इस हफ्ते शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे ये 5 बड़े फैक्टर, तेल की कीमतों से लेकर FPI के रुख पर रहेंगी नजरें, जानें पूरी डिटेल्स

शेयर बाजार पिछले हफ्ते उतार-चढ़ाव के बीच लगभग सपाट बंद हुआ, जिससे निवेशकों में सतर्कता बनी हुई है. इस हफ्ते बाजार की दिशा कई बड़े वैश्विक और घरेलू कारकों पर निर्भर करेगी. पश्चिम एशिया में तनाव, कच्चे तेल की कीमतें, रुपये की चाल और विदेशी निवेशकों का रुख बाजार की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे.

Top 5 triggers points for Market Next Week Image Credit: @AI/Money9live

Top 5 triggers points for Market Next Week: पिछले हफ्ते शेयर बाजार हल्की गिरावट और भारी उतार-चढ़ाव के साथ बंद हुआ. Nifty 50 और BSE Sensex दोनों में मामूली गिरावट के साथ बंद हुए, लेकिन वैश्विक स्तर पर घटने वाली घटनाओं का असर साफ दिखा. आने वाले हफ्ते में बाजार की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय हालात, तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी. इस रिपोर्ट में पांच ऐसे बड़े ट्रिगर प्वाइंट्स के बारे में बताया गया है, जो बाजार की चाल तय कर सकते हैं.

अमेरिका–इजराल–ईरान तनाव

पश्चिम एशिया में US–Israel–Iran conflict लगातार बढ़ रहा है. खासकर Strait of Hormuz को लेकर तनाव से दुनिया भर में चिंता बढ़ गई है. यह समुद्री मार्ग बंद होने से कच्चे तेल की कीमतों में आग लग गई, जिसका असर आम लोगों पर पड़ने लगा है. पूरे मार्च में बाजार पर यद्ध का असर दिखा है. अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो इसका सीधा असर शेयर बाजार पर आगे भी पड़ेगा क्योंकि निवेशक डर के कारण पैसा निकाल सकते हैं. ट्रंप के 48 घंटे वाले अलटिमेटम के बाद यह संकट और भी गहराता जा रहा है.

कच्चे तेल की कीमतें

Brent crude oil और WTI crude oil की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव बना हुआ है. रविवार को यह 112 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है. भारत जैसे तेल आयात करने वाले देश के लिए महंगा तेल नुकसानदायक होता है. इससे कंपनियों की लागत बढ़ती है और बाजार पर दबाव आता है.

रुपये की कमजोरी

भारतीय मुद्रा रुपये डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है. अब एक रुपया डॉलर की तुलना में 93 रुपये के स्तर को भी पार कर गया है. रुपया गिरने से आयात महंगा हो जाता है और महंगाई बढ़ती है, जिससे बाजार की भावनाएं कमजोर पड़ती हैं.

सोना और चांदी की कीमतें

Gold और Silver की कीमतों में भी तेज गिरावट देखी गई है. आमतौर पर संकट के समय निवेशक सोने में निवेश करते हैं, लेकिन डॉलर मजबूत होने से इसमें गिरावट आई है. यह भी बाजार के मूड को प्रभावित करता है.

विदेशी निवेशकों की बिकवाली

Foreign Institutional Investors लगातार भारतीय बाजार में बिकवाली कर रहे हैं, जबकि घरेलू निवेशक खरीदारी कर रहे हैं. अगर विदेशी निवेशक पैसा निकालते रहे, तो बाजार पर दबाव बना रहेगा और तेजी सीमित हो सकती है. नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के अनुसार, 20 मार्च तक इस महीने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय शेयर बाजार से 88,180 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं

इस हफ्ते शेयर बाजार पूरी तरह खबरों और ग्लोबल घटनाओं पर निर्भर रहेगा. खासकर मिडिल ईस्ट की स्थिति, तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों का रुख तय करेगा कि बाजार ऊपर जाएगा या नीचे.