अमेरिका से ट्रेड डील तोड़ने वाला पहला देश बना मलेशिया, USA को हो सकता है ये बड़ा नुकसान

मलेशिया ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद US के साथ ट्रेड डील को खत्म कर दिया है. इससे इलेक्ट्रॉनिक्स, पाम ऑयल और रबर जैसे सेक्टरों की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. अमेरिकी कंपनियों की लागत बढ़ने और ASEAN में उसकी रणनीतिक पकड़ कमजोर होने का खतरा है.

अमेरिका मलेशिया ट्रेड डील Image Credit: canva

वैश्विक व्यापार में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. मलेशिया ने अमेरिका के साथ हुए रेसिप्रोकल ट्रेड एग्रीमेंट (ART) को “नल एंड वॉयड” (null and void) घोषित कर दिया है. यह कदम अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद उठाया गया जिसमें इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए टैरिफ को रद्द कर दिया गया था. इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में तनाव बढ़ गया है. मलेशिया ऐसा पहला देश बन गया है जिसने अमेरिका के साथ ट्रेड डील को ‘नल एंड वॉयड’ बताया है. आइये जानते हैं कि इससे अमेरिका को कैसे नुकसान हो सकता है?

पूरी तरह खत्म हुआ समझौता

मलेशिया के निवेश, व्यापार और उद्योग मंत्री दातुक सेरी जोहारी अब्दुल गनी ने कहा कि अमेरिका-मलेशिया रेसिप्रोकल ट्रेड एग्रीमेंट (ART) अब मान्य नहीं है. उन्होंने कहा, “यह होल्ड पर नहीं है, यह अब अस्तित्व में नहीं है, यह पूरी तरह खत्म हो चुका है.” यह समझौता अक्टूबर में कुआलालंपुर में ASEAN समिट के दौरान साइन किया गया था और इसमें मलेशिया के लगभग 12% निर्यात शामिल थे. इसका उद्देश्य मलेशियाई सामानों के लिए बाजार पहुंच आसान बनाना और अमेरिका के आयात को सस्ता करना था.

क्यों टूटा अमेरिका-मलेशिया समझौता?

मलेशिया के ट्रेड मंत्री दातुक सेरी जोहारी अब्दुल गनी ने साफ कहा कि यह समझौता अब पूरी तरह खत्म हो चुका है. इसकी मुख्य वजह बनी US सुप्रीम कोर्ट का फैसला, जिसमें IEEPA के तहत लगाए गए टैरिफ को गैरकानूनी बताया गया. मलेशिया का तर्क है कि अगर ट्रेड “रेसिप्रोकल” है, तो टैरिफ भी कानूनी और सेक्टर-विशेष होने चाहिए, न कि सभी पर एक साथ लागू.

अमेरिका को क्या नुकसान?

यह सिर्फ कूटनीतिक विवाद नहीं, बल्कि सप्लाई चेन पर सीधा असर डालने वाला मामला है. अगर टैरिफ बढ़ते हैं या रियायतें खत्म होती हैं, तो अमेरिकी कंपनियों की लागत बढ़ सकती है और सप्लाई बाधित हो सकती है. इससे कई प्रमुख सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं.

• इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर सप्लाई
• तेल और गैस से जुड़े इनपुट
• पाम ऑयल (फूड, कॉस्मेटिक्स, बायोफ्यूल)
• रबर प्रोडक्ट्स (मेडिकल ग्लव्स)

महंगाई का बढ़ सकता है दबाव

डील खत्म होने के बाद यानी व्यापार नीति का असर सीधे महंगाई के रूप में दिख सकता है.

• अमेरिकी आयातकों को ज्यादा टैरिफ देना पड़ सकता है
• कंपनियां यह लागत ग्राहकों पर डाल सकती हैं
• हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स और फूड सेक्टर में कीमतें बढ़ सकती हैं

ASEAN में अमेरिका की रणनीति को झटका

अमेरिका लंबे समय से दक्षिण-पूर्व एशिया (ASEAN) में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा था, ताकि चीन को संतुलित किया जा सके लेकिन मलेशिया जैसे देश के साथ समझौता टूटने से उसकी रणनीतिक स्थिति कमजोर हो सकती है. यह संदेश भी जाता है कि अमेरिकी ट्रेड पॉलिसी घरेलू फैसलों के कारण अचानक बदल सकती है.

आगे क्या बढ़ सकती है मुश्किल?

अमेरिका ने मलेशिया समेत 16 देशों के खिलाफ Section 301 जांच भी शुरू की है, जिससे तनाव और बढ़ सकता है. अगर अन्य देश भी मलेशिया की राह पर चलते हैं, तो अमेरिका की वैश्विक व्यापारिक पकड़ कमजोर पड़ सकती है. इस मुद्दे पर मलेशिया के अंदर भी राजनीति गरमा गई है. विपक्ष ने संसद में इस पर चर्चा की मांग की है.

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