NSE पर शुरू होगा 10 ग्राम का नया गोल्ड फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट, 16 मार्च से निवेशकों को मिलेगा ट्रेडिंग का मौका
सोने के कारोबार से जुड़े निवेशकों के लिए शेयर बाजार से एक अहम फैसला आया है. एक्सचेंज स्तर पर ऐसा कदम उठाया जा रहा है, जिससे छोटे निवेशकों की भागीदारी बढ़ सकती है और ट्रेडिंग ज्यादा सुलभ बन सकती है. यह बदलाव गोल्ड ट्रेडिंग के तरीके और पहुंच दोनों पर असर डाल सकता है.
10 Gram Gold Futures Contract: सोने में निवेश करने वालों के लिए नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) एक बड़ा और अहम बदलाव लेकर आ रहा है. अब तक जहां गोल्ड फ्यूचर्स बड़े निवेशकों और ट्रेडर्स तक सीमित माने जाते थे, वहीं 10 ग्राम का नया गोल्ड फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट इस बाजार को आम निवेशकों के लिए भी ज्यादा आसान और सुलभ बना सकता है. सेबी की मंजूरी के बाद NSE ने घोषणा की है कि 16 मार्च से कमोडिटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में Gold 10 grams futures कॉन्ट्रैक्ट शुरू किया जाएगा.
क्या है Gold 10 grams futures कॉन्ट्रैक्ट
NSE का यह नया कॉन्ट्रैक्ट हर महीने की सीरीज में उपलब्ध होगा. इसका ट्रेडिंग यूनिट 10 ग्राम होगा और इसका ट्रेडिंग सिम्बल GOLD10G रहेगा. कॉन्ट्रैक्ट का नामकरण फॉर्मेट GOLD10GYYMMM होगा. हर महीने के आखिरी कैलेंडर दिन इस कॉन्ट्रैक्ट की एक्सपायरी होगी. अगर एक्सपायरी के दिन छुट्टी पड़ती है, तो उससे पहले वाला कार्यदिवस एक्सपायरी माना जाएगा.
ट्रेडिंग टाइम और ऑर्डर साइज
Gold 10 grams futures में ट्रेडिंग सोमवार से शुक्रवार सुबह 9 बजे से रात 11:30 बजे तक होगी. अमेरिकी डे-लाइट सेविंग पीरियड के दौरान ट्रेडिंग का समय बढ़कर रात 11:55 बजे तक हो सकता है. इस कॉन्ट्रैक्ट में टिक साइज 1 रुपये प्रति 10 ग्राम रखा गया है. एक ऑर्डर में अधिकतम 10 किलो तक सोना खरीदा या बेचा जा सकेगा.
प्राइस कोटेशन और सेटलमेंट की व्यवस्था
इस कॉन्ट्रैक्ट का प्राइस कोट एक्स-अहमदाबाद होगा. कीमत में इंपोर्ट ड्यूटी और कस्टम ड्यूटी शामिल होंगी, लेकिन GST और उससे जुड़े अन्य चार्ज शामिल नहीं होंगे. डिलीवरी पूरी तरह अनिवार्य होगी. डिलीवरी यूनिट 10 ग्राम 999 प्योरिटी वाला सोना होगा, जो LBMA या NSE द्वारा अप्रूव्ड सप्लायर से आएगा और उसके साथ क्वालिटी सर्टिफिकेट भी होगा. डिलीवरी सेंटर अहमदाबाद में होगा.
प्राइस लिमिट और रिस्क मैनेजमेंट
गोल्ड 10 ग्राम फ्यूचर्स में डेली प्राइस लिमिट 6 प्रतिशत तय की गई है. अगर यह सीमा टूटती है, तो 15 मिनट के कूलिंग-ऑफ पीरियड के बाद इसे बढ़ाकर 9 प्रतिशत तक किया जा सकता है. अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ज्यादा उतार-चढ़ाव होने पर NSE इसे आगे भी बढ़ा सकता है. मार्जिन वोलैटिलिटी या SPAN के आधार पर तय होगा, जिसमें 1 प्रतिशत का एक्सट्रीम लॉस मार्जिन भी शामिल रहेगा.
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पोजिशन लिमिट और डिलीवरी शेड्यूल
सभी गोल्ड कॉन्ट्रैक्ट मिलाकर किसी सदस्य के लिए अधिकतम पोजिशन लिमिट 50 मीट्रिक टन या मार्केट-वाइड ओपन पोजिशन का 20 प्रतिशत होगी. व्यक्तिगत निवेशकों के लिए यह सीमा 5 मीट्रिक टन या 5 प्रतिशत तय की गई है. डिलीवरी पे-इन E+1 आधार पर होगी और अंतिम सेटलमेंट अहमदाबाद के स्पॉट गोल्ड प्राइस के आधार पर किया जाएगा.
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