ट्रंप का यू-टर्न, 2-3 हफ्तों में ईरान संग युद्ध खत्‍म करने के दिए संकेत, NATO देशों से हुए खफा

डोनाल्‍ड ट्रंप ने अपने पिछले बयान से यू-टर्न लेते हुए संकेत दिए कि अमेरिका 2-3 हफ्तों में ईरान के साथ युद्ध खत्म कर सकता है और इसके लिए कोई डील जरूरी नहीं होगी. हालांकि ईरान अभी भी जवाबी कार्रवाई कर रहा है. उसने मेरिका की बड़ी कंपनियों को निशाना बनाने की धमकी दी है. इसमें माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, एप्पल, टेस्ला और बोइंग जैसी कंपनियों के नाम शामिल हैं.

trump hints for war end Image Credit: canva/AI image

West Asia Tension: वेस्‍ट एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने अपने पिछले बयान से यू-टर्न लेते हुए जंग खत्‍म करने के संकेत दिए हैं. उनके मुताबिक अमेरिका अगले 2 से 3 हफ्तों के भीतर ईरान पर अपने सैन्य हमले रोक सकता है. खास बात यह है कि ट्रंप ने साफ कर दिया कि युद्ध खत्म करने के लिए ईरान के साथ किसी डील की शर्त जरूरी नहीं है.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने ये बातें व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहीं. उनका कहना है, “हम बहुत जल्द वहां से निकल सकते हैं, दो हफ्ते, शायद तीन हफ्ते.” यह बयान उनके पहले के रुख से अलग माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने ईरान को सख्त चेतावनी दी थी कि अगर जल्द समझौता नहीं हुआ तो हमले और तेज किए जाएंगे.

ट्रंप का बदला रुख

ट्रंप का ताजा बयान उनके पहले के सख्त रुख से अलग है. कुछ दिन पहले उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को नहीं खोला और डील नहीं की, तो अमेरिका ईरान के तेल क्षेत्रों, बिजली संयंत्रों और अहम इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले कर सकता है. लेकिन अब उन्होंने साफ किया है कि युद्ध खत्म करने के लिए डील जरूरी नहीं है कि बात कही है जो अमेरिका रणनीति में बदलाव कर सकता है.

NATO में दरार

इस बीच ट्रंप ने अमेरिका के पारंपरिक सहयोगी देशों पर भी निशाना साधा. उन्होंने फ्रांस पर अमेरिकी सप्लाई विमानों को रोकने का आरोप लगाया और होर्मुज को फिर से खोलने में मदद न करने के लिए यूके को कायर कहा. इतना ही नहीं उन्होंने सहयोगी देशों को चेतावनी भी दी कि वे अब अमेरिकी समर्थन पर निर्भर नहीं रह सकते. वे थोड़ी हिम्मत जुटाएं और खुद जाकर अपना तेल हासिल करें. सूत्रों के अनुसार, फ्रांस और इटली ने कुछ अमेरिकी-इजरायली सैन्य अभियानों का विरोध किया है, जिससे यह बात सामने आई है कि इस युद्ध के कारण NATO सहयोगियों के बीच की दरारें सामने आने लगी हैं.

अमेरिका की दोहरी रणनीति

अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने कहा कि अमेरिका एक तरफ बातचीत के लिए तैयार है, वहीं जरूरत पड़ने पर युद्ध जारी रखने के विकल्प भी खुले हैं. उन्होंने कहा कि उनके पास विकल्प बढ़ रहे हैं और ईरान के विकल्प कम हो रहे हैं.

ईरान की चेतावनी

अमेरिका भले ही जंग खत्‍म करने के संकेत दे रहा हो, लेकिन ईरान ने जवाबी कार्रवाई जारी रखी है. उसकी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अमेरिका की बड़ी कंपनियों को निशाना बनाने की धमकी दी है. इसमें माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, एप्पल, टेस्ला और बोइंग जैसी कंपनियों के नाम शामिल हैं. इसके अलावा ईरान ने अमेरिकी विशेष दूत से मिल रहे संदेशों को धमकी और दबाव बताया है, न कि औपचारिक बातचीत.

कैसे शुरू हुआ संघर्ष?

इस युद्ध की शुरुआत तब हुई जब 28 फरवरी को सैन्य हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामनेई की मौत हो गई. इसके बाद अमेरिका और इजराइल ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए ईरान के कई ठिकानों पर हमले तेज कर दिए. इसके जवाब में ईरान ने भी आक्रामक रुख अपनाया और खाड़ी देशों में अमेरिकी और इजराइली ठिकानों को निशाना बनाया. इस टकराव का असर वैश्विक स्तर पर देखने को मिला, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्ग पर, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल सप्लाई होता है.

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर

तेल सप्लाई पर खतरे और बढ़ते तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है. इससे वैश्विक महंगाई और सप्लाई चेन पर दबाव पड़ा है. कई देशों की अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है.

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