H-1B वीजा सख्ती के बीच भारत में कारोबार बढ़ाएगी अल्फाबेट, बेंगलुरु में ऑफिस स्पेस ले रही कंपनी; 20000 नई नौकरियों की तैयारी

H-1B वीजा नियमों में सख्ती के बीच अल्फाबेट भारत में अपने कारोबार का बड़ा विस्तार करने जा रहा है. कंपनी बेंगलुरु में बड़े पैमाने पर ऑफिस स्पेस ले रही है, जिससे करीब 20,000 नई नौकरियां पैदा होने की संभावना है. व्हाइटफील्ड इलाके में तीन ऑफिस टावरों की योजना से भारत में अल्फाबेट का वर्कफोर्स दोगुना से ज्यादा हो सकता है.

गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट Image Credit: Getty image

Alphabet India expansion: अमेरिकी टेक दिग्गज अल्फाबेट भारत में अपने कारोबार का बड़ा विस्तार करने की तैयारी में है. रिपोर्ट के मुताबिक, अल्फाबेट बेंगलुरु में बड़े पैमाने पर ऑफिस स्पेस ले रही है, जिससे आने वाले समय में करीब 20,000 नई नौकरियां पैदा हो सकती हैं. यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है, जब अमेरिका में H-1B वीजा नियम सख्त होते जा रहे हैं और वैश्विक टेक कंपनियों के लिए विदेशी टैलेंट को अमेरिका ले जाना पहले से ज्यादा मुश्किल और महंगा हो गया है.

बेंगलुरु में कहां हो रहा है विस्तार

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अल्फाबेट ने बेंगलुरु के व्हाइटफील्ड इलाके में स्थित एलेम्बिक सिटी में एक ऑफिस टावर लीज पर ले लिया है और दो अन्य टावरों के लिए विकल्प सुरक्षित किए हैं. यह इलाका बेंगलुरु का प्रमुख आईटी हब माना जाता है. रिपोर्ट के अनुसार, इन तीनों टावरों का कुल एरिया करीब 24 लाख स्क्वायर फीट है. पहला टावर, जिसे पहले ही लीज पर लिया जा चुका है, आने वाले कुछ महीनों में कर्मचारियों के लिए खोल दिया जाएगा, जबकि बाकी दो टावरों का निर्माण अगले साल तक पूरा होने की उम्मीद है.

अगर अल्फाबेट तीनों टावरों में पूरी तरह शिफ्ट होता है, तो यह कैंपस करीब 20,000 कर्मचारियों को एडजस्ट कर सकता है. इससे भारत में अल्फाबेट का वर्कफोर्स मौजूदा करीब 14,000 कर्मचारियों के स्तर से दोगुना से भी ज्यादा हो जाएगा. वैश्विक स्तर पर अल्फाबेट में लगभग 190,000 लोग काम करते हैं.

H-1B वीजा सख्ती का असर

अल्फाबेट का यह विस्तार अमेरिका में सख्त होती इमिग्रेशन पॉलिसी के बीच हो रहा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में H-1B वीजा नियमों को और कड़ा किया गया है. नई पॉलिसी और बढ़ी हुई फीस, जो प्रति आवेदन 100,000 डॉलर तक पहुंच सकती है, ने अमेरिकी कंपनियों के लिए भारतीय इंजीनियर्स को अमेरिका ले जाना काफी महंगा बना दिया है. इसके चलते कई अमेरिकी टेक कंपनियां अब भारत जैसे देशों में ही अपनी टीम मजबूत करने पर जोर दे रही हैं.

भारत क्यों बन रहा है टेक हायरिंग का केंद्र

भारत के पास बड़ी संख्या में स्किल्ड इंजीनियर्स और टेक प्रोफेशनल्स हैं, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग और मशीन लर्निंग जैसे क्षेत्रों में. यही वजह है कि अल्फाबेट जैसी कंपनियां भारत को रणनीतिक रूप से अहम मान रही हैं. गूगल पहले ही भारत में कई शहरों में मौजूद है, जिनमें बेंगलुरु उसका सबसे बड़ा बेस है. पिछले साल गूगल ने बेंगलुरु में अपना सबसे बड़ा कैंपस खोला था और इसके बाद एआई, क्लाउड, चिप डिजाइन और मशीन लर्निंग से जुड़े सैकड़ों जॉब ओपनिंग्स निकाली गईं.

एआई रेस में भारत की बढ़ती भूमिका

भारत की अहमियत सिर्फ वीजा पॉलिसी तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक एआई रेस में भी देश की भूमिका तेजी से बढ़ रही है. ओपनएआई और एंथ्रोपिक जैसी कंपनियों ने भी हाल के महीनों में भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ाई है. एंथ्रोपिक ने जनवरी में पूर्व माइक्रोसॉफ्ट एग्जीक्यूटिव इरीना घोष को भारत में अपने ऑपरेशंस की जिम्मेदारी सौंपी थी. उनका कहना है कि भारत के पास यह मौका है कि वह बड़े पैमाने पर एआई के निर्माण और इस्तेमाल की दिशा तय कर सके.

यह भी पढ़ें: बुलियन मार्केट में तेजी बरकरार, गोल्ड और सिल्वर ETF में 10 फीसदी तक उछाल; जानें किसमें आई सबसे ज्यादा तेजी