डिविडेंड में पिछड़ा भारत लेकिन रिटर्न में आगे, निफ्टी 500 का अनोखा फॉर्मूला, देखें बाजार को चौंकाने वाला रिकॉर्ड

भारत का शेयर बाजार पिछले 20 साल में डिविडेंड के मामले में दुनिया में सबसे पीछे रहा है. निफ्टी 500 का औसत डिविडेंड यील्ड सिर्फ 1.3 रहा. इसके बावजूद भारत ने मजबूत इक्विटी रिटर्न दिए और टोटल रिटर्न के आधार पर टॉप 3 ग्लोबल मार्केट में जगह बनाई है.

20 साल में निफ्टी 500 का औसत डिविडेंड यील्ड सिर्फ 1.3 रहा है. Image Credit: CANVA

Nifty 500 Dividend Yield: पिछले 20 सालों में भारतीय शेयर बाजार ने निवेशकों को जबरदस्त रिटर्न दिया है, लेकिन डिविडेंड के मामले में भारत दुनिया के बड़े बाजारों से काफी पीछे रहा है. निफ्टी 500 कंपनियों का औसत डिविडेंड यील्ड सिर्फ 1.3 फीसदी रहा. इसके बावजूद भारत का इक्विटी बाजार लंबी अवधि में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले बाजारों में शामिल है. यानी निवेशकों को यहां कम डिविडेंड लेकिन मजबूत कैपिटल ग्रोथ मिली है.

दुनिया में सबसे कम डिविडेंड यील्ड

ब्लूमबर्ग डेटा बताता है कि निफ्टी 500 का बीस साल का औसत डिविडेंड यील्ड सिर्फ 1.3 फीसदी रहा. यह अमेरिका ब्रिटेन जापान और चीन जैसे देशों से काफी कम है. इंडोनेशिया और साउथ कोरिया जैसे उभरते बाजार भी भारत से ज्यादा डिविडेंड देते हैं. यानी डिविडेंड के मामले में भारत ग्लोबल लिस्ट में सबसे नीचे है.

फिर भी रिटर्न में टॉप 3 में भारत

कम डिविडेंड के बावजूद भारत ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है. निफ्टी 500 का प्राइस रिटर्न इंडेक्स 20 साल में करीब 12 फीसदी सालाना रहा. जब डिविडेंड को दोबारा निवेश किया गया तो टोटल रिटर्न इंडेक्स लगभग 13.6 तक पहुंच गया. इस प्रदर्शन के साथ भारत दुनिया के टॉप तीन इक्विटी बाजारों में शामिल हो गया.

डिविडेंड का योगदान क्यों कम है

भारत में कुल इक्विटी रिटर्न में डिविडेंड का योगदान करीब 25 ही है. जबकि कई दूसरे देशों में यह हिस्सा 50 से भी ज्यादा है. इसकी वजह यह है कि भारत में प्राइस ग्रोथ ज्यादा मजबूत रही है. इसलिए रिटर्न का बड़ा हिस्सा शेयर की कीमत बढ़ने से आया न कि डिविडेंड से.

वैल्यूएशन बड़ी वजह

भारत की कंपनियां आमतौर पर हाई वैल्यूएशन पर ट्रेड करती हैं. मजबूत ग्रोथ उम्मीदें और आर्थिक स्थिरता इसकी वजह हैं. साथ ही कई कंपनियों में प्रमोटर परिवारों का कंट्रोल है. ऐसे में वे नियमित डिविडेंड देने के बजाय कंपनी की बैलेंस शीट मजबूत रखने पर ज्यादा जोर देते हैं. पश्चिमी देशों की तरह यहां डिविडेंड का दबाव कम रहता है.

सेक्टर के हिसाब से बड़ा अंतर

हर सेक्टर का डिविडेंड पैटर्न अलग है. माइनिंग मेटल और ऑयल गैस सेक्टर की सरकारी कंपनियां 4 से 6 फीसदी तक डिविडेंड देती हैं. एनटीपीसी और गेल जैसी यूटिलिटी कंपनियां भी बेहतर डिविडेंड देती हैं. दूसरी तरफ प्राइवेट बैंकिंग कैपिटल गुड्स कंज्यूमर और फार्मा जैसे सेक्टर में डिविडेंड काफी कम है.

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निवेशकों की सोच भी कारण

भारतीय निवेशक ज्यादातर इनकम से ज्यादा रिटर्न पर ध्यान देते हैं. कैपिटल गेन टैक्स और मजबूत प्राइस ग्रोथ ने इस सोच को बढ़ावा दिया है. एसआईपी और म्यूचुअल फंड निवेश के बढ़ने से भी ग्रोथ फोकस मजबूत हुआ है. इसी कारण कंपनियों पर ज्यादा डिविडेंड देने का दबाव नहीं बन पाया है.

डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.