100GW न्यूक्लियर प्लान का बड़ा ट्रिगर! ये 2 शेयर बन सकते हैं असली गेमचेंजर! सरकार के बड़े प्लान से बदलेगा खेल

सरकार ने साल 2047 तक न्यूक्लियर क्षमता को 100 गीगावाट तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है. इससे यह सेक्टर निवेश के लिए भी आकर्षक बनता दिख रहा है. खास बात यह है कि इस मौके का फायदा सिर्फ बिजली बनाने वाली कंपनियों को नहीं, बल्कि उन कंपनियों को भी मिलेगा जो न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स के लिए जरूरी पार्ट्स और मशीनें बनाती हैं. इसी कड़ी में दो शेयर फोकस में आ रहे हैं.

न्यूक्लियर एनर्जी शेयर Image Credit: canva

Nuclear power Stocks: भारत में न्यूक्लियर पावर सेक्टर अब एक बड़े बदलाव के दौर में प्रवेश कर रहा है. अब तक यह सेक्टर धीरे-धीरे बढ़ रहा था और ज्यादातर सरकारी कंट्रोल में था. लेकिन अब सरकार ने साल 2047 तक न्यूक्लियर क्षमता को 100 गीगावाट तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है. इससे यह सेक्टर निवेश के लिए भी आकर्षक बनता दिख रहा है.

खास बात यह है कि इस मौके का फायदा सिर्फ बिजली बनाने वाली कंपनियों को नहीं, बल्कि उन कंपनियों को भी मिलेगा जो न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स के लिए जरूरी पार्ट्स और मशीनें बनाती हैं. इसी कड़ी में दो शेयर फोकस में आ रहे हैं. ये कंपनियां न्यूक्लियर सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बन सकती हैं और आने वाले समय में इनके बिजनेस में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है.

भारत का न्यूक्लियर प्लान क्या है

भारत की न्यूक्लियर क्षमता अभी करीब 8.78 गीगावाट है, जो कुल बिजली का छोटा हिस्सा है. लेकिन सरकार साल 2032 तक इसे 22 गीगावाट और साल 2047 तक 100 गीगावाट तक ले जाना चाहती है. इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में कई नए रिएक्टर बनाए जाएंगे.

MTAR Technologies

MTAR Technologies न्यूक्लियर सेक्टर में हाई-टेक पार्ट्स बनाती है. इस सेक्टर में काम करने के लिए कंपनियों को लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है और एक बार मंजूरी मिलने के बाद उन्हें आसानी से बदला नहीं जाता. कंपनी के नतीजों में भी इसका असर दिख रहा है. FY26 की तीसरी तिमाही में कंपनी की इनकम और मुनाफा तेजी से बढ़ा है. इसका कारण यह है कि पहले से मिले ऑर्डर अब धीरे-धीरे काम में बदल रहे हैं.

Bharat Forge

Bharat Forge पहले से ऑटो और डिफेंस सेक्टर में मजबूत है. अब यह अपनी मौजूदा क्षमता का इस्तेमाल करके न्यूक्लियर सेक्टर में भी प्रवेश कर सकती है. कंपनी के पास भारी इंजीनियरिंग और मेटल तकनीक का अनुभव है, जो न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स में काम आता है. हालांकि अभी इसके नतीजों में न्यूक्लियर का असर साफ नहीं दिखता.

निवेशकों के लिए क्या मतलब है

न्यूक्लियर सेक्टर में सबसे पहले फायदा उन कंपनियों को होता है जो मशीन और पार्ट्स बनाती हैं. यानी सप्लाई चेन की कंपनियां पहले कमाई दिखाती हैं. MTAR में यह असर पहले से दिख रहा है, जबकि Bharat Forge में यह मौका भविष्य में दिख सकता है.

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