₹2,500 करोड़ का मेगा-साइबर स्कैम! Yes Bank और HDFC के अधिकारी गिरफ्तार, क्या सेफ है आपका पैसा?
राजकोट में ₹2,500 करोड़ के साइबर फ्रॉड केस में बड़ा खुलासा हुआ है. Yes Bank और HDFC Bank के अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है. 85 बैंक खातों के जरिए करोड़ों का ट्रांजेक्शन हुआ और 535 शिकायतें दर्ज हैं, जिससे बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा पर सवाल उठे हैं.
बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा में सेंध लगाकर करोड़ों का चूना लगाने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है. गुजरात के राजकोट में सामने आए ₹2,500 करोड़ के इस मेगा साइबर फ्रॉड में अब तक की सबसे चौंकाने वाली कार्रवाई हुई है. पुलिस ने दिग्गज प्राइवेट बैंकों Yes Bank और HDFC Bank के अधिकारियों को गिरफ्तार किया है. इन पर आरोप है कि इन्होंने अपने पद का फायदा उठाकर जालसाजों को रास्ता दिया और करोड़ों की हेराफेरी में मदद की. इस हाई-प्रोफाइल केस में अब तक कुल 20 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं.
कैसे बैंक के ‘रक्षक’ ही बन गए ‘भक्षक’?
राजकोट (ग्रामीण) के पुलिस अधीक्षक विजय गुर्जर ने सोमवार को बताया कि गिरफ्तार किए गए बैंक अधिकारियों की पहचान मौलिक कमानी (यस बैंक) और अनुराग बलधा (एचडीएफसी बैंक) के रूप में हुई है. जांच में सामने आया है कि ये अधिकारी सिर्फ मूकदर्शक नहीं थे, बल्कि गिरोह के सक्रिय सदस्य की तरह काम कर रहे थे.
- अलर्ट को किया दरकिनार: यस बैंक के पर्सनल मैनेजर मौलिक कमानी पर आरोप है कि उसने संदिग्ध खातों को न केवल खुलवाया, बल्कि जब हाई-वैल्यू ट्रांजेक्शन पर बैंक के सिस्टम ने ‘रेड फ्लैग’ या अलर्ट जारी किया, तो फर्जी दस्तावेज लगाकर उन खातों को चालू रखा.
- हवाला और फर्जी दस्तावेज: कल्पेश डांगरिया ने फर्जी पहचान पत्र और APMC (कृषि उपज मंडी समिति) से जुड़े जाली कागजात तैयार करवाए ताकि बड़े लेन-देन को व्यापारिक दिखाया जा सके और वे जांच के दायरे में न आएं. वहीं, अनुराग बलधा ने बिना सही जांच-पड़ताल के नए खाते खोलने में गिरोह की मदद की.
85 खाते और 535 शिकायतें
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस की जांच में अब तक 85 संदिग्ध बैंक खातों का पता चला है, जिनके जरिए ₹2,500 करोड़ का ट्रांजेक्शन किया गया. शुरुआती जांच में यह आंकड़ा ₹1,500 करोड़ आंका गया था, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, घोटाले की परतें खुलती गईं. साइबर अपराध पोर्टल पर इस गिरोह के खिलाफ अब तक 535 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं.
हवाला कनेक्शन की जांच जारी
पुलिस के अनुसार, इस पूरे खेल में निकाला गया कैश ‘हवाला’ के जरिए ठिकाने लगाया गया है. पुलिस को गिरफ्तार अधिकारियों के मोबाइल फोन से कई डिजिटल सबूत मिले हैं, जो सीधे तौर पर इस घोटाले में उनकी संलिप्तता की पुष्टि करते हैं. फिलहाल ये तीनों पुलिस कस्टडी में हैं, जबकि गिरोह के दूसरे 17 सदस्य न्यायिक हिरासत (जेल) में भेजे जा चुके हैं.
| नाम | पद और बैंक | मुख्य आरोप |
| मौलिक कमानी | पर्सनल मैनेजर, यस बैंक (पडाधरी) | संदिग्ध खातों का प्रबंधन, बैंकिंग अलर्ट बाईपास करना और हवाला लेनदेन. |
| अनुरॉग बलधा | पर्सनल बैंकर, HDFC बैंक (राजकोट) | बिना उचित सत्यापन के गिरोह के लिए नए खाते खोलना और प्रमाणित करना. |
पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या इस रैकेट के तार अन्य राज्यों या अंतरराष्ट्रीय गिरोहों से भी जुड़े हैं.
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क्या सेफ है आपका पैसा?
जब बैंकों के अंदर बैठे जिम्मेदार अधिकारी ही सिस्टम में सेंध लगाने लगें, तो आम जमाकर्ता की चिंता बढ़ना लाजमी है. इस घोटाले ने बैंकिंग सेक्टर के ‘इंटरनल कंट्रोल’ और ‘केवाईसी (KYC)’ सुरक्षा चक्र की पोल खोल दी है. आम तौर पर बैंक छोटे ट्रांजेक्शन पर भी ग्राहकों से सवाल पूछते हैं, लेकिन यहां अधिकारियों ने खुद फर्जी दस्तावेजों को प्रमाणित कर सिस्टम को अंधा बनाए रखा. विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक बैंकों के भीतर ‘इनसाइडर थ्रेट’ (अंदरूनी खतरा) को रोकने के लिए सख्त ऑडिट नहीं होगा, तब तक ग्राहकों का भरोसा और मेहनत की कमाई, दोनों ही जोखिम में रहेंगे, यह मामला चेतावनी है कि अब सिर्फ साइबर ठगों से ही नहीं, बल्कि सिस्टम के भीतर छिपे सफेदपोश मददगारों से भी सावधान रहने की जरूरत है.
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