगातार तीन सत्रों की बढ़त का सिलसिला टूट गया. बैंकों और IT की बड़ी कंपनियों में प्रॉफ़िट बुकिंग के कारण इक्विटी बेंचमार्क में गिरावट आई.
Closing Bell: भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को भारी गिरावट देखने को मिली. सुबह के सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही लगभग 1 फीसदी टूट गए. यह गिरावट तब आई, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध के लिए 22 अप्रैल की अपनी सीजफायर (युद्धविराम) की समय सीमा को आगे बढ़ाने की घोषणा की थी. इसकी मुख्य वजह यह रही कि गिरता रुपया, तेल की बढ़ती कीमतें और अन्य फैक्टर्स ने निवेशकों को असमंजस में डाल दिया.
भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स ने तीन दिन की बढ़त का सिलसिला तोड़ दिया और 22 अप्रैल को निफ्टी 24,400 से नीचे आकर गिरावट के साथ बंद हुआ.
सेंसेक्स 756.84 अंक या 0.95 फीसदी गिरकर 78,516.49 पर बंद हुआ और निफ्टी 198.5 अंक या 0.81 फीसदी गिरकर 24,378.10 पर क्लोज हुआ.
टॉप गेनर्स और लूजर्स
Nifty में सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में HCL Technologies, Tech Mahindra, Infosys, TCS, M&M शामिल थे, जबकि बढ़त बनाने वाले शेयरों में Tata Consumer Products, Hindustan Unilever, Tata Motors Passenger Vehicles, NTPC, Hindalco Industries शामिल थे.
सेक्टोरल इंडेक्स
सेक्टर्स की बात करें तो IT इंडेक्स में लगभग 4 फीसदी की गिरावट आई, प्राइवेट इंडेक्स 0.8 फीसदी गिरा, जबकि ऑयल एंड गैस, एफएमसीजी, मीडिया, मेटल, रियल्टी, हर एक में 0.4 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई.
टेक्नोलॉजी सेक्टर में भारी बिकवाली देखने को मिली, क्योंकि कमजोर कमाई के आंकड़ों से निवेशक घबरा गए, जिससे Nifty IT इंडेक्स 3.89 फीसदी नीचे गिर गया. निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी ऑटो में भी क्रमशः 0.73% और 0.66% की गिरावट आई.
कमजोर वैश्विक संकेत
ईरान द्वारा शांति वार्ता के दूसरे दौर को ठुकराए जाने के बाद वॉल स्ट्रीट इंडेक्स में गिरावट आई, जिसके चलते जापान के निक्केई और कोरिया के कोस्पी सहित प्रमुख एशियाई बाजार मामूली बढ़त के साथ बंद हुए.
अमेरिका-ईरान युद्ध को लेकर विरोधाभासी संकेतों के कारण बाज़ारों में निवेशकों का भरोसा अभी भी कमजोर बना हुआ है. मजबूत होता अमेरिकी डॉलर और बढ़ती अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड भी भारत जैसे उभरते बाजारों पर दबाव डाल रहे हैं.
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