राउटर वही Wi-Fi स्पीड गोली जैसी, Next Gen इंटरनेट का रास्ता साफ, DoT ने लोअर 6 GHz बैंड किया डी-लाइसेंस
सरकार ने लोअर 6 GHz बैंड को डी-लाइसेंस कर दिया है जिससे Wi-Fi 6 और Wi-Fi 7 जैसी हाई-स्पीड सेवाएं संभव होंगी. इससे गेमिंग, स्ट्रीमिंग, AR-VR और एंटरप्राइज कनेक्टिविटी बेहतर होगी. यूजर्स को तेज, सस्ता और कम लैग वाला इंटरनेट अनुभव मिलेगा.
अगर आप घर या ऑफिस में स्लो Wi-Fi, गेमिंग में लैग, वीडियो कॉल में अटकने या स्ट्रीमिंग के दौरान बफरिंग से परेशान रहते हैं तो यह खबर आपके लिए राहत लेकर आई है. दूरसंचार विभाग (DoT) ने बुधवार को लोअर 6 GHz बैंड यानी 5925 MHz से 6425 MHz के बीच की फ्रिक्वेंसी को डी-लाइसेंस कर दिया है. इससे तेज Wi-Fi सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा और नेक्स्ट जेनरेशन के Wi-Fi 6 और Wi-Fi 7 का रास्ता खुलेगा. इसका सीधा फायदा आम यूजर्स को मिलने वाला है.
कुछ प्रतिबंध भी रहेंगे
20 जनवरी को जारी संचार मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, सरकार ने लो-पावर इंडोर और बहुत कम पावर वाले आउटडोर डिवाइसेज को बिना किसी लाइसेंस या फ्रीक्वेंसी असाइनमेंट के इन फ्रिक्वेंसीज के उपयोग से छूट दी है.
इसमें रेडियो लोकल एरिया नेटवर्क (RLAN) उपकरण शामिल हैं, जो नॉन-इंटरफेरेंस, नॉन-प्रोटेक्शन और साझा (नॉन-एक्सक्लूसिव) आधार पर इस बैंड में काम करेंगे.
हालांकि, इस बैंड के उपयोग पर कुछ प्रतिबंध भी लगाए गए हैं. इसका इस्तेमाल:
- कार या ट्रेन जैसे ज़मीनी वाहनों में
- नावों और विमानों में (10,000 फीट से ऊपर उड़ान को छोड़कर)
- ड्रोन और अनमैन्ड एरियल सिस्टम के कम्युनिकेशन व कंट्रोल के लिए
नहीं किया जा सकेगा.
यूजर को क्या फायदा होगा?
इस फैसले के बाद भारत में Wi-Fi 6 और Wi-Fi 7 जैसी अगली पीढ़ी की टेक्नोलॉजी का रास्ता साफ हो गया है. इसका मतलब है कि ज्यादा स्पीड, कम लेटेंसी (delay)और एक साथ कई डिवाइसेज पर बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी. अब हाई-एंड गेमिंग, 4K/8K वीडियो स्ट्रीमिंग, AR-VR डिवाइसेज, स्मार्ट टीवी, और बड़े साइज की फाइल ट्रांसफर बिना रुकावट के हो पाएंगे. अच्छी बात यह है कि इसके लिए आपको ज्यादा पावर वाले राउटर की जरूरत नहीं पड़ेगी.
किन डिवाइसेज को मिलेगा फायदा?
नई फ्रिक्वेंसी से PlayStation जैसे गेमिंग कंसोल, Apple और Meta के AR-VR डिवाइस, स्मार्ट होम डिवाइसेज और आने वाले नए Wi-Fi राउटर बेहतर परफॉर्म करेंगे. इससे भारत में भी ग्लोबल लेवल के Wi-Fi डिवाइस जल्दी लॉन्च हो सकेंगे.
लॉन्ग टर्म असर क्या होगा?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह कदम स्मार्ट ऑफिस, डिजिटल हेल्थ, इंडस्ट्री 4.0, स्मार्ट कैंपस और एंटरप्राइज़ नेटवर्किंग को मजबूती देगा. साथ ही, सस्ता और तेज Wi-Fi भारत की डिजिटल इकॉनमी की रीढ़ बनेगा और मोबाइल नेटवर्क पर बोझ भी कम होगा. कुल मिलाकर यूजर के तौर पर तेज Wi-Fi, बेहतर ऑनलाइन अनुभव और भविष्य की टेक्नोलॉजी के लिए तैयार नेटवर्क मिलने वाला है.
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