बेंगलुरु में Anthropic ने खोला नया ऑफिस, भारत बना Claude AI का दूसरा सबसे बड़ा बाजार; कई पार्टनरशिप का भी ऐलान
AI कंपनी Anthropic ने बेंगलुरु में अपना नया ऑफिस खोलकर भारत में मजबूत मौजूदगी की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. कंपनी ने बताया कि भारत Claude AI के लिए दूसरा सबसे बड़ा बाजार है और यहां की डेवलपर कम्युनिटी दुनिया के सबसे उन्नत एआई प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है. स्थानीय भाषाओं और कृषि-कानून जैसे क्षेत्रों में एआई के बेहतर इस्तेमाल के लिए कई नए सहयोग भी शुरू किए गए हैं.
Anthropic Office Bengaluru Claude AI: AI कंपनी Anthropic ने सोमवार, 16 फरवरी को बेंगलुरु में अपने नए ऑफिस की शुरुआत की घोषणा की है. कंपनी ने इसे भारत में अपना होम बेस और एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में दूसरा ऑफिस बताया है. एंथ्रोपिक के मुताबिक, भारत उनके AI प्लेटफॉर्म Claude.ai के लिए दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाजार बन चुका है. इसी वजह से कंपनी यहां अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए नए पार्टनरशिप प्रोग्राम भी शुरू कर रही है, ताकि लंबे समय तक भारत में काम किया जा सके और ज्यादा लोगों तक AI के फायदे पहुंचाए जा सकें.
डेवलपर की बड़ी कम्युनिटी वाला देश
कंपनी ने बताया कि भारत में डेवलपर्स की एक बड़ी और बेहद अच्छी कम्युनिटी है, जो दुनिया के सबसे जटिल और एडवांस एआई प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है. भारत में Claude का लगभग आधा इस्तेमाल कंप्यूटर और कैलकुलेशन से जुड़े कामों के लिए होता है- जैसे नए ऐप बनाना, पुराने सिस्टम को आधुनिक बनाना और बड़े स्तर पर सॉफ्टवेयर तैयार करना. यही वजह है कि कंपनी भारत को टेक्नोलॉजी और एआई इनोवेशन के लिए एक अहम केंद्र मानती है.
कंपनी ने क्या कहा?
एंथ्रोपिक की भारत प्रमुख इरीना घोष ने कहा कि भारत में जिम्मेदार एआई तकनीक को बड़े पैमाने पर लागू करने की अपार संभावनाएं हैं. यहां शानदार इंजीनियरों की भरमार है, मजबूत डिजिटल ढांचा मौजूद है और तकनीक के जरिए लोगों की जिंदगी बेहतर बनाने का इतिहास भी रहा है. उनका मानना है कि यही वे जरूरी आधार हैं, जिनकी मदद से एआई का फायदा समाज के ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जा सकता है.
कई सेक्टर में पार्टनरशिप का ऐलान
कंपनी ने शिक्षा, इंडस्ट्री और कृषि जैसे कई क्षेत्रों में भारतीय संगठनों के साथ नए सहयोग की भी घोषणा की है. भारत जैसे बहुभाषी देश में एआई की एक बड़ी चुनौती यह रही है कि अधिकांश मॉडल अंग्रेजी में बेहतर काम करते हैं, जबकि स्थानीय भाषाओं में उनकी कैपेसिटी सीमित होती है. इस अंतर को कम करने के लिए एंथ्रोपिक ने पिछले 6 महीनों में एक बड़ा अभियान चलाया, जिसमें भारत की 10 प्रमुख भाषाओं जिसमें- हिंदी, बंगाली, मराठी, तेलुगु, तमिल, पंजाबी, गुजराती, कन्नड़, मलयालम और उर्दू शामिल हैं, के लिए हाई क्वालिटी वाला डेटा तैयार किया गया. इससे कंपनी के एआई मॉडल की इन भाषाओं में समझ और फ्लुएंसी बेहतर हुई है, और इस दिशा में काम जारी है.
दूसरी कंपनियों से मिलकर काम की तैयारी
इसके अलावा, कंपनी Karya और Collective Intelligence Project जैसे संगठनों के साथ मिलकर ऐसे परीक्षण तैयार कर रही है, जो स्थानीय जरूरतों से जुड़े कामों- जैसे खेती और कानून में एआई की उपयोगिता को परखेंगे. इस काम में Digital Green और Adalat AI जैसे भारतीय गैर-लाभकारी संस्थानों के विशेषज्ञ भी शामिल हैं. एंथ्रोपिक का कहना है कि इन अध्ययनों से भविष्य के एआई मॉडल को भारतीय भाषाओं और स्थानीय इस्तेमालों के लिए और बेहतर बनाया जा सकेगा. कंपनी इन परीक्षणों को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराने की भी तैयारी कर रही है, ताकि अन्य संस्थाएं और शोधकर्ता भी उनका इस्तेमाल कर सकें.
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