Titagarh Rail और BHEL का जॉइंट वेंचर, 80 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के मेंटेनेंस का संभालेंगे जिम्मा; निवेशक रखें नजर

टिटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड और भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड ने वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के मेंटेनेंस के लिए जॉइंट वेंचर बनाने का फैसला किया है. करीब 24000 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट के तहत 80 ट्रेनसेट्स तैयार किए जाएंगे और 35 वर्षों तक उनका मेंटेनेंस किया जाएगा. यह पहल भारतीय रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के साथ मेक-इन-इंडिया और आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देगी.

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन Image Credit: PTI

Titagarh Rail Systems-BHEL JV: भारत में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. Titagarh Rail Systems Limited और Bharat Heavy Electricals Limited ने वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के रखरखाव के लिए एक जॉइंट वेंचर (JV) बनाने का फैसला किया है. यह पहल न केवल हाई-स्पीड ट्रेन नेटवर्क को मजबूत करेगी, बल्कि “मेक-इन-इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” अभियान को भी नई गति देगी. इस प्रोजेक्ट के जरिए भारत में अत्याधुनिक रेल सेवाओं के संचालन और मेंटेनेंस को लॉन्ग टर्म आधार मिलेगा.

80 ट्रेनसेट्स का बड़ा ऑर्डर

इस साझेदारी के तहत कुल 80 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट्स तैयार किए जाएंगे, जिनमें हर ट्रेन में 16 कोच होंगे. इस पूरे प्रोजेक्ट की कुल कीमत लगभग 24000 करोड़ रुपये बताई जा रही है. खास बात यह है कि इन ट्रेनों के मेंटेनेंस की जिम्मेदारी अगले 35 वर्षों तक इसी जॉइंट वेंचर के पास रहेगी. टिटागढ़ रेल सिस्टम्स ने पहली रेक के कार बॉडी तैयार करने की डेडलाइन 31 मार्च तय की है, जबकि पहली ट्रेन को वित्त वर्ष 2027 की तीसरी तिमाही तक रोलआउट करने का लक्ष्य रखा गया है.

स्पेशल पर्पज व्हीकल के रूप में बनेगी JV

कंपनी की फाइलिंग के अनुसार, यह जॉइंट वेंचर एक स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) के रूप में स्थापित किया जाएगा, जो वंदे भारत ट्रेनों के मेंटेनेंस के काम को पूरा करेगा. यह कदम सरकार के “मेक-इन-इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” कार्यक्रम के तहत उठाया गया है. बीएचईएल ने भी अपनी अलग फाइलिंग में बताया कि JV गठन के लिए DIPAM की मंजूरी ली जाएगी, जिसके बाद अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर होंगे और आवश्यक रेगुलेटरी डिटेल्स सार्वजनिक की जाएंगी.

रेलवे मंत्रालय ने कई कंपनियों को दिया ठेका

Ministry of Railways ने वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के निर्माण के लिए तीन प्रमुख कंपनियों को ठेका दिया है. इनमें BEML, Kinet Railway Solutions और टिटागढ़-बीएचईएल कंसोर्टियम शामिल हैं. जनवरी 2026 में लॉन्च हुई हावड़ा-कामाख्या वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को BEML ने चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री की तकनीक से विकसित किया था.

रेलवे सेक्टर में बढ़ेगा ऑपरेशन और मेंटेनेंस फोकस

इस जॉइंट वेंचर के जरिए रेलवे सेक्टर में केवल निर्माण ही नहीं, बल्कि ऑपरेशन और मेंटेनेंस पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है. लंबे समय तक मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट मिलने से कंपनियों को स्थिर रेवेन्यू मिलेगा और ट्रेन सर्विस की क्वालिटी भी बेहतर होगी.

कैसा है शेयर का हाल

शुक्रवार को टिटागढ़ रेल का शेयर 0.76 फीसदी बढ़कर 626.35 रुपये पर पहुंच गया, जबकि पिछले एक सप्ताह में इसमें 0.69 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. वहीं BHEL की बात करें तो शुक्रवार को कंपनी का शेयर 4.09 फीसदी बढ़कर 262.05 रुपये पर पहुंच गया, जबकि बीते एक सप्ताह में इसमें 1.73 फीसदी की तेजी देखने को मिली.

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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.