EV भूल जाइए… हाइड्रोजन-सोलर से जुड़ी इन दो SME शेयरों पर कचोलिया-अग्रवाल का दांव, 5 साल में दिया 3000% तक का रिटर्न
अशिष कचोलिया और मुकुल अग्रवाल छोटे शेयरों में जल्दी मौके पहचानने के लिए जाना जाते हैं. ये दोनों निवेशक अक्सर ऐसे सेक्टर चुनते हैं जो अभी सुर्खियों में नहीं होते, लेकिन भविष्य की बड़ी कहानी बनने की क्षमता रखते हैं. इस बार इनकी नजर इलेक्ट्रिक व्हीकल से हटकर क्लाइमेट-टेक की ओर गई है.
Kacholia-Agrawal: भारत के शेयर बाजार में जब बड़े निवेशकों के नाम सामने आते हैं तो आम निवेशक तुरंत सतर्क हो जाता है. खासकर जब बात अशिष कचोलिया और मुकुल अग्रवाल जैसे दिग्गजों की हो, जिन्हें छोटे शेयरों में जल्दी मौके पहचानने के लिए जाना जाता है. ये दोनों निवेशक अक्सर ऐसे सेक्टर चुनते हैं जो अभी सुर्खियों में नहीं होते, लेकिन भविष्य की बड़ी कहानी बनने की क्षमता रखते हैं. इस बार इनकी नजर इलेक्ट्रिक व्हीकल से हटकर क्लाइमेट-टेक की ओर गई है.
भारत के नेट जीरो लक्ष्य से जुड़ी बुनियादी जरूरतों पर काम करने वाली दो छोटी कंपनियां इनके पोर्टफोलियो में तेजी से जगह बना रही हैं. ये कंपनियां सीधे चमकदार प्रोजेक्ट नहीं दिखातीं, बल्कि उस जरूरी मशीनरी और ढांचे को तैयार करती हैं, जिनके बिना green energy का सपना पूरा नहीं हो सकता.
कॉनकॉर्ड कंट्रोल सिस्टम्स (Concord Control Systems)
Concord Control Systems रेलवे के लिए बिजली से जुड़ी मशीनें बनाती है. हाल में कंपनी ने ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र में कदम रखा है. जनवरी 2026 में इसकी सहायक कंपनी को NTPC से 47 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला. मकसद दुनिया का सबसे ताकतवर हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाला मालगाड़ी इंजन बनाना है. सौर ऊर्जा से बना हाइड्रोजन ईंधन इस इंजन में इस्तेमाल होगा. इससे साफ होता है कि कंपनी भारत की Green plan में अहम भूमिका निभा सकती है.
कॉनकॉर्ड BSE के SME प्लेटफॉर्म पर लिस्टेड है. ऐसे शेयरों में खरीद-फरोख्त कम होती है और गिरावट पर फंसने का डर रहता है. इसके बावजूद कंपनी की बिक्री और मुनाफा पिछले कुछ सालों में तेज बढ़ा है. शेयर की कीमत भी लिस्टिंग के बाद कई गुना हो चुकी है, हालांकि हाल में थोड़ी गिरावट आई है. High valuation बताता है कि बाजार कंपनी के भविष्य को लेकर उम्मीदें लगाए बैठा है.
मुकुल अग्रवाल और उनकी पत्नी मिलकर इसमें अच्छी हिस्सेदारी रखते हैं. अशिष कचोलिया भी निवेशक हैं. कंपनी ने अक्टूबर 2025 में एक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माता में बहुमत हिस्सेदारी खरीदी, जो Defence और aviation equipment के लिए खास सर्किट बनाती है. इससे भविष्य में नए कारोबार खुल सकते हैं.
Vikran Engineering
दूसरी कंपनी विक्रान इंजीनियरिंग है. दिसंबर 2025 को खत्म हुई तिमाही के लिए एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, आशीष कचोलिया के पास 1.5% और मुकुल अग्रवाल के पास 1.4% हिस्सेदारी है. कंपनी ने महाराष्ट्र में 600 मेगावाट के सोलर प्रोजेक्ट का बड़ा ऑर्डर लिया. अब इसका आधा ऑर्डर बुक Renewable energy से जुड़ा है. कंपनी का मुनाफा और पूंजी पर कमाई उद्योग औसत से बेहतर है, क्योंकि यह मशीनें किराए पर लेकर काम करती है.
हालांकि विक्रान को भुगतान देर से मिलने की समस्या रहती है. सरकारी प्रोजेक्ट में ऐसा आम है. इसी वजह से संचालन से नकदी बाहर जा रही है और कंपनी को आईपीओ से मिले पैसे पर निर्भर रहना पड़ रहा है. इन दोनों कंपनियों में दिग्गज निवेशकों की मौजूदगी संकेत देती है, गारंटी नहीं. कॉनकॉर्ड को हाइड्रोजन इंजन सफल बनाना होगा और विक्रान को नकदी प्रबंधन सुधारना होगा. भारत का नेट जीरो लक्ष्य कई दशक लंबा सफर है.
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