DA से लेकर नई सैलरी तक, 8वें वेतन आयोग को लेकर बढ़ी उम्मीदें, बजट में क्या दिखेगा आगे की राह का संकेत

देशभर में एक करोड़ से ज्यादा कर्मचारी और पेंशनर यह जानना चाहते हैं कि क्या बजट में उनके लिए कोई बड़ा संकेत मिलेगा. क्या सैलरी और पेंशन बढ़ाने की तैयारी शुरू हो गई है या फिर अभी लंबा इंतजार करना पड़ेगा. इसी को लेकर बाजार से लेकर कर्मचारी संगठनों तक तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं.

8th Pay Commission Image Credit: Money9

8th Pay Commission: केंद्र सरकार का आम बजट आते ही सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजरें टीवी और मोबाइल स्क्रीन पर टिक जाती हैं. वजह साफ है. वेतन, भत्ते और भविष्य की योजनाओं से जुड़ी हर छोटी बात उनकी जिंदगी पर सीधा असर डालती है. इस बार चर्चा इसलिए और तेज है क्योंकि आठवें वेतन आयोग का गठन कुछ महीने पहले ही हो चुका है.

देशभर में एक करोड़ से ज्यादा कर्मचारी और पेंशनर यह जानना चाहते हैं कि क्या बजट में उनके लिए कोई बड़ा संकेत मिलेगा. क्या सैलरी और पेंशन बढ़ाने की तैयारी शुरू हो गई है या फिर अभी लंबा इंतजार करना पड़ेगा. इसी को लेकर बाजार से लेकर कर्मचारी संगठनों तक तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं.

बजट और आठवां वेतन आयोग

सरकार वित्त वर्ष 2026-27 का बजट 1 फरवरी को पेश करने वाली है. आठवें वेतन आयोग का गठन करीब तीन महीने पहले हुआ था. इस आयोग को अपनी रिपोर्ट देने के लिए 18 महीने का समय मिला है. ऐसे में यह तय माना जा रहा है कि नई सैलरी और पेंशन व्यवस्था तुरंत लागू नहीं होगी. यानी वित्त वर्ष 2027 में भी शायद कर्मचारियों को इसका सीधा फायदा न मिले.

करीब 1.1 करोड़ केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर वित्त मंत्री के भाषण को ध्यान से सुनेंगे. सब यह देखना चाहते हैं कि बजट में आठवें वेतन आयोग को लेकर कोई रकम अलग रखी जाती है या नहीं. अगर सरकार पहले से पैसा तय करती है तो माना जाएगा कि सिफारिशें जल्दी लागू हो सकती हैं. ऐसी स्थिति में आयोग भी अपनी बातचीत और रिपोर्ट तैयार करने की रफ्तार बढ़ा सकता है.

सरकारी खजाने पर कितना असर पड़ेगा

जब भी नया वेतन आयोग लागू होता है तो सरकार पर खर्च का बोझ बढ़ जाता है. सातवें वेतन आयोग के समय 2017 में सरकारी खजाने पर करीब 1.02 लाख करोड़ रुपये का असर पड़ा था. तब कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और पेंशन बढ़ाने के लिए 2.57 का गुणांक लगाया गया था. हालांकि उस वक्त असली बढ़ोतरी इतनी ज्यादा नहीं थी क्योंकि महंगाई भत्ता और महंगाई राहत को शून्य से शुरू किया गया था. ये दोनों भत्ते हमेशा बेसिक वेतन के प्रतिशत के हिसाब से दिए जाते हैं और नए वेतन आयोग के साथ इन्हें फिर से गिनना शुरू किया जाता है. बाद में हर छह महीने में इन्हें बढ़ाया जाता है ताकि महंगाई का असर कम हो सके.

इस बार बढ़ोतरी क्यों ज्यादा हो सकती है

आठवें वेतन आयोग के मामले में भले ही गुणांक थोड़ा कम रखा जाए, फिर भी कर्मचारियों को अच्छी बढ़ोतरी मिल सकती है. वजह यह है कि इस समय DA और DR की दर सातवें वेतन आयोग के आखिरी दौर की तुलना में काफी कम है. फिलहाल ये करीब 58 प्रतिशत पर हैं.

इसके अलावा अब कर्मचारियों और रिटायर्ड लोगों की संख्या भी ज्यादा हो चुकी है. इसी कारण सरकारी खर्च भी पहले से बड़ा हो सकता है. ब्रोकरेज फर्म कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज का अनुमान है कि आठवें वेतन आयोग से सरकार पर कुल बोझ 2.4 लाख करोड़ से 3.2 लाख करोड़ रुपये तक जा सकता है.

आगे क्या देखना जरूरी है

फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि बजट में सरकार कोई संकेत देती है या नहीं. अगर खर्च के लिए पहले से रकम तय की जाती है तो उम्मीद बनेगी कि रिपोर्ट जल्दी आएगी और बदलाव समय से पहले लागू हो सकते हैं. लेकिन अभी के संकेत यही हैं कि कर्मचारियों को धैर्य रखना होगा और अंतिम फैसले के लिए आयोग की रिपोर्ट का इंतजार करना पड़ेगा.

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