सीजफायर के बाद बदल जाएगी तेल की दुनिया! ट्रंप पर भारी पड़ा ईरान; डील में होर्मुज बना सबसे बड़ा हथियार
ईरान-अमेरिका युद्धविराम के बीच एक बड़ी शर्त सामने आई है, होर्मुज से गुजरने वाले हर जहाज पर करीब ₹18.5 करोड़ की फीस लग सकती है. इस डील में ईरान ने अपने रणनीतिक दबदबे का इस्तेमाल कर आर्थिक और कूटनीतिक बढ़त हासिल की है.

Iran US ceasefire deal: ईरान और अमेरिका के बीच हुआ दो हफ्ते का युद्धविराम निश्चित तौर पर शांति की दिशा में एक अहम कदम है, लेकिन इसके साथ जुड़ी शर्तें इस समझौते की गहराई और रणनीतिक पहलुओं को भी सामने लाती हैं. इस डील में ईरान ने अपने सबसे बड़े रणनीतिक हथियार- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज- का ऐसा इस्तेमाल किया है कि बातचीत की टेबल पर उसका पलड़ा भारी नजर आ रहा है. तेल सप्लाई के इस अहम रास्ते को खोलने के बदले तेहरान ने कई ऐसी शर्तें मनवाई हैं, जो उसे आर्थिक और कूटनीतिक दोनों मोर्चों पर फायदा देती हैं.
$2 मिलियन फीस: होर्मुज बना ‘कमाई का रास्ता’
Associated Press ने एक रिजनल अधिकारी के हवाले से बताया कि इस समझौते के तहत ईरान और ओमान को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर फीस लगाने की इजाजत दी गई है.
वहीं, The New York Times की रिपोर्ट के मुताबिक, यह फीस करीब $2 मिलियन (करीब ₹18.5 करोड़) प्रति जहाज हो सकती है, जिसे ईरान और ओमान आपस में बांटेंगे. इस डील के जरिए ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट अपने शर्त पर खोलने की सहमति जताई और उसे एक रेवेन्यू मॉडल में बदल दिया.
ब्लॉकेड हटाने के बदले बड़ी रियायतें
डील के तहत ईरान ने होर्मुज पर अपनी ‘डि-फैक्टो’ नाकेबंदी हटाने का संकेत दिया है, जिससे दुनिया की करीब 20 फीसदी ऊर्जा सप्लाई फिर से सामान्य हो सकेगी. लेकिन इसके बदले ईरान ने कई अहम मांगें भी रखीं. The New York Times के अनुसार, तेहरान को यह भरोसा दिया गया है कि:
- उस पर दोबारा हमला नहीं होगा
- लेबनान में हिज्बुल्लाह पर इजरायली हमले रुकेंगे
- और प्रतिबंधों को हटाने पर बातचीत होगी
यानी, सैन्य दबाव को कम कराकर ईरान ने अपने लिए राजनीतिक स्पेस भी तैयार किया.
ट्रंप का दावा: “पूरी जीत”, पर तस्वीर अलग
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते को “दुनिया की शांति के लिए बड़ा दिन” बताया. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिका होर्मुज में ट्रैफिक मैनेजमेंट में मदद करेगा और ईरान पुनर्निर्माण शुरू कर सकता है. AFP से बातचीत में ट्रंप ने इसे “100% जीत” करार दिया, लेकिन डील की शर्तें यह संकेत देती हैं कि कहानी इतनी सीधी नहीं है.
जहां एक तरफ ट्रंप इसे “100 फीसदी जीत” बता रहे हैं, वहीं इस समझौते का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है. अब तक जो समुद्री रास्ता लगभग मुफ्त माना जाता था, वहां से गुजरने के लिए हर जहाज को भारी शुल्क देना पड़ेगा. इसका सीधा असर वैश्विक सप्लाई चेन और तेल व्यापार की लागत पर पड़ेगा, यानी आने वाले समय में पूरी सप्लाई व्यवस्था का ढांचा बदलता नजर आ सकता है.
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होर्मुज स्ट्रेट ईरान के लिए सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं, बल्कि एक कूटनीतिक दबाव का सबसे बड़ा हथियार है.
तेल की वैश्विक सप्लाई को प्रभावित करने की उसकी क्षमता ने अमेरिका और उसके सहयोगियों को बातचीत की टेबल पर आने के लिए मजबूर किया. इस डील से यह साफ हो गया है कि ईरान ने युद्ध के मैदान से ज्यादा रणनीति और अर्थव्यवस्था के जरिए बढ़त बनाई है, और फिलहाल, इस समझौते में उसका पलड़ा भारी नजर आता है.