न अडानी, न अंबानी… ये दो दिग्गज बना रहें भारत का सबसे बड़ा 3GW डेटा सेंटर पार्क; 5 साल में दिया 228% तक का रिटर्न
इंटरनेट, क्लाउड, एआई और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग ने डेटा सेंटर को नई रफ्तार दी है. खास बात यह है कि अब सिर्फ बड़े नाम ही नहीं, बल्कि कुछ रियल एस्टेट और सरकारी कंपनियां भी इस रेस में उतर चुकी हैं. भारत में डेटा सेंटर मार्केट तेजी से बढ़ रहा है. 2025 में यह करीब 10 अरब डॉलर का था, जो 2030 तक 22 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है.

Real estate: भारत में डेटा सेंटर सेक्टर तेजी से उभर रहा है और आने वाले समय में यह डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनने वाला है. इंटरनेट, क्लाउड, एआई और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग ने इस सेक्टर को नई रफ्तार दी है. खास बात यह है कि अब सिर्फ बड़े नाम ही नहीं, बल्कि कुछ रियल एस्टेट और सरकारी कंपनियां भी इस रेस में उतर चुकी हैं. दिलचस्प यह है कि इस बार चर्चा अडानी या अंबानी की नहीं, बल्कि एक ऐसी कंपनी की है जो देश का सबसे बड़ा डेटा सेंटर पार्क बनाने की तैयारी कर रही है.
इसके साथ ही एक सरकारी कंपनी भी तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रही है. सरकार की नई नीतियां और टैक्स छूट इस सेक्टर को और बढ़ावा दे रही हैं. ऐसे में निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि इस तेजी के पीछे असली कहानी क्या है और कौन सी कंपनियां आगे निकल सकती हैं.
भारत में डेटा सेंटर सेक्टर की तेज रफ्तार
भारत में डेटा सेंटर मार्केट तेजी से बढ़ रहा है. 2025 में यह करीब 10 अरब डॉलर का था, जो 2030 तक 22 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. इस सेक्टर में 60 से 70 अरब डॉलर के निवेश की संभावना है. सरकार ने भी इसे बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं. साल 2026 के बजट में विदेशी क्लाउड कंपनियों को टैक्स में राहत दी गई है, जिससे निवेश और बढ़ सकता है.
लोढ़ा का बड़ा दांव, 3GW डेटा सेंटर पार्क
लोढ़ा डेवलपर्स अब रियल एस्टेट से आगे बढ़कर डेटा सेंटर सेक्टर में बड़ा निवेश कर रही है. कंपनी अपने पालावा प्रोजेक्ट को देश के सबसे बड़े डेटा सेंटर हब में बदलना चाहती है. यहां 400 एकड़ जमीन पर 3 गीगावाट क्षमता का डेटा सेंटर पार्क बनाया जा रहा है. इस प्रोजेक्ट में बिजली, पानी और इंफ्रास्ट्रक्चर की पूरी सुविधा दी जा रही है. कंपनी ने Amazon Web Services और Temasek जैसी बड़ी कंपनियों को भी जोड़ा है. इससे इस प्रोजेक्ट की विश्वसनीयता बढ़ती है.
लोढ़ा का यह मॉडल लागत कम करने पर आधारित है. यहां डेटा सेंटर बनाने की लागत ग्लोबल स्तर से करीब 15 प्रतिशत कम है. बिजली की लागत भी कम है और कंपनी 90 प्रतिशत तक रिन्यूएबल एनर्जी का इस्तेमाल करने की योजना बना रही है. इससे ऑपरेटिंग खर्च भी कम होगा.
रेलटेल की बढ़ती पकड़
रेलटेल एक सरकारी कंपनी है. यह डेटा और टेलीकॉम सर्विस में काम करती है. कंपनी के पास देशभर में मजबूत नेटवर्क है.
रेलटेल पहले से ही गुरुग्राम और सिकंदराबाद में डेटा सेंटर चला रही है और अब नोएडा में नया बड़ा डेटा सेंटर बना रही है. इसके अलावा कंपनी 100 से ज्यादा लोकेशन पर छोटे डेटा सेंटर भी विकसित कर रही है.
ग्रोथ के साथ चुनौतियां भी
हालांकि इस सेक्टर में ग्रोथ के बड़े मौके हैं, लेकिन चुनौतियां भी हैं. कंपनियों को बड़े निवेश के साथ-साथ सही तरीके से प्रोजेक्ट को पूरा करना होगा. मुनाफे को स्थिर रखना भी एक बड़ी चुनौती है. डेटा सेंटर सेक्टर भविष्य के लिए मजबूत नजर आता है. लेकिन निवेशकों को सिर्फ ग्रोथ नहीं, बल्कि कंपनी के प्रदर्शन और रणनीति को भी समझना होगा.
| कंपनी | P/E | 5Y Median P/E | इंडस्ट्री मिडियन P/E | ROCE (%) | ROE (%) |
| Lodha | 25.7 | 46.9 | 27.3 | 15.6 | 14.7 |
| Railtel | 33.2 | 31.1 | 21.7 | 21.8 | 16.5 |
| सोर्स: screener.in (As of 15 April 2026) | |||||
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