Dixon, Suzlon समेत ये 7 मिडकैप शेयर 45% से ज्यादा लुढ़के, FIIs ने खरीदी है 22% तक हिस्सेदारी, म्यूचुअल फंड्स का भी तगड़ा दांव

बाजार में जारी करेक्शन के बीच कई मिडकैप स्टॉक्स में भारी गिरावट देखने को मिल रही है. Godfrey Phillips, Dixon Technologies, KPIT Technologies और Suzlon Energy जैसे शेयरों में तेज गिरावट ने निवेशकों का ध्यान खींचा है.

मिडकैप शेयरों में गिरावट Image Credit: AI Generated

भारतीय शेयर बाजार में इन दिनों मिडकैप शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव दिखाई दे रहा है. वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को कमजोर कर दिया है. अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते क्रूड ऑयल की कीमतें लगभग 19 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं. इसका असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिख रहा है. निफ्टी और निफ्टी मिडकैप 150 दोनों ही अपने 52 हफ्ते के उच्च स्तर से करीब 6 फीसदी तक फिसल चुके हैं, जबकि कई मिडकैप शेयरों में इससे भी ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है.

बाजार में क्यों बढ़ा दबाव

वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ने के कारण निवेशक फिलहाल सतर्क नजर आ रहे हैं. जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊपर जाती हैं, तो इसका सीधा असर शेयर बाजार के मूड पर पड़ता है. इसी वजह से मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिल रही है.

निफ्टी मिडकैप 150 इंडेक्स में करीब 11 शेयर ऐसे हैं जो अपने 52 हफ्ते के उच्च स्तर से 40 से 50 फीसदी तक टूट चुके हैं. यह गिरावट बताती है कि बाजार के अंदरूनी हिस्से में करेक्शन काफी गहरा है.

Godfrey Phillips India में बड़ी गिरावट

Godfrey Phillips India का शेयर अपने 52 हफ्ते के उच्च स्तर 3,947 रुपये से गिरकर करीब 2,043 रुपये पर आ गया है. यानी इस शेयर में करीब 48 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है.

हालांकि दिसंबर तिमाही में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने इसमें अपनी हिस्सेदारी 7.94 फीसदी से बढ़ाकर 8.15 फीसदी कर दी. वहीं म्यूचुअल फंड्स की हिस्सेदारी भी 3.62 फीसदी से बढ़कर 3.78 फीसदी हो गई.

Hexaware Technologies भी दबाव में

आईटी सेक्टर की कंपनी Hexaware Technologies के शेयर में भी करीब 48 फीसदी की गिरावट आई है. यह शेयर अपने 900 रुपये के 52 हफ्ते के उच्च स्तर से गिरकर करीब 467 रुपये तक आ गया है.

दिसंबर तिमाही में FIIs की हिस्सेदारी 8.31 फीसदी से घटकर 8.15 फीसदी हो गई, जबकि म्यूचुअल फंड्स की हिस्सेदारी 10.44 फीसदी से बढ़कर 10.81 फीसदी हो गई.

KPIT Technologies में तेज करेक्शन

KPIT Technologies का शेयर भी भारी दबाव में है. यह अपने 1,435 रुपये के 52 हफ्ते के उच्च स्तर से गिरकर करीब 754 रुपये पर आ गया है. यानी इसमें लगभग 47 फीसदी की गिरावट आई है.

दिसंबर तिमाही में FIIs ने अपनी हिस्सेदारी 14.31 फीसदी से घटाकर 13.57 फीसदी कर दी, जबकि म्यूचुअल फंड्स की हिस्सेदारी 13.16 फीसदी से बढ़कर 13.26 फीसदी हो गई.

Tata Investment Corporation में भी गिरावट

Tata Investment Corporation के शेयर में भी करीब 46 फीसदी की गिरावट आई है. यह शेयर अपने 1,185 रुपये के उच्च स्तर से गिरकर करीब 641 रुपये पर आ गया है.

दिसंबर तिमाही में FIIs की हिस्सेदारी 2.69 फीसदी से घटकर 2.54 फीसदी हो गई, जबकि म्यूचुअल फंड्स की हिस्सेदारी 0.11 फीसदी से बढ़कर 0.12 फीसदी हो गई.

Syngene International में कमजोरी

Syngene International का शेयर भी अपने 760 रुपये के 52 हफ्ते के उच्च स्तर से गिरकर करीब 412 रुपये पर आ गया है. इसमें करीब 46 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है.

दिसंबर तिमाही में FIIs की हिस्सेदारी 16.31 फीसदी से घटकर 14.96 फीसदी हो गई, जबकि म्यूचुअल फंड्स की हिस्सेदारी 21.22 फीसदी से बढ़कर 22.71 फीसदी हो गई.

Dixon Technologies में भी बड़ी गिरावट

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कंपनी Dixon Technologies (India) के शेयर में भी तेज गिरावट देखने को मिली है. यह शेयर अपने 18,471 रुपये के उच्च स्तर से गिरकर करीब 10,151 रुपये पर आ गया है. यानी करीब 45 फीसदी की गिरावट आई है.

दिसंबर तिमाही में FIIs की हिस्सेदारी 20.69 फीसदी से घटकर 18.68 फीसदी हो गई, जबकि म्यूचुअल फंड्स की हिस्सेदारी भी 22.66 फीसदी से घटकर 21.39 फीसदी रह गई.

Suzlon Energy भी दबाव में

रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की कंपनी Suzlon Energy का शेयर भी अपने 74 रुपये के 52 हफ्ते के उच्च स्तर से गिरकर करीब 41 रुपये पर आ गया है. यानी इसमें करीब 45 फीसदी की गिरावट आई है.

हालांकि दिसंबर तिमाही में FIIs ने अपनी हिस्सेदारी 22.71 फीसदी से बढ़ाकर 23.73 फीसदी कर दी, जबकि म्यूचुअल फंड्स की हिस्सेदारी 4.91 फीसदी से घटकर 4.82 फीसदी रह गई.

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बाजार में जारी इस करेक्शन से साफ संकेत मिलते हैं कि फिलहाल मिडकैप शेयरों में अस्थिरता बनी रह सकती है. ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे बाजार के रुझान और कंपनियों से जुड़े बुनियादी कारकों को ध्यान में रखते हुए निवेश के फैसले लें.

डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.