अक्षय तृतीया के बाद गोल्ड ETF में जबरदस्त तेजी, 61 फीसदी तक रिटर्न; जानें आगे का आउटलुक

ओवरऑल देखा जाए तो सॉवरेन डिमांड अभी भी पॉजिटिव बनी हुई है, और नए या लंबे समय से निष्क्रिय सेंट्रल बैंक भी अब खरीदारी में शामिल हो रहे हैं, जिससे डिमांड बेस और मजबूत हो रहा है. कुछ सेंट्रल बैंकों की सेलिंग जरूर देखने को मिली है, लेकिन ये स्ट्रक्चरल नहीं बल्कि ऑपरेशनल कारणों से है. उदाहरण के तौर पर फ्रांस ने 129 टन गोल्ड बेचा, लेकिन यह सिर्फ स्वैप और रिपैट्रिएशन प्रोसेस का हिस्सा था.

गोल्ड ETF Image Credit: gettyimage

Gold ETF : भारत में सोना सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि परंपरा और आस्था से भी जुड़ा हुआ है. खासकर अक्षय तृतीया जैसे मौके पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है. अब इसी पारंपरिक निवेश का आधुनिक रूप यानी गोल्ड ETF भी निवेशकों को शानदार रिटर्न दे रहा है. पिछली अक्षय तृतीया (30 अप्रैल 2025) से अब तक गोल्ड ETF ने जबरदस्त रिटर्न दिया है. इस तेजी में कई ETF ने 61 फीसदी तक का रिटर्न दिया है.

गोल्ड ETF का शानदार प्रदर्शन

पिछली अक्षय तृतीया (30 अप्रैल 2025) से अब तक गोल्ड ETF ने जबरदस्त रिटर्न दिया है. इस दौरान औसतन करीब 59.63 फीसदी का रिटर्न मिला, जबकि कुछ फंड्स ने 60-61 फीसदी तक की तेजी दिखाई. Tata Gold ETF करीब 60.59 फीसदी चढ़ा, जबकि Aditya Birla SL Gold ETF और ICICI Pru Gold ETF ने भी 60 फीसदी से ज्यादा रिटर्न दिया. इसके अलावा Zerodha Gold ETF, Kotak Gold ETF और Quantum Gold Fund ETF जैसे फंड्स ने भी निवेशकों को मजबूत रिटर्न दिया है.

रैली के पीछे क्या वजह है?

गोल्ड ETF में आई इस तेजी के पीछे कई ग्लोबल फैक्टर काम कर रहे हैं. जियोपॉलिटिकल तनाव, सेंट्रल बैंकों की खरीदारी, ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद और वैश्विक अनिश्चितता ने सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में मजबूत बनाया है. जब भी शेयर बाजार या करेंसी में उतार-चढ़ाव बढ़ता है, निवेशक सोने की तरफ रुख करते हैं, जिससे इसकी कीमतों को सपोर्ट मिलता है.

आगे का आउटलुक

Mirae Asset के मुताबिक, Gold के फंडामेंटल्स अभी भी स्ट्रॉन्ग बने हुए हैं, भले ही शॉर्ट टर्म में प्राइस में वोलैटिलिटी देखने को मिली हो. World Gold Council (WGC) के मुताबिक मार्च 2026 में गोल्ड में करीब 12 फीसदी की गिरावट आई, जो 2013 के बाद सबसे बड़ी मंथली करेक्शन रही. यह गिरावट मुख्य रूप से ETF आउटफ्लो, फ्यूचर्स मार्केट में डी-लेवरेजिंग, CTA (Commodity Trading Advisors) की सेलिंग और कुछ सेंट्रल बैंकों की बिकवाली के कारण आई. हालांकि WGC का मानना है कि यह गिरावट टेक्निकल और लिक्विडिटी बेस्ड थी, जबकि मिड-टू-लॉन्ग टर्म फंडामेंटल्स अभी भी मजबूत हैं. सेंट्रल बैंक की खरीदारी गोल्ड के लिए मजबूत सपोर्ट का काम कर रही है. 2025 में जहां करीब 863 टन की नेट खरीदारी हुई थी, वहीं 2026 में भी 750–850 टन तक खरीदारी का अनुमान है, जो ऐतिहासिक औसत से काफी ज्यादा है.

कुछ सेंट्रल बैंकों की सेलिंग जरूर देखने को मिली है, लेकिन ये स्ट्रक्चरल नहीं बल्कि ऑपरेशनल कारणों से है. उदाहरण के तौर पर फ्रांस ने 129 टन गोल्ड बेचा, लेकिन यह सिर्फ स्वैप और रिपैट्रिएशन प्रोसेस का हिस्सा था. कुल रिजर्व में कोई कमी नहीं आई. इसलिए इसे नेगेटिव सिग्नल नहीं माना जा रहा.

ओवरऑल देखा जाए तो सॉवरेन डिमांड अभी भी पॉजिटिव बनी हुई है, और नए या लंबे समय से निष्क्रिय सेंट्रल बैंक भी अब खरीदारी में शामिल हो रहे हैं, जिससे डिमांड बेस और मजबूत हो रहा है.

ETF फ्लो में रीजनल डाइवर्जेंस देखने को मिल रहा है. मार्च 2026 में ग्लोबली करीब 12 अरब डॉलर का आउटफ्लो हुआ, जो मुख्य रूप से नॉर्थ अमेरिका से आया. वहीं एशिया, खासकर चीन में मजबूत इनफ्लो देखने को मिला, जो यह दिखाता है कि वेस्टर्न मार्केट जहां शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग कर रहा है, वहीं ईस्टर्न मार्केट लॉन्ग टर्म एक्यूम्यूलेशन पर फोकस कर रहा है.

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