DigiYatra के दायरे में अगले साल तक आएंगे 27 नए एयरपोर्ट, महज 5 सेकेंड में मिलेगी एंट्री

DigiYatra Foundation ने 10 करोड़ से अधिक यात्राएं पूरी करने का बड़ा माइलस्टोन हासिल कर लिया है. सरकार ने घोषणा की है कि अगले साल तक 27 और हवाई अड्डों पर DigiYatra सुविधा शुरू की जाएगी, जिससे यात्रियों को तेज, पेपरलेस और कॉन्टैक्टलेस यात्रा का अनुभव मिलेगा.

Digi Yatra Image Credit: Money9 Live

हवाई सफर करने वालों के लिए एक बेहतरीन खबर है. एयरपोर्ट पर लंबी कतारों और कागजी झंझटों से मुक्ति दिलाने वाले ‘डिजीयात्रा’ (DigiYatra) प्लेटफॉर्म का देश में तेजी से विस्तार होने जा रहा है. नागरिक उड्डयन मंत्रालय के मुताबिक, अगले साल तक देश के 27 और हवाई अड्डों पर डिजीयात्रा की सुविधा शुरू कर दी जाएगी. वर्तमान में यह तकनीक 38 एयरपोर्ट्स पर काम कर रही है. फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी (चेहरा पहचानने वाली तकनीक) पर आधारित इस ऐप ने अब तक 10 करोड़ से अधिक सुरक्षित और आसान यात्राएं पूरी कराके एक बड़ा कीर्तिमान स्थापित किया है.

सिर्फ 5 सेकेंड में एंट्री; 2.4 करोड़ से ज्यादा डाउनलोड्स

मंत्रालय ने इस प्लेटफॉर्म की सफलता के कुछ बेहद अहम आंकड़े जारी किए हैं, जो इसके बढ़ते क्रेज को दिखाते हैं:

  • समय की भारी बचत: पहले एयरपोर्ट के एंट्री गेट पर मैनुअल डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन में औसतन 15 सेकंड का समय लगता था, जो अब डिजीयात्रा के जरिए घटकर महज 5 सेकंड रह गया है.
  • बढ़ती लोकप्रियता: इस ऐप को अब तक 2.4 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है.
  • क्षेत्रीय भाषाओं का सपोर्ट: वर्तमान में यह ऐप 11 भाषाओं को सपोर्ट करता है. नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू के अनुसार, इस साल के अंत तक इसमें 11 और क्षेत्रीय भाषाएं जोड़ी जाएंगी.

2040 तक 100 करोड़ पैसेंजर्स का टारगेट

केंद्रीय मंत्री राम मोहन नायडू ने भविष्य की तैयारियों को साझा करते हुए कहा कि भारतीय हवाई अड्डों पर सालाना यात्रियों की संख्या 2030 तक 50 करोड़ और 2040 तक लगभग दोगुनी होकर 100 करोड़ पहुंचने का अनुमान है. ऐसे में भीड़ को संभालने के लिए डिजीयात्रा जैसी डिजिटल तकनीक बेहद जरूरी है.

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क्या सुरक्षित है आपका डेटा?

डेटा प्राइवेसी को लेकर मंत्रालय ने साफ किया है कि यात्रियों द्वारा शेयर किया गया डेटा पूरी तरह एनक्रिप्टेड रहता है और केवल उपयोगकर्ता के अपने डिवाइस में ही सुरक्षित स्टोर होता है. इसे सिर्फ यात्रा के समय वेरिफिकेशन के लिए बेहद सीमित अवधि के लिए संबंधित एयरपोर्ट के साथ साझा किया जाता है, जिससे सुरक्षा को लेकर कोई खतरा नहीं है.