पाकिस्तान को भारत का T20 WC बायकॉट पड़ेगा भारी, ₹349 करोड़ का लगेगा झटका; क्या ICC लगाएगा बैन
पाकिस्तान सरकार ने अपनी टीम को टूर्नामेंट खेलने की इजाजत तो दे दी है, मगर भारत के खिलाफ होने वाले लीग मैच के लिए मना कर दिया है. राजनीतिक तनाव के कारण पहले ही पाकिस्तान ने भारत में खेलने से इनकार किया था, जिसके बाद मैचों को श्रीलंका शिफ्ट किया गया. अब अगर पाकिस्तान यह मुकाबला नहीं खेलता है, तो उसे सिर्फ आलोचना ही नहीं, बल्कि भारी आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है.
Pakistan T20 World Cup: T20 वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में भारत और पाकिस्तान की भिड़ंत हमेशा सबसे ज्यादा चर्चा में रहती है. करोड़ों दर्शक इस मुकाबले का इंतजार करते हैं और ब्रॉडकास्टर्स के लिए यह सबसे कमाऊ मैच माना जाता है. लेकिन इस बार मामला सिर्फ खेल तक सीमित नहीं है. पाकिस्तान सरकार ने अपनी टीम को टूर्नामेंट खेलने की इजाजत तो दे दी है, मगर भारत के खिलाफ होने वाले लीग मैच के लिए मना कर दिया है. राजनीतिक तनाव के कारण पहले ही पाकिस्तान ने भारत में खेलने से इनकार किया था, जिसके बाद मैचों को श्रीलंका शिफ्ट किया गया. अब अगर पाकिस्तान यह मुकाबला नहीं खेलता है, तो उसे सिर्फ आलोचना ही नहीं, बल्कि भारी आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है.
भारत मैच पर क्यों बना है विवाद
भारत और पाकिस्तान का लीग मुकाबला 15 फरवरी को कोलंबो में होना तय था. राजनीतिक हालात की वजह से पाकिस्तान पहले ही भारत में खेलने से मना कर चुका था, इसलिए International Cricket Council ने इन मैचों को श्रीलंका में कराने का फैसला लिया. इसी बीच बांग्लादेश ने भी सुरक्षा कारणों से भारत में मैच न खेलने की मांग की थी, लेकिन उसे मंजूरी नहीं मिली.
अब पाकिस्तान सरकार ने टूर्नामेंट खेलने की हरी झंडी दी है, लेकिन भारत के खिलाफ मैच को लेकर मना कर दिया है.
मैच नहीं खेलने पर कितना नुकसान होगा
NDTV की एक रिपोर्ट के मुताबिक अगर पाकिस्तान भारत के खिलाफ मैच नहीं खेलता है, तो उसे करीब 38 मिलियन डॉलर यानी 34.94 लाख करोड़ रुपये का झटका लग सकता है. ब्रॉडकास्टर्स इस मैच के लिए पहले ही विज्ञापन बेच चुके हैं और करार में साफ लिखा है कि मुकाबला न होने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. यह मैच पूरे टूर्नामेंट का सबसे महंगा मुकाबला माना जाता है, जहां विज्ञापन दरें सबसे ऊंची होती हैं. ऐसे में मैच छोड़ने से पाकिस्तान को करोड़ों डॉलर का नुकसान होगा.
कानूनी और आर्थिक संकट का खतरा
नियमों के मुताबिक, अगर कोई टीम अपनी मर्जी से मैच नहीं खेलती है तो उसे किसी तरह की राहत नहीं मिलती. इसका मतलब है कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को जुर्माना, हर्जाना और कानूनी खर्च अपनी जेब से भरना पड़ेगा. इसके अलावा, बोर्ड को टूर्नामेंट में हिस्सा लेने की फीस और प्रदर्शन से जुड़ी प्रोत्साहन राशि भी गंवानी पड़ सकती है. यह रकम पांच लाख से दस लाख डॉलर तक हो सकती है.
लंबे समय तक असर पड़ सकता है
एक्सपर्ट का कहना है कि इस तरह का बहिष्कार भविष्य में भी पाकिस्तान के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है. प्रायोजक पैसे वापस मांग सकते हैं. आने वाले टूर्नामेंट में पाकिस्तान से जुड़े मैचों के मीडिया अधिकारों की कीमत कम हो सकती है. अगर कुल नुकसान 40 मिलियन डॉलर से ज्यादा पहुंचता है, तो इसका असर खिलाड़ियों के पेमेंट, घरेलू टूर्नामेंट, स्टेडियम सुधार और जमीनी स्तर पर क्रिकेट के विकास पर भी पड़ सकता है.
क्या हो अगर पूरे टूर्नामेंट से बाहर हो
पाकिस्तान के लिए पूरे टूर्नामेंट बाहर होना बहुत मुश्किल और जोखिम भरा है क्योंकि ICC से सख्त सजा मिल सकती है जैसे बैन लगना, होस्टिंग राइट्स छिनना, सालाना 34.5 मिलियन डॉलर की कमाई रुकना और PSL में विदेशी खिलाड़ी नहीं आना. ICC के साथ पहले से साइन किया हुआ कॉन्ट्रैक्ट तोड़ना कानूनी रूप से गलत होगा. मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक इससे पाकिस्तान को 317 कोरोड़ रुपये का लॉस हो सकता है.
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