डिजिटल अरेस्ट से फर्जी निवेश तक, ऐसे हो रही थी साइबर ठगी, म्यूल अकाउंट से खेल, 6 ठग गिरफ्तार
तेलंगाना साइबर सुरक्षा ब्यूरो ने साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है, जिसमें छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है. ठग सरकारी अधिकारी बनकर डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाते थे और फर्जी दस्तावेज भेजकर लोगों पर मानसिक दबाव बनाते थे. इसके अलावा फर्जी शेयर ट्रेडिंग और आईपीओ के नाम पर भी निवेश का लालच दिया गया.
Cyber Fraud Digital Arrest: तेलंगाना साइबर सुरक्षा ब्यूरो ने एक बड़े साइबर फ्रॉड गिरोह का खुलासा किया है, जिसमें 6 लोगों की गिरफ्तारी हुई है. इन ठगों ने अलग-अलग तरीकों से हैदराबाद के लोगों को निशाना बनाया और 16 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी की. जांच में सामने आया कि ठग डर धोखे और लालच का इस्तेमाल कर लोगों से पैसे ट्रांसफर करवाते थे.
कैसे करते थे ठगी
साइबर ठग सबसे पहले खुद को TRAI, CBI, RBI या पुलिस अधिकारी बताकर कॉल करते थे. पीड़ित को कहा जाता था कि उसके आधार या मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किसी अपराध में हुआ है. इसके बाद डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया जाता था. फर्जी नोटिस और नकली सरकारी दस्तावेज भेजकर मानसिक दबाव बनाया जाता था. डर के कारण लोग बिना सवाल किए पैसे भेज देते थे.
वीडियो कॉल पर डराना-धमकाना
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, ठग पीड़ितों को Skype या वीडियो कॉल पर लगातार निगरानी में रखते थे. उनसे कहा जाता था कि कॉल काटने पर कानूनी कार्रवाई होगी. इस दौरान फर्जी CBI और RBI के लेटरहेड दिखाए जाते थे. इसी दबाव में लोगों ने RTGS के जरिये अपनी जमा पूंजी और एफडी तक तुड़वा दी.
म्यूल अकाउंट से करते थे खेल
ठगी की रकम सीधे मुख्य ठगों तक नहीं जाती थी. इसके लिए बैंक खातों का गलत इस्तेमाल किया जाता था. कुछ लोग कमीशन के लालच में अपने या कंपनी के बैंक अकाउंट देने को तैयार हो जाते थे. इन्हें म्यूल अकाउंट कहा जाता है. इन्हीं खातों से पैसा कई जगह भेजकर असली अपराधियों तक पहुंचाया जाता था.
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IPO के नाम पर लालच
एक अन्य तरीका फर्जी निवेश का था. ठग खुद को शेयर बाजार का प्रोफेसर या एक्सपर्ट बताते थे. पहले थोड़ा मुनाफा दिखाकर भरोसा जीतते थे. फिर ज्यादा रकम निवेश करने का दबाव बनाते थे. जब पीड़ित पैसा निकालना चाहता था तो उससे और पैसे जमा कराने को कहा जाता था. इसी तरह करोड़ों की ठगी की गई.
पुलिस ने जारी की चेतावनी
साइबर पुलिस ने लोगों को चेतावनी दी है कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर धमकी नहीं देती. किसी को भी अपना बैंक खाता ओटीपी या डिटेल न दें. कमीशन या टैक्स बचाने के नाम पर खाता मांगना साफ तौर पर साइबर फ्रॉड का संकेत है. सतर्कता ही इससे बचने का सबसे बड़ा तरीका है.
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