800 साल पुराने मंदिर को लेकर थाईलैंड और कंबोडिया आपस में भिड़े, सेना रहती है तैनात; जानें मामला

कंबोडिया और थाईलैंड की सीमा पर स्थित यह मंदिर हमेशा से विवादों में रहा है. एक बार फिर दोनों देशों के बीच विवाद शुरू हो गया है. करीब 800 साल पुराने इस मंदिर का अपना एक अलग इतिहास है, जिसकी वजह से इस मंदिर का महत्व हमेशा से रहा है. ऐसे में चलिए जानते हैं क्या है इस मंदिर का इतिहास और क्या है इसका भौगोलिक महत्व.

प्राचीन खमेर मंदिर प्रसाद ता मुएन थॉम Image Credit: social media

Disputed Ancient Khmer Temple Prasat Ta Muen Thom: कंबोडिया और थाईलैंड के बीच सीमा पर एक बहुत पुराना मंदिर है, जिसे दोनों देश अपना बताते हैं. इसी मंदिर को लेकर दोनों देशों में एक बार फिर टकराव हो गया है. ये मंदिर करीब 800 साल पुराना है और भगवान शिव को समर्पित है. यह मंदिर कोई साधारण धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि इसका ऐतिहासिक, धार्मिक और भौगोलिक महत्व इतना अधिक है कि यह दशकों से दोनों देशों के बीच विवाद का केंद्र बना हुआ है. मंदिर के कारण इस बार भी सीमा पर गोलीबारी की घटना हुई, जिसमें एक कंबोडियाई सैनिक की जान चली गई. इस घटना के बाद कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन मानेट ने जनता से शांति बनाए रखने की अपील की. लेकिन सवाल ये उठता है कि आखिर एक 800 साल पुराने मंदिर के लिए दोनों देश इतने सालों से टकराव की स्थिति में क्यों हैं? चलिए समझते हैं.

मंदिर को लेकर विवाद क्यों है?

इस विवाद की जड़ है वह भू-भाग, जहां यह मंदिर स्थित है. प्रसात ता मोएन थॉम मंदिर डांगरेक पहाड़ियों में बना हुआ है, जो कंबोडिया के ओडार मींचे प्रांत और थाईलैंड के सुरिन प्रांत की सीमा पर आता है. इस क्षेत्र की सीमा रेखा अब तक स्पष्ट रूप से तय नहीं हो पाई है, जिसकी वजह से दोनों देश इसे अपना क्षेत्र बताते हैं. इस अस्पष्टता के चलते मंदिर क्षेत्र में हमेशा सैनिकों की तैनाती रहती है और अक्सर तनाव या झड़पें होती रहती हैं. कई बार तो स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने आ जाते हैं, जैसे हाल ही में हुआ है.

क्या है मंदिर का इतिहास?

प्रसाद ता मोएन थॉम मंदिर 12वीं शताब्दी में बनाया गया था. यह मंदिर खमेर साम्राज्य की स्थापत्य कला का एक शानदार उदाहरण है और इसे भगवान शिव को समर्पित किया गया है. शिव, जो हिंदू धर्म में विनाश और पुनर्निर्माण के देवता माने जाते हैं, इस मंदिर के गर्भगृह में एक प्राकृतिक शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं. इस मंदिर में प्राचीन काल में धार्मिक अनुष्ठान, तीर्थयात्राएं और पूजा-पाठ हुआ करते थे, जो इसे आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बना देता है.

क्या है भौगोलिक महत्व?

प्रसाद ता मोएन थॉम मंदिर डांगरेक पर्वतमाला में स्थित एक दर्रे पर बना हुआ है, जो थाईलैंड के खोराट पठार और कंबोडिया के मैदानों को जोड़ता है. यह स्थान केवल सांस्कृतिक रूप से ही नहीं, बल्कि सामरिक दृष्टि से भी अहम है. इस स्थान से सीमा पार की गतिविधियों पर नजर रखना संभव है, इसलिए यह क्षेत्र दोनों देशों के लिए सुरक्षा के लिहाज से भी संवेदनशील है. यही कारण है कि दोनों देश इस मंदिर क्षेत्र पर कंट्रोल बनाए रखना चाहते हैं.

मंदिर के वास्तुकला की विशेषताएं

प्रसाद ता मोएन थॉम मंदिर खमेर स्थापत्य शैली का उत्कृष्ट नमूना है. इसका मुख्य निर्माण लेटेराइट नामक मजबूत और टिकाऊ मिट्टी से किया गया है, जबकि कुछ हिस्सों में बलुआ पत्थर का भी इस्तेमाल हुआ है. मंदिर का आकार आयताकार है और इसका मुख्य द्वार दक्षिण दिशा की ओर खुलता है, जो खमेर मंदिरों में असामान्य माना जाता है, क्योंकि अधिकांश खमेर मंदिर पूर्व की ओर मुख करते हैं. मंदिर में नक्काशीदार दीवारें, प्रतीकात्मक आकृतियां और धार्मिक मूर्तियां हैं, हालांकि इनमें से कई समय के साथ क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं.

विवाद कैसे शुरू हुआ?

दरअसल फरवरी 2025 में कुछ कंबोडियाई सैनिक मंदिर के पास पहुंचे और वहां खड़े होकर अपना राष्ट्रगान गाने लगे. इस पर वहां मौजूद थाई सैनिकों ने आपत्ति जताई, जिससे दोनों पक्षों के बीच बहस हो गई. इस पूरी घटना का वीडियो एक थाई नागरिक ने बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया, जिससे मामला और बढ़ गया. मार्च में कंबोडियाई प्रधानमंत्री ने कहा कि वे शांति के पक्षधर हैं, लेकिन अगर थाई सैनिक उनकी सीमा में घुसेंगे, तो उनकी सेना पूरी तरह से जवाब देने के लिए तैयार है.

पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान

आज यह मंदिर कंबोडिया की खमेर सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक माना जाता है. कंबोडियाई सरकार इसे पर्यटन के लिए बढ़ावा देती है और इसे अपनी संस्कृति की पहचान के रूप में प्रस्तुत करती है. हालांकि, यह क्षेत्र अभी भी संवेदनशील है, इसलिए यहां जाने वाले पर्यटकों को अपनी पहचान साथ रखने और स्थानीय सेना से अनुमति लेने की सलाह दी जाती है. थाईलैंड और कंबोडिया दोनों देशों के पर्यटक इस मंदिर में रुचि रखते हैं और इसे देखने के लिए पहुंचते हैं.

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