बिना शोर मचाए बड़ा खेल, BlackBuck क्यों कहलाने लगा है ट्रक ऑपरेटरों का भरोसेमंद साथी; 5 साल में दिया 95% का रिटर्न
BlackBuck की शुरुआत साल 2015 में Zinka Logistics Solutions के नाम से हुई थी. पहले यह किसी बड़े प्लेटफॉर्म की तरह नहीं, बल्कि ट्रक चालकों की छोटी-छोटी दिक्कतें दूर करने के लिए बनी थी. सबसे पहले टोल भुगतान. फिर वाहन ट्रैकिंग. इसके बाद फ्यूल पेमेंट जोड़े गए.
BlackBuck: फैक्ट्रियों से माल निकलना हो या बाजार तक पहुंचना, हर जगह ट्रकों की जरूरत पड़ती है. लेकिन इस सेक्टर में काम करने वाली कंपनियां अक्सर सुर्खियों में नहीं आतीं. इसी खामोश लेकिन अहम जगह पर काम कर रही है BlackBuck. पहली नजर में यह एक लॉजिस्टिक्स टेक कंपनी लगती है, मगर असल में इसकी ताकत कुछ और है. यह कंपनी टोल पेमेंट से लेकर ईंधन भुगतान, ट्रैकिंग और फाइनेंस तक ट्रक मालिकों की रोजमर्रा की जरूरतों को आसान बनाती है. बाजार में इसे अब ‘अगला इंफ्रास्ट्रक्चर जायंट’ कहा जाने लगा है. निवेशकों की नजर इस पर इसलिए भी है क्योंकि इसका बिजनेस मॉडल दिखावे से ज्यादा स्थिर और लंबे समय के इस्तेमाल पर टिका हुआ है.
Zinka से BlackBuck तक का सफर
BlackBuck की शुरुआत साल 2015 में Zinka Logistics Solutions के नाम से हुई थी. पहले यह किसी बड़े प्लेटफॉर्म की तरह नहीं, बल्कि ट्रक चालकों की छोटी-छोटी दिक्कतें दूर करने के लिए बनी थी. सबसे पहले टोल भुगतान. फिर वाहन ट्रैकिंग. इसके बाद फ्यूल पेमेंट जोड़े गए. माल ढुलाई और वाहन फाइनेंस जैसे कारोबार बाद में आए. इससे साफ है कि कंपनी रोज आने वाली समस्याओं को पहले हल करना चाहती थी.
टोल पेमेंट क्यों है सबसे अहम
हर लंबी दूरी तय करने वाला ट्रक टोल जरूर देता है. इसमें कोई ऑप्शन नहीं होता. BlackBuck ने इसी मजबूरी को अपनी ताकत बनाया. सितंबर 2025 तिमाही तक कंपनी देश के करीब आधे ट्रक टोल पेमेंट संभाल रही थी. जब एक बार ड्राइवर इसका इस्तेमाल करने लगता है तो फिर ईंधन भुगतान और ट्रैकिंग जैसे फीचर अपने आप जुड़ जाते हैं. यही वजह है कि इसे सिर्फ ऐप नहीं, बल्कि एक तरह का इंफ्रास्ट्रक्चर माना जाने लगा है.
किन हिस्सों में बंटा है कंपनी का कारोबार
BlackBuck के चार बड़े सेगमेंट हैं. पहला पेमेंट और टेलीमैटिक्स, जिसमें टोल, फ्यूल और ट्रैकिंग शामिल हैं. यही सबसे ज्यादा कमाई और मुनाफा लाते हैं. दूसरा फ्यूल सेंसर है, जिससे ईंधन चोरी और खर्च पर नजर रखी जाती है. तीसरा Superloads नाम का फ्रेट प्लेटफॉर्म है, जो ट्रकों को माल से जोड़ता है, लेकिन अभी यह धीरे-धीरे बढ़ रहा है. चौथा वाहन फाइनेंस है, जिसमें कंपनी बैंकों के साथ मिलकर काम करती है और खुद ज्यादा जोखिम नहीं लेती.
इस्तेमाल के आंकड़े क्या बताते हैं
साल 2026 की दूसरी तिमाही तक करीब 7.9 लाख ट्रक ऑपरेटर हर महीने कंपनी के जरिए लेनदेन कर रहे थे. इनमें से करीब 4 लाख दो या उससे ज्यादा सेवाएं लेते थे. यूजर रोज औसतन 43 मिनट ऐप पर बिताते हैं. यह दिखाता है कि लोग इस सिस्टम पर निर्भर हो चुके हैं. कमजोर सीजन के बावजूद कंपनी की तिमाही आमदनी 151 करोड़ रुपये रही. मुनाफा भी तेजी से बढ़ा. हालांकि नए कारोबार में निवेश की वजह से खर्च बढ़ा है. कंपनी जानबूझकर नए सेगमेंट में पैसा लगा रही है, जबकि पुराना कारोबार मुनाफा कमा रहा है.
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