TATA के होटल स्टॉक से 40% सस्ता, फिर भी 52% मार्जिन; निवेशकों की नजर में आया यह मिडकैप होटल शेयर

वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव और यात्रा से जुड़ी परेशानियों का असर इस उद्योग पर भी पड़ा. विदेशी पर्यटकों की संख्या में कमी देखने को मिली, जिससे होटल कंपनियों की ग्रोथ पर असर पड़ा. हालांकि अब हालात धीरे-धीरे बेहतर होते दिखाई दे रहे हैं. इसी वजह से निवेशकों की नजर एक बार फिर होटल सेक्टर के शेयरों पर जा रही है.

Tata’s IHCL Image Credit: Tata IHCL Website

Tata’s IHCL: होटल और पर्यटन सेक्टर पिछले कुछ महीनों से कई चुनौतियों का सामना कर रहा था. वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव और यात्रा से जुड़ी परेशानियों का असर इस उद्योग पर भी पड़ा. विदेशी पर्यटकों की संख्या में कमी देखने को मिली, जिससे होटल कंपनियों की ग्रोथ पर असर पड़ा. हालांकि अब हालात धीरे-धीरे बेहतर होते दिखाई दे रहे हैं. इसी वजह से निवेशकों की नजर एक बार फिर होटल सेक्टर के शेयरों पर जा रही है. इस सेक्टर में सबसे ज्यादा चर्चा दो कंपनियों की हो रही है. पहली है इंडियन होटल्स कंपनी, जो मशहूर ताज होटल ब्रांड चलाती है. दूसरी है लेमन ट्री होटल्स, जो मिड-मार्केट और अफॉरडेबल होटल सेगमेंट में मजबूत पकड़ रखती है.

दिलचस्प बात यह है कि लेमन ट्री होटल्स का शेयर इंडियन होटल्स की तुलना में करीब 40 प्रतिशत सस्ते वैल्यूएशन पर कारोबार कर रहा है. इसके बावजूद कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन 52 प्रतिशत तक पहुंच गया है. ऐसे में कई निवेशक यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या यह शेयर आने वाले समय में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है.

दोनों कंपनियों का कारोबार तेजी से बढ़ रहा

  • वित्त वर्ष 2026 के अंत तक इंडियन होटल्स के पास 375 होटल और करीब 33,000 कमरे थे.
  • वहीं लेमन ट्री होटल्स के पास 131 होटल और 11,811 कमरे मौजूद थे.
  • दोनों कंपनियां अब तेजी से विस्तार कर रही हैं.
  • इंडियन होटल्स अगले साल 60 से ज्यादा नए होटल जोड़ने की योजना पर काम कर रही है.
  • वहीं लेमन ट्री होटल्स 2,000 से ज्यादा नए कमरे अपने पोर्टफोलियो में शामिल करना चाहती है.

मार्च तिमाही में कैसा रहा प्रदर्शन

  • मार्च 2026 तिमाही में दोनों कंपनियों के होटल लगभग 78 प्रतिशत तक भरे रहे.
  • यानी ऑक्यूपेंसी के मामले में दोनों का प्रदर्शन लगभग समान रहा.
  • हालांकि इंडियन होटल्स की प्रति कमरे से कमाई यानी RevPAR करीब 13,250 रुपये रही.
  • वहीं लेमन ट्री का RevPAR 5,855 रुपये रहा. राजस्व और मुनाफे की ग्रोथ में भी इंडियन होटल्स आगे रही.
  • लेकिन लेमन ट्री होटल्स की सबसे बड़ी ताकत उसका 52 प्रतिशत ऑपरेटिंग मार्जिन रहा.
  • यह होटल उद्योग में काफी मजबूत माना जाता है.
  • इसका मतलब है कि कंपनी कम लागत में बेहतर कमाई कर रही है.

तीन साल में दोनों की ग्रोथ लगभग समान

  • वित्त वर्ष 2023 से 2026 के बीच दोनों कंपनियों ने अच्छी ग्रोथ दिखाई है.
  • इंडियन होटल्स की इनकम और मुनाफे में लगातार बढ़ोतरी हुई है.
  • वहीं लेमन ट्री होटल्स ने भी लगभग समान गति से कारोबार बढ़ाया है.
  • हालांकि आकार के मामले में इंडियन होटल्स काफी बड़ी कंपनी है.
  • वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का रेवेन्यू करीब 9,689 करोड़ रुपये रहा.
  • वहीं लेमन ट्री होटल्स का रेवेन्यू 1,444 करोड़ रुपये से ज्यादा रहा.

एसेट लाइट मॉडल पर फोकस

दोनों कंपनियां अब एसेट लाइट मॉडल पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं. इसका मतलब है कि वे खुद होटल बनाने के बजाय दूसरे मालिकों के होटल का संचालन करेंगी और इसके बदले फीस कमाएंगी.

इस मॉडल से कम निवेश में तेजी से विस्तार करना आसान हो जाता है. इससे भविष्य में मुनाफा बढ़ने की उम्मीद भी रहती है.

निवेशकों के लिए क्यों खास है लेमन ट्री?

लेमन ट्री होटल्स का शेयर फिलहाल इंडियन होटल्स के मुकाबले करीब 40 प्रतिशत कम वैल्यूएशन पर कारोबार कर रहा है. वहीं कंपनी का Return on Equity यानी RoE भी 19.4 प्रतिशत है, जो इंडियन होटल्स के 14.2 प्रतिशत से ज्यादा है. अगर घरेलू पर्यटन और होटल उद्योग की ग्रोथ जारी रहती है, तो लेमन ट्री होटल्स निवेशकों की वॉचलिस्ट में शामिल रहने वाला शेयर हो सकता है. हालांकि भारत-पाकिस्तान तनाव या वेस्ट एशिया में फिर से बढ़ने वाले संघर्ष का असर पूरे होटल सेक्टर पर पड़ सकता है. इसलिए निवेशकों को कंपनी के प्रदर्शन और भविष्य की योजनाओं पर नजर बनाए रखनी चाहिए.

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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.