डार्क वेब के जरिए बढ़ रहा साइबर क्राइम, सरकार ने दी चेतावनी, जानें कैसे होती है ठगी, ऐसे रहें सेफ

इंटरनेट की दुनिया का एक अंधेरा कोना डार्क वेब अब साइबर अपराधियों के लिए नई पनाहगाह बन गया है. यहां चोरी हुआ डाटा, हैकिंग टूल्स और फर्जी पहचान का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है. गृह मंत्रालय के साइबर दोस्त हैंडल ने चेतावनी दी है कि ठग डार्क वेब से चुराई गई जानकारी का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहे हैं.

Cyber Fraud by Dark Web: इंटरनेट की दुनिया का एक अंधेरा हिस्सा—डार्क वेब (Dark Web)—अब साइबर अपराधियों के लिए नया अड्डा बन गया है. हाल ही में साइबर दोस्त (CyberDost), जो कि गृह मंत्रालय का आधिकारिक साइबर सुरक्षा हैंडल है, ने डार्क वेब के जरिए बढ़ रहे अपराधों को लेकर चेतावनी जारी की है. इसमें कहा गया है कि ठग अब डार्क वेब पर से चुराए गए डाटा का इस्तेमाल कर आम लोगों को निशाना बना रहे हैं.

क्या है डार्क वेब?

डार्क वेब इंटरनेट का वह हिस्सा है, जिसे आम सर्च इंजन जैसे गूगल या याहू से एक्सेस नहीं किया जा सकता. इसे देखने के लिए Tor Browser जैसे विशेष सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है. यहां पर यूजर की पहचान और लोकेशन पूरी तरह छिपी रहती है, जिसका फायदा साइबर अपराधी उठाते हैं.

विशेषज्ञों के अनुसार, डार्क वेब “डीप वेब” का हिस्सा होता है. यहां पर कई वैध सूचनाएं भी होती हैं, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा गैरकानूनी गतिविधियों जैसे डाटा चोरी, हैकिंग टूल्स की बिक्री और फर्जी पहचान बनाने के लिए इस्तेमाल होता है.

डार्क वेब से कैसे होती है ठगी?

साइबर अपराधी पहले किसी कंपनी, बैंक या वेबसाइट से चोरी हुआ डाटा डार्क वेब पर खरीदते हैं. इन डाटा में ईमेल, मोबाइल नंबर, बैंक डिटेल्स और पासवर्ड जैसी संवेदनशील जानकारियां होती हैं. इसके बाद वे इन्हीं जानकारियों के जरिए लोगों को फोन, ईमेल या मैसेज भेजकर धोखा देते हैं.

ठग खुद को बैंक या सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर कहते हैं कि आपके खाते में संदिग्ध ट्रांजैक्शन हुआ है. डर या भ्रम की स्थिति में व्यक्ति उनसे अपनी निजी जानकारी साझा कर देता है या किसी लिंक पर क्लिक कर देता है, जिससे उसका पैसा या डाटा चोरी हो जाता है.

कैसे करें बचाव?

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, डार्क वेब से जुड़ी ठगी से बचने के लिए सतर्क रहना ही सबसे बड़ा हथियार है.

जागरूक रहें, सुरक्षित रहें

डार्क वेब का इस्तेमाल केवल अपराध के लिए नहीं होता. कई बार इसका प्रयोग पत्रकारों या व्हिसलब्लोअर्स द्वारा भी किया जाता है. लेकिन इसकी गुमनामी के चलते यह साइबर अपराध का बड़ा केंद्र बन गया है. साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता और सतर्कता ही इस डिजिटल अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है.

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