Heatwave से बचना है तो सिर्फ तापमान नहीं, ‘Feels Like’ बताएगा असली खतरा…जानें दोनों में क्या है फर्क
भारत के कई शहरों में तापमान 40°C पार कर चुका है, लेकिन असली खतरा ‘feels like’ तापमान में छिपा है. उमस और हवा की कमी के कारण महसूस होने वाली गर्मी वास्तविक तापमान से ज्यादा होती है, जिससे हीट स्ट्रेस और डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है.
भारत के 27 शहरों में सूरज आग उगल रहा है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने हीट वेव का अलर्ट जारी कर दिया है और कई राज्यों में पारा 41 डिग्री सेल्सियस के आंकड़े को छू रहा है या पार कर गया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि मोबाइल स्क्रीन पर दिखने वाला 41°C का तापमान असल में आपको महसूस होने वाली गर्मी की पूरी कहानी नहीं बताता?
गर्मी की इस लहर में असली खेल ‘एक्चुअल टेम्परेचर’ (वास्तविक तापमान) और ‘फील्स लाइक’ (महसूस होने वाला तापमान) के बीच का है. अगर आप सिर्फ थर्मामीटर देख रहे हैं, तो आपको अधूरी सच्चाई मालूम है.
एक्चुअल टेम्परेचर- जो सिर्फ कागजों पर है
वास्तविक या ‘एक्चुअल’ तापमान वह हवा का तापमान है जो मौसम विभाग के उपकरण छायादार और नियंत्रित वातावरण में मापते हैं. उदाहरण के लिए, अगर IMD कहता है कि तापमान 41 डिग्री है, तो यह केवल हवा की गर्मी को दर्शाता है. इसमें इस बात का ध्यान नहीं रखा जाता कि बाहर सड़क पर निकलने पर आपकी बॉडी उस गर्मी को कैसे झेल रही है.
‘Feels Like’ टेम्परेचर- जो आपके शरीर को जला रहा है
‘फील्स लाइक’ तापमान एक ऐसा इंडेक्स है जो यह बताता है कि बाहर निकलने पर आपको वाकई कितनी गर्मी महसूस होगी. यह तीन चीजों के कॉम्बिनेशन से बनता है:
- हवा का तापमान (Air Temperature)
- नमी (Humidity)
- हवा की गति (Wind Speed)
गर्मी के दिनों में ‘फील्स लाइक’ तापमान अक्सर वास्तविक तापमान से 5-7 डिग्री तक ज्यादा होता है. यानी अगर तापमान 41°C है, तो उमस के कारण यह आपको 46°C या 48°C जैसा महसूस हो सकता है.
नमी का खतरनाक रोल, धूप और हवा का गणित
गर्मी में हमें सबसे ज्यादा जो चीज जलाती है, वह है ह्यूमिडिटी.
- पसीने का विज्ञान: हमारा शरीर पसीने के जरिए खुद को ठंडा रखता है. जब पसीना हवा में उड़ता (Evaporate) है, तो शरीर को ठंडक मिलती है.
- उमस का असर: अगर हवा में नमी ज्यादा है, तो पसीना नहीं सूखता. ऐसे में शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती और हमें रिकॉर्ड किए गए तापमान से कहीं ज्यादा तपन महसूस होती है.
सिर्फ उमस ही नहीं, डायरेक्ट सनलाइट भी शरीर द्वारा हीट सोखने की क्षमता को बढ़ा देती है. हालांकि हवा चलने से थोड़ा सुकून मिलता है, लेकिन लू (Heat Wave) के दौरान चलने वाली गर्म हवाएं शरीर को और ज्यादा डिहाइड्रेट करती हैं.
हीट अलर्ट के दौरान यह क्यों जरूरी है?
जब IMD कई शहरों में चेतावनी जारी कर रहा हो, तो ‘फील्स लाइक’ तापमान ही आपकी सुरक्षा का सही पैमाना है:
हीट स्ट्रेस से बचाव: यह इंडेक्स शरीर पर पड़ने वाले वास्तविक तनाव को सटीक तरीके से बताता है.
एक्टिविटी प्लानिंग: अगर ‘फील्स लाइक’ तापमान बहुत ज्यादा है, तो बाहरी कामकाज और व्यायाम से बचना चाहिए.
हाइड्रेशन का सही अंदाजा: ज्यादा महसूस होने वाली गर्मी का मतलब है शरीर से पानी का तेजी से खत्म होना, जिसे केवल ‘एक्चुअल’ तापमान देखकर नहीं समझा जा सकता.
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अगली बार जब आप वेदर ऐप देखें, तो केवल बड़े अक्षरों में लिखे तापमान को न देखें. नीचे छोटे अक्षरों में लिखे ‘Feels Like’ पर गौर करें, क्योंकि असली गर्मी वही है जो आपका शरीर झेल रहा है. सुरक्षित रहें और पानी का सेवन बढ़ा दें.
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