Hindalco, NALCO और Vedanta Aluminium में 5% तक गिरावट; जानिए क्यों फिसले एल्युमिनियम स्टॉक्स
एल्युमिनियम स्टॉक्स में आई इस गिरावट की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में एल्युमिनियम की कीमतों में आई तेज कमजोरी रही. अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की घोषणा के बाद सप्लाई को लेकर चिंताएं कम हुई हैं, जिससे मेटल के मार्केट में दबाव बढ़ गया.
मंगलवार, 16 जून को एल्युमिनियम सेक्टर के प्रमुख स्टॉकs में जोरदार बिकवाली देखने को मिली. देश की बड़ी एल्युमिनियम कंपनियों Hindalco Industries, NALCO और Vedanta Aluminium के स्टॉक्स में 5 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई. कारोबार के दौरान Hindalco का स्टॉक करीब 4.7 प्रतिशत तक टूट गया, जबकि NALCO में 5.7 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली. वहीं Vedanta Aluminium Metal का स्टॉक 5 प्रतिशत के लोअर सर्किट में फंस गया.
US-ईरान शांति समझौते के बाद टूटी एल्युमिनियम की कीमतें
एल्युमिनियम स्टॉक्स में आई इस गिरावट की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में एल्युमिनियम की कीमतों में आई तेज कमजोरी रही. अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की घोषणा के बाद सप्लाई को लेकर चिंताएं कम हुई हैं, जिससे मेटल के मार्केट में दबाव बढ़ गया.
लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर एल्युमिनियम फ्यूचर्स करीब 4.4 प्रतिशत गिरकर 3,379 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया, जो फरवरी के अंत में शुरू हुए अमेरिका-ईरान संघर्ष के बाद का सबसे निचला स्तर है.
होर्मुज स्ट्रेट खुलने से बढ़ी सप्लाई की उम्मीद
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए बने फ्रेमवर्क एग्रीमेंट के बाद खाड़ी क्षेत्र से एल्युमिनियम की सप्लाई सामान्य होने की उम्मीद बढ़ गई है. दोनों देशों के बीच MoU पर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में आधिकारिक हस्ताक्षर होने की संभावना है. इसके बाद होर्मुज स्ट्रेट दोबारा खुल सकता है, जहां फरवरी के अंत से शिपिंग गतिविधियां काफी हद तक प्रभावित थीं.
होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है. इसके खुलने से खाड़ी देशों से एल्युमिनियम निर्यात और कच्चे माल की आपूर्ति आसान होने की उम्मीद है.
खाड़ी क्षेत्र का वैश्विक सप्लाई में बड़ा योगदान
खाड़ी क्षेत्र के एल्युमिनियम उत्पादक वैश्विक सप्लाई का लगभग 9 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं. ये कंपनियां अपने उत्पादों को दुनिया भर में भेजने और कच्चा माल आयात करने के लिए होर्मुज स्ट्रेट पर निर्भर रहती हैं. यही कारण है कि युद्ध के दौरान सप्लाई बाधित होने की आशंका से एल्युमिनियम की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला था, जबकि अब शांति समझौते के बाद कीमतों में गिरावट आ रही है.
युद्ध के दौरान रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंची थीं कीमतें
अमेरिका-ईरान तनाव के दौरान एल्युमिनियम की कीमतें वैश्विक और घरेलू बाजारों में रिकॉर्ड ऊंचाई के करीब पहुंच गई थीं. इसका मुख्य कारण व्यापारिक मार्गों में रुकावट और सप्लाई को लेकर बढ़ी अनिश्चितता थी. स्थिति तब और गंभीर हो गई थी जब मार्च 2026 में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने यूएई और बहरीन स्थित प्रमुख एल्युमिनियम प्लांट्स पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे.
इन हमलों में UAE की Emirates Global Aluminium (EGA) और Bahrain की Alba सुविधाओं को नुकसान पहुंचा था, जिससे वैश्विक सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं और एल्युमिनियम की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला था.
शेयरों में दिखा दबाव
मंगलवार सुबह 11:13 बजे तक Hindalco Nifty 50 का सबसे ज्यादा गिरने वाला शेयर बना हुआ था और करीब 3.34 प्रतिशत की कमजोरी के साथ कारोबार कर रहा था. NALCO का शेयर 5.45 प्रतिशत टूटकर 361.55 रुपये पर पहुंच गया, जबकि Vedanta Aluminium Metal का शेयर 5 प्रतिशत के लोअर सर्किट के साथ 471 रुपये पर कारोबार कर रहा था.
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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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