Waaree Energies की सब्सिडियरी ने जुटाए 1003 करोड़, मंगलवार को फोकस में रह सकता है शेयर

यह सच है कि भारत अपनी बैटरी की जरूरतों के लिए पूरी तरह से इंपोर्ट पर निर्भर है, 2021-22 में Li-ion सेल का इंपोर्ट 1.8 अरब डॉलर था, जो 2024-25 में बढ़कर 3 अरब डॉलर हो गया है. कंपनी ने प्लान किए गए 10,000 करोड़ रुपये के कैपिटल खर्च के हिस्से के तौर पर 1,003 करोड़ रुपये जुटाए हैं.

वारी एनर्जीज के शेयरों में दिख सकती है हलचल. Image Credit: Money9live

क्लीन-एनर्जी फर्म Waaree Energies Ltd की सब्सिडियरी Waaree Energy Storage Services Pvt. Ltd ने सोमवार को बताया कि उसने 20-गीगावाट-घंटे की लिथियम-आयन बैटरी और बैटरी पैक मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी लगाने के लिए प्लान किए गए 10,000 करोड़ रुपये के कैपिटल खर्च के हिस्से के तौर पर 1,003 करोड़ रुपये जुटाए हैं. कंपनी के बयान में Waaree Energy Storage Services Pvt. Ltd के डायरेक्टर अंकित दोशी ने कहा, ‘इन स्ट्रेटेजिक रिसोर्स के साथ हम अपनी 20GWh सेल और बैटरी पैक फैसिलिटी को चालू करने में तेजी लाएंगे, घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करेंगे, और भारत की एनर्जी स्टोरेज क्षमता के विकास में योगदान देंगे.’

कंपनी के इस कदम असर मंगलवार को शेयरों पर नजर आ सकता है. Waaree Energies के शेयर सोमवार 5 जनवरी को 5.34 फीसदी की गिरावट के साथ 2,713.10 रुपये पर बंद हुए.

दोशी ने कहा कि यह पहल न सिर्फ राष्ट्रीय सस्टेनेबल एनर्जी लक्ष्यों को सपोर्ट करती है, बल्कि स्टोरेज सेक्टर में लोकल मैन्युफैक्चरिंग, रोजगार और टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन को भी बढ़ाती है. यह प्लांट एक बार शुरू होने के बाद, सभी साइज के ग्रिड-स्केल स्टोरेज सिस्टम और इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EVs) में इस्तेमाल के लिए बैटरी और बैटरी पैक बनाएगा.

बयान में कहा गया है कि इस इन्वेस्टमेंट के साथ वारी ग्रुप तेजी से एक पूरी तरह से इंटीग्रेटेड एनर्जी ट्रांजिशन प्लेयर बन रहा है, जिसमें सोलर मॉड्यूल, इन्वर्टर, बैटरी, एनर्जी स्टोरेज सिस्टम और उभरती हुई क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी शामिल हैं.’

बढ़ती मांग

यह सच है कि भारत अपनी बैटरी की जरूरतों के लिए पूरी तरह से इंपोर्ट पर निर्भर है, 2021-22 में Li-ion सेल का इंपोर्ट 1.8 अरब डॉलर था, जो 2024-25 में बढ़कर 3 अरब डॉलर हो गया है. इस बीच, देश की एनर्जी स्टोरेज की मांग 2047 तक मौजूदा लगभग 490MWh की एनर्जी स्टोरेज क्षमता से बढ़कर लगभग तीन टेरावाट-घंटे (3,000GWh से ज्यादा) होने वाली है.

इंडिया एनर्जी स्टोरेज अलायंस (IESA) की BESS पर 2025 की सालाना रिपोर्ट के अनुसार, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) क्षमता की टेंडरिंग में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है, जो 2023 में 4GWh से बढ़कर 2025 में 60GWh हो गई है.

पॉलिसी इंटरवेंशन

रिपोर्ट में कहा गया है कि असम, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश सहित कम से कम 10 राज्यों ने अब BESS क्षमता के लिए पॉलिसी इंटरवेंशन या टारगेट शुरू कर दिए हैं. BESS सेक्टर में ये तेजी से हो रहे डेवलपमेंट ऐसे समय में हो रहे हैं जब एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल्स के लिए ₹18,100 करोड़ की प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के तहत 10GWh ESS क्षमता को इंसेंटिव देने की सरकार की योजना अभी तक लागू नहीं हुई है.

2021 की स्कीम के तहत, कुल 50GWh में से कुल 40GWh क्षमता तीन बैटरी बनाने वाली कंपनियों- ओला इलेक्ट्रिक, रिलायंस इंडस्ट्रीज और राजेश एक्सपोर्ट्स को दी गई है.

BESS का इंटीग्रेशन जरूरी

सितंबर 2025 में पब्लिश हुई FICCI-EY की क्रिटिकल टेक्नोलॉजीज पर एक रिपोर्ट में कहा गया है, ‘ग्रिड की स्थिरता और विश्वसनीयता के लिए रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के साथ BESS का इंटीग्रेशन जरूरी है, क्योंकि रिन्यूएबल एनर्जी का इस्तेमाल बढ़ रहा है. एनर्जी स्टोरेज में इन्वेस्टमेंट 2017 में डील वॉल्यूम के सिर्फ 1 फीसदी से बढ़कर 2024 तक 9 फीसदी हो गया है, जिसमें लिथियम-आयन बैटरी का दबदबा है.’

यह भी पढ़ें: SBI फंड्स मैनेजमेंट ने 1.4 अरब डॉलर के IPO के लिए 9 बैंकों से किया संपर्क, जानें कितनी हो सकती है कंपनी की कुल वैल्यू

डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.