वेनेजुएला संकट से फिर बढ़ा भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल से लेकर सोना और शेयर बाजार पर असर की आशंका
नए साल की शुरुआत में वैश्विक हालात अचानक बदलते दिख रहे हैं. राजनीति और अर्थव्यवस्था के बीच बढ़ती खींचतान ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. कच्चे तेल से लेकर कीमती धातुओं और शेयर बाजार तक, कई बड़े एसेट्स पर असर की आशंका गहराती नजर आ रही है.
US Venezuela conflict impact: साल 2026 की शुरुआत होते ही वैश्विक राजनीति में फिर से उथल-पुथल तेज हो गई है. अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर जमीनी सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति Nicolas Maduro की गिरफ्तारी की खबर ने दुनिया भर के बाजारों को चौकन्ना कर दिया है. यह घटनाक्रम सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर कच्चे तेल, सोना-चांदी, डॉलर और शेयर बाजार जैसे बड़े एसेट क्लास पर पड़ सकता है. निवेशक अब यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि यह टकराव आगे कितनी अनिश्चितता लेकर आएगा.
कच्चा तेल सप्लाई और राजनीति का असर
पिछले महीने ही कच्चे तेल की कीमतें चार साल के निचले स्तर तक फिसल गई थीं. इसके बाद अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के वेनेजुएला को लेकर सख्त बयानों और चीन-ताइवान जैसे अन्य क्षेत्रों में बढ़ते तनाव के कारण कीमतों में कुछ सुधार दिखा. शुक्रवार के बंद भाव पर ब्रेंट क्रूड 60 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर था, हालांकि लगातार तीन दिनों से इसमें गिरावट दर्ज की गई है. माना जा रहा है कि सोमवार को बाजार खुलते ही इसमें तेज प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है.
वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित कच्चे तेल का भंडार है, लेकिन लंबे समय से लगे प्रतिबंधों के कारण उसकी सप्लाई सीमित रही है. अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि वह देश की टूटी हुई ऊर्जा व्यवस्था को सुधारने में भूमिका निभाएगा, लेकिन इसके बावजूद वैश्विक एजेंसियां सप्लाई को लेकर सतर्क हैं. International Energy Agency पहले ही 2026 में सप्लाई सरप्लस की चेतावनी दे चुका है, भले ही OPEC+ उत्पादन घटाने का फैसला करे.
सोना-चांदी, सुरक्षित निवेश की ओर झुकाव
जब भी भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, निवेशक जोखिम भरे एसेट से निकलकर सुरक्षित विकल्पों की ओर जाते हैं. सोना इसी वजह से फिर चर्चा में है. 2025 में करीब 70 फीसदी की बढ़त के साथ यह 1979 के बाद का सबसे अच्छा साल रहा था. अब अमेरिका की कार्रवाई के बाद सोने की कीमतों पर फिर नजर रहेगी.
रिपोर्ट्स के मुताबिक वेनेजुएला के पास दक्षिण अमेरिका में सबसे बड़ा सोने का भंडार है, जिसकी मात्रा करीब 161 मीट्रिक टन बताई जाती है. मौजूदा कीमतों पर इसकी वैल्यू अरबों डॉलर में बैठती है. चांदी को भले ही पारंपरिक सुरक्षित निवेश न माना जाए, लेकिन 2025 में इसमें करीब 160 फीसदी की तेज उछाल देखने को मिली थी. औद्योगिक मांग और सट्टेबाजी के चलते इसमें भी तेज हलचल संभव है.
डॉलर और रुपये पर नजर
अमेरिकी डॉलर को आमतौर पर सुरक्षित मुद्रा माना जाता है, लेकिन 2025 इसके लिए 2017 के बाद का सबसे कमजोर साल रहा. ऐसे में सोमवार को डॉलर की चाल पर खास नजर रहेगी. डॉलर की मजबूती आमतौर पर भारतीय रुपये और धातुओं के लिए नकारात्मक मानी जाती है. हालांकि कई देश अब अमेरिकी नीतियों के चलते डॉलर पर निर्भरता कम करने की दिशा में बढ़ रहे हैं.
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शेयर बाजार पर पर असर की आशंका
वॉल स्ट्रीट पर भी इस घटनाक्रम का असर दिख सकता है, क्योंकि इस बार अमेरिका सीधे किसी टकराव में शामिल है. 2026 में अमेरिकी बाजार लगातार तीन साल के मजबूत रिटर्न के बाद दाखिल हुए हैं. अगर वहां दबाव बनता है, तो उसका असर एशियाई और अन्य वैश्विक शेयर बाजारों पर भी पड़ सकता है. ऐसे में आने वाले दिन निवेशकों के लिए काफी अहम रहने वाले हैं.
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