डीपफेक और बच्चों की सुरक्षा पर सख्ती की तैयारी! सोशल मीडिया कंपनियों से उम्र आधारित नियमों पर बात कर रही सरकार
केंद्र सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों की सुरक्षा बढ़ाने और डीपफेक जैसी खतरनाक तकनीक पर लगाम लगाने के लिए नए नियमों पर विचार कर रही है. आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि उम्र आधारित प्रतिबंध, एज वेरिफिकेशन और कड़े रेगुलेशन को लेकर कंपनियों से बातचीत जारी है.
Government on Deepfake and SM Rules: भारत सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों की सुरक्षा और ऑनलाइन खतरों को लेकर सख्त कदम उठाने की तैयारी में है. केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार, 17 फरवरी को बताया कि सरकार अलग-अलग सोशल मीडिया कंपनियों के साथ उम्र आधारित प्रतिबंध और डीपफेक जैसे गंभीर मुद्दों पर बातचीत कर रही है. उनका कहना है कि डिजिटल दुनिया में बढ़ते जोखिमों से समाज, खासकर बच्चों, को बचाने के लिए मौजूदा नियमों से भी अधिक कड़े प्रावधानों की जरूरत है.
AI इम्पैक्ट में हुई बात
नई दिल्ली में आयोजित इंडिया AI इम्पैक्ट समिट के दौरान मंत्री ने स्पष्ट किया कि चाहे नेटफ्लिक्स हो, यूट्यूब, मेटा या एक्स- भारत में काम करने वाली हर कंपनी को भारतीय कानून और संविधान के अनुरूप ही काम करना होगा. उन्होंने डीपफेक को तेजी से बढ़ती चुनौती बताते हुए कहा कि यह तकनीक लोगों को गुमराह करने, फर्जी सामग्री फैलाने और सामाजिक नुकसान पहुंचाने का बड़ा माध्यम बनती जा रही है, इसलिए इस पर मजबूत नियंत्रण आवश्यक है.
कंपनियों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से बात कर रही सरकार
सरकार फिलहाल टेक कंपनियों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ इस बात पर विचार-विमर्श कर रही है कि किस तरह की नीति या नियामक ढांचा सबसे प्रभावी होगा. वैष्णव ने संकेत दिया कि मौजूदा नियमों के अलावा भी नए तरीकों की जरूरत पड़ सकती है. उन्होंने यह भी बताया कि संसद की संबंधित समिति इस मुद्दे का विस्तृत अध्ययन कर चुकी है और इस पर व्यापक सहमति बनाना जरूरी होगा, ताकि कानून के जरिए समाज को इन खतरों से सुरक्षित किया जा सके.
कई देशों में उम्र के आधार पर है नियंत्रण
उम्र आधारित नियंत्रण के मुद्दे पर मंत्री ने कहा कि दुनिया के कई देशों ने इस दिशा में कदम उठाए हैं. ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों में बच्चों की सोशल मीडिया तक पहुंच सीमित करने, एज वेरिफिकेशन और पैरेंट की अनुमति जैसे नियम लागू किए जा चुके हैं या प्रस्तावित हैं. भारत में भी डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) कानून के तहत बच्चों के लिए अलग तरह की सुरक्षा व्यवस्था पर पहले ही विचार किया जा चुका है.
पहले भी आ चुके हैं इस पर सुझाव
हाल ही में संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण में भी सुझाव दिया गया था कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर आयु आधारित पहुंच पर विचार किया जाना चाहिए, ताकि कम उम्र के यूजर्स को नशे जैसी डिजिटल लत और हानिकारक कंटेंट से बचाया जा सके. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि प्लेटफॉर्म्स को एज वेरिफिकेशन और उम्र के अनुसार सुरक्षित सेटिंग्स लागू करने की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए, खासकर सोशल मीडिया, गेमिंग, जुआ ऐप्स, ऑटो-प्ले फीचर्स और टार्गेटेड विज्ञापनों के मामले में. इसके अलावा, मंत्री ने AI मॉडल और कॉपीराइट से जुड़े मुद्दों पर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि ज्यादातर AI सिस्टम सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सामग्री पर प्रशिक्षित होते हैं, जिससे कंटेंट क्रिएटर्स के अधिकारों का प्रश्न उठता है.
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