ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर चल रहा ठगी का खेल! जानें कैसे जाल में फंसाते हैं ठग, ये हैं सेफ रहने के तरीके
ऑनलाइन गेमिंग युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, लेकिन रियल मनी जीत के लालच में कई लोग ठगी का शिकार बन रहे हैं. सोशल मीडिया पर लुभावने ऑफर्स और गारंटीड रिटर्न के वादे कर अवैध गेमिंग ऐप्स लाखों रुपये की चपत लगा रहे हैं, जिससे साइबर फ्रॉड के मामले लगातार बढ़ रहे हैं.
Online Gaming Fraud: देश में ऑनलाइन गेमिंग का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन रियल मनी जीतने के आकर्षक ऑफर्स युवाओं को ठगी के जाल में फंसा रहे हैं. सोशल मीडिया पर विज्ञापन, बोनस और गारंटीड जीत के वादे देकर ऐप्स यूजर्स को छोटी-छोटी रकम जमा करने के लिए लुभाते हैं. हाल ही में पुणे में एक युवक ने एक गेमिंग-इन्वेस्टमेंट स्कैम में 36 लाख रुपये गंवा दिए, जबकि देश भर में ऐसे मामले लगातार बढ़ रहे हैं. अगस्त 2025 में पारित प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग एक्ट के तहत रियल-मनी गेमिंग पर पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद, अवैध ऐप्स युवाओं को निशाना बना रहे हैं.
ठगी कैसे होती है?
ऑनलाइन गेमिंग ठगी मुख्य रूप से तीन चरणों में होती है. सबसे पहले, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, टेलीग्राम और फेसबुक पर आकर्षक विज्ञापन दिखाए जाते हैं, जहां ₹500 जमा करो, ₹5000 जीतो जैसे ऑफर दिए जाते हैं. शुरू में यूजर को छोटी जीत मिलती है ताकि विश्वास बने. दूसरे चरण में बड़े दांव लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है. बोनस, डबल-ट्रिपल रिटर्न या टास्क पूरे करने के नाम पर और पैसे मंगवाए जाते हैं.
तीसरे और अंतिम चरण में गेम रिग्ड (मैनिपुलेटेड) होता है. बॉट्स, एआई या सॉफ्टवेयर से यूजर को हारने के लिए मजबूर किया जाता है. जीतने पर विड्रॉल के लिए मिनिमम अमाउंट बढ़ा दिया जाता है या और डिपॉजिट मांगा जाता है. अक्सर अकाउंट ब्लॉक कर दिया जाता है या फेक ऐप्स यूजर्स के बैंक डिटेल्स चुरा लेते हैं. कई मामलों में चाइनीज ऑपरेटर्स या दुबई स्थित सर्वर्स का इस्तेमाल किया जाता है, और पैसे म्यूल अकाउंट्स के जरिए लॉन्डरिंग कर लिए जाते हैं.
बचाव के तरीके
ठगी से बचने के लिए सतर्क रहना जरूरी है. सबसे महत्वपूर्ण है कभी भी गारंटीड जीत या हाई रिटर्न का दावा करने वाले ऐप्स पर भरोसा न करें. ऐप को गूगल प्ले या ऐप स्टोर से ही डाउनलोड करें, अननोन सोर्सेज से APK फाइल्स इंस्टॉल न करें. डिपॉजिट से पहले ऐप की रिव्यूज, लीगल सर्टिफिकेट और GST नंबर चेक करें.
खेलते समय बजट तय करें और उससे ज्यादा कभी न लगाएं. OTP, बैंक डिटेल्स या पर्सनल जानकारी शेयर न करें. स्ट्रॉन्ग पासवर्ड और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) यूज करें. बच्चों को मॉनिटर करें और उन्हें समझाएं कि गेमिंग मनोरंजन है, कमाई का जरिया नहीं. एंटीवायरस सॉफ्टवेयर अपडेट रखें और संदिग्ध लिंक्स पर क्लिक न करें.
ठगी के बाद कहां करें शिकायत?
ठगी हो जाने पर तुरंत कार्रवाई करें. सबसे पहले नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें. यहां “Report Cyber Crime” सेक्शन में फ्रॉड की डिटेल्स, ट्रांजेक्शन आईडी, स्क्रीनशॉट्स और बैंक स्टेटमेंट अपलोड करें. हेल्पलाइन नंबर 1930 पर भी कॉल कर सकते हैं. अगर पैसे बैंक अकाउंट से गए हैं, तो तुरंत अपने बैंक को सूचित करें ताकि ट्रांजेक्शन ब्लॉक किया जा सके. लोकल पुलिस स्टेशन में Zero FIR दर्ज कराएं (अगर जुरिस्डिक्शन बाहर हो तो भी). बड़े मामलों में कंज्यूमर फोरम से संपर्क करें. जल्द शिकायत करने से पैसे रिकवर होने की संभावना बढ़ जाती है.
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