क्यों खास है मदर ऑफ ऑल डील्स; रक्षा, सुरक्षा और रोजगार पर मिल सकता है फायदा, जानें ऐतिहासिक डील से क्या बदलेगा

भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा. इस डील के जरिए रक्षा और सुरक्षा सहयोग को भी नई दिशा मिलेगी. दोनों पक्ष बदलते वैश्विक हालात के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना चाहते हैं. भारतीय कंपनियों के लिए यूरोपीय रक्षा कार्यक्रमों में अवसर खुल सकते हैं.

इस डील के जरिए रक्षा और सुरक्षा सहयोग को भी नई दिशा मिलेगी. Image Credit: AI/canva

India EU- FTA: भारत और यूरोपीय संघ के बीच एक बड़ा और ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (मदर ऑफ ऑल डील्स) होने जा रहा है. इस समझौते की घोषणा आज की जा सकती है. दोनों पक्ष बदलते वैश्विक हालात और अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितताओं के बीच नई दिशा तय करना चाहते हैं. इस डील का असर केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा. डिफेंस, सिक्योरिटी, ग्लोबल वार्मिंग और टेक्निक जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढे़गा. यह समझौता भारत और यूरोप के रिश्तों को नई ऊंचाई पर ले जाने वाला माना जा रहा है.

कई क्षेत्रों में सहयोग पर फोकस

इस फ्री ट्रेड समझौते का मकसद केवल आयात निर्यात बढ़ाना नहीं है. दोनों पक्ष व्यापार के साथ रक्षा और सुरक्षा सहयोग को भी मजबूत करना चाहते हैं. इसके अलावा जलवायु परिवर्तन और अहम तकनीकों पर मिलकर काम करने की योजना है. नियम आधारित वैश्विक व्यवस्था को मजबूत करना भी इस साझेदारी का अहम हिस्सा होगा. इससे भारत और यूरोपीय संघ के रिश्ते ज्यादा गहरे होंगे.

रक्षा और सुरक्षा पर फोकस

भारत और यूरोपीय संघ के बीच एक नया डिफेंस एग्रीमेंट भी सामने आ सकता है. इसके तहत दोनों पक्ष रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में नजदीकी सहयोग बढ़ाएंगे. सैन्य तालमेल और रणनीतिक संवाद को मजबूती मिलेगी. इससे दोनों क्षेत्रों की सुरक्षा तैयारियां बेहतर हो सकेंगी. यह साझेदारी वैश्विक स्थिरता के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है.

भारतीय कंपनियों के लिए खुलेंगे डिफेंस सेक्टर

प्रस्तावित सुरक्षा और रक्षा साझेदारी से भारतीय कंपनियों को भी फायदा मिल सकता है. यूरोपीय संघ के रक्षा कार्यक्रमों में भारतीय फर्म्स की भागीदारी के रास्ते खुल सकते हैं. इससे रक्षा तकनीक और निवेश के नए अवसर मिलेंगे. भारतीय इंडस्ट्री को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मौजूदगी बढ़ाने का मौका मिलेगा. यह कदम आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भी मददगार हो सकता है.

यूरोप में नौकरी के नए अवसर

इस बैठक का एक अहम नतीजा भारतीय वर्कर की आवाजाही से जुड़ा समझौता हो सकता है. इसके तहत यूरोपीय देशों में भारतीय प्रोफेशनल्स और वर्कर के लिए रास्ते आसान होंगे. फ्रांस जर्मनी और इटली जैसे देशों के साथ पहले से सहयोग मौजूद है. यह समझौता युवाओं और स्किल वर्कर के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है.

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रिश्तों में मजबूती पर जोर

भारत और यूरोपीय संघ दो हजार चार से रणनीतिक साझेदार हैं. पिछले कुछ वर्षों में दोनों के रिश्तों में तेजी से सुधार हुआ है. यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन चुका है. हालिया वित्त वर्ष में दोनों के बीच वस्तुओं का व्यापार काफी मजबूत रहा. यह फ्री ट्रेड समझौता इस साझेदारी को और आगे ले जाने का काम करेगा.