कचरे से सोना बना रही ये कंपनी, जानिए Gravita India का सक्सेस फॉर्मूला; 5 साल में दिया 1911% का रिटर्न

ग्रेविटा इंडिया ग्लास, एल्युमिनियम, प्लास्टिक और रबर की रीसाइक्लिंग करती है. यानी पुराने सामान और कचरे से दोबारा कच्चा माल तैयार करती है. कंपनी का मुख्यालय जयपुर में है और इसके प्लांट भारत के साथ-साथ विदेशों में भी चल रहे हैं. तीन दशक से ज्यादा के अनुभव के साथ ग्रेविटा ने 13 आधुनिक प्लांट बनाए हैं.

Gravita India Image Credit: Gravita India

Gravita India: भारत और दुनिया भर में रीसाइक्लिंग इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रहा है. कंपनियां अब कचरे को दोबारा इस्तेमाल लायक बनाकर उससे कमाई करने की होड़ में हैं. लेकिन इसी भीड़ में कुछ नाम ऐसे हैं जो दूसरों से कहीं आगे निकलते दिख रहे हैं. इन्हीं में से एक है ग्रेविटा इंडिया. यह कंपनी सिर्फ कबाड़ को पिघलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि नई तकनीक, मजबूत नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी के दम पर लगातार अपनी पकड़ मजबूत कर रही है. निवेशकों की नजर भी अब इस पर टिकने लगी है. सवाल यही है कि आखिर ग्रेविटा इंडिया अपने Rivals से बेहतर प्रदर्शन कैसे कर रही है.

क्या करती है ग्रेविटा इंडिया

ग्रेविटा इंडिया ग्लास, एल्युमिनियम, प्लास्टिक और रबर की रीसाइक्लिंग करती है. यानी पुराने सामान और कचरे से दोबारा कच्चा माल तैयार करती है. कंपनी का मुख्यालय जयपुर में है और इसके प्लांट भारत के साथ-साथ विदेशों में भी चल रहे हैं. तीन दशक से ज्यादा के अनुभव के साथ ग्रेविटा ने 13 आधुनिक प्लांट बनाए हैं, जिनकी कुल क्षमता करीब साढ़े तीन लाख टन सालाना है. कंपनी 70 से ज्यादा देशों में कारोबार करती है.

दुनिया भर में फैला नेटवर्क

ग्रेविटा की सबसे बड़ी ताकत इसका वैश्विक नेटवर्क है. कंपनी अलग-अलग देशों में छोटे स्तर से शुरुआत की थी और फिर धीरे-धीरे विस्तार किया. इससे कच्चा माल सस्ते में मिलता है और ढुलाई खर्च भी कम होता है. इसके प्लांट यूरोप, एशिया, अफ्रीका और अमेरिका तक फैले हैं. कई जगह ये बंदरगाहों और फैक्ट्रियों के पास हैं, जिससे लागत घटती है और ग्राहकों तक सामान जल्दी पहुंचता है.

कंपनी के पास कबाड़ इकट्ठा करने का बड़ा नेटवर्क है. इसके 33 खुद के स्क्रैप यार्ड हैं और दुनिया भर में हजारों contact point हैं. इससे हर समय कच्चा माल मिलता रहता है और दाम भी काबू में रहते हैं. यही वजह है कि बाजार में उतार-चढ़ाव होने के बावजूद ग्रेविटा अपनी लागत को संभाल पाती है.

बड़े और भरोसेमंद ग्राहक

ग्रेविटा के ग्राहक भारत और विदेश दोनों जगह फैले हैं. यह बैटरी, ऑटोमोबाइल, केबल, पेंट और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी बड़ी कंपनियों को सप्लाई करती है. अलग-अलग क्षेत्रों के ग्राहक होने से कंपनी किसी एक इंडस्ट्री पर निर्भर नहीं रहती और बिक्री बनी रहती है. ग्रेविटा सिर्फ रीसाइक्लिंग नहीं करती, बल्कि पूरी फैक्ट्री लगाने का काम भी करती है. यानी मशीनें, तकनीक और रखरखाव सब कुछ. कंपनी अब ज्यादा मुनाफा देने वाले खास प्रोडक्ट पर ध्यान दे रही है. इससे उसकी कमाई और मार्जिन दोनों बढ़ रहे हैं.

सरकारी नियमों से मिल रहा फायदा

सरकार के नए पर्यावरण नियमों से संगठित रीसाइक्लिंग कंपनियों को फायदा हो रहा है. अब बड़े ब्रांड्स को अपना कचरा सही तरीके से रीसाइक्लिंग करवाना जरूरी है. ग्रेविटा इस काम में पूरी मदद करती है और इससे उसे नई कमाई का जरिया मिल रहा है. कंपनी धातुओं के दामों में उतार-चढ़ाव से बचने के लिए पहले से डील तय कर लेती है. इससे मुनाफा स्थिर रहता है. आने वाले सालों में ग्रेविटा नए प्लांट लगाने और लिथियम बैटरी जैसे नए सेक्टर में उतरने के लिए बड़ा निवेश करने जा रही है.

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