ONGC का मेगा दांव! दो जपानी कंपनियों में खरीदेगी 50-50 फीसदी हिस्सेदारी, मंगलवार को शेयरों पर रखें पैनी नजर

सरकारी एनर्जी कंपनी ने अपने कारोबार को नए सिरे से मजबूत करने की दिशा में बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है. इस फैसले से भविष्य की सप्लाई सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स क्षमता और पेट्रोकेमिकल वैल्यू चेन पर असर पड़ सकता है, जिस पर निवेशकों की नजर टिकी हुई है.

ओएनजीसी Image Credit: Budrul Chukrut/SOPA Images/LightRocket via Getty Images

ONGC joint venture: शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच सरकारी तेल कंपनी Oil and Natural Gas Corporation यानी ONGC ने एक ऐसा रणनीतिक फैसला लिया है, जो शेयर बाजार के हवाले से भई बेहद अहम है. कंपनी अब सिर्फ तेल और गैस के उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि एनर्जी लॉजिस्टिक्स और स्पेशलाइज्ड शिपिंग जैसे नए क्षेत्रों में भी कदम रख रही है. इसी दिशा में ONGC ने जापान की शिपिंग कंपनी Mitsui OSK Lines के साथ बड़ी साझेदारी की है, जिसका असर आने वाले दिनों में स्टॉक पर देखने को मिल सकता है.

एथेन शिपिंग में ONGC की एंट्री

ONGC ने दो जॉइंट वेंचर कंपनियों- Bharat Ethane One IFSC Pvt Ltd और Bharat Ethane Two IFSC Pvt Ltd, में 50-50 फीसदी हिस्सेदारी लेने का फैसला किया है. ये दोनों कंपनियां GIFT सिटी, गांधीनगर में रजिस्टर्ड हैं. बाकी 50 फीसदी हिस्सेदारी Mitsui OSK Lines के पास होगी. यह साझेदारी ONGC को पहली बार स्पेशलाइज्ड एथेन शिपिंग के कारोबार में ले जा रही है.

इन दोनों जॉइंट वेंचर कंपनियों के पास एक-एक Very Large Ethane Carrier यानी VLEC होगा. इन जहाजों का संचालन Mitsui करेगी, लेकिन ये भारतीय झंडे के तहत चलेंगे. इन जहाजों का काम अमेरिका से एथेन लाकर ONGC की पेट्रोकेमिकल यूनिट ONGC Petro additions Ltd (OPaL) को सप्लाई करना होगा. OPaL का दहेज (गुजरात) स्थित प्लांट इस एथेन का इस्तेमाल करेगा.

निवेश और प्लानिंग की पूरी तस्वीर

ONGC हर जॉइंट वेंचर कंपनी में 2 लाख इक्विटी शेयर खरीदेगी, जिनकी फेस वैल्यू 100 रुपये प्रति शेयर होगी. दोनों VLEC जहाजों को कोरिया के शिपयार्ड में बनाया जाएगा, जिनकी कुल अनुमानित लागत करीब 370 मिलियन डॉलर बताई जा रही है. एथेन का आयात साल 2028 के मध्य से शुरू होने की संभावना है.

दरअसल, भारत और कतर के बीच LNG सप्लाई का मौजूदा करार 2028 में खत्म हो रहा है. नए करार के तहत कतर से मिलने वाली गैस ‘लीन गैस’ होगी, जिसमें एथेन और प्रोपेन नहीं होंगे. जबकि OPaL के बड़े पेट्रोकेमिकल प्लांट को एथेन की जरूरत है. इसी कमी को पूरा करने के लिए ONGC अब अमेरिका से एथेन आयात करने की योजना बना रही है.

OPaL के लिए क्यों अहम है एथेन

OPaL के पास साउथ ईस्ट एशिया का सबसे बड़ा स्टैंडअलोन ड्यूल फीड क्रैकर है, जो नैफ्था के साथ-साथ एथेन और प्रोपेन जैसे फीडस्टॉक पर चलता है. कंपनी 2028 से हर साल करीब 8 लाख टन एथेन की सप्लाई सुनिश्चित करना चाहती है, ताकि उत्पादन पर कोई असर न पड़े.

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शेयर बाजार का नजरिया

सोमवार को ONGC के शेयर में करीब 1.40 फीसदी की गिरावट आई और भाव 238 रुपये पर बंद हुआ. हालांकि बीते पांच वर्षों में यह स्टॉक करीब 146 फीसदी का मजबूत रिटर्न दे चुका है. ऐसे में यह नई साझेदारी ONGC के बिजनेस मॉडल को और मजबूत बना सकती है. मंगलवार को बाजार खुलने पर इस खबर का असर शेयर की चाल पर देखने को मिल सकता है. निवेशकों के लिए यह एक ऐसा डेवलपमेंट है, जिस पर नजर बनाए रखना फायदे का सौदा हो सकता है.

डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.