होर्मुज स्ट्रेट फिर बंद, ईरान ने दोबारा लगाई पाबंदी, US पर समझौता तोड़ने का आरोप
Iran ने होर्मुज स्ट्रेट पर फिर से पाबंदी लगा दी है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है. Iran ने US पर समझौता तोड़ने का आरोप लगाया है. इससे पहले ceasefire के बाद इस जलमार्ग को खोला गया था, लेकिन Donald Trump के बयान के बाद हालात बदल गए. US ने Iran के खिलाफ नाकाबंदी जारी रखने की बात कही है.
Strait of Hormuz Crisis: पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है. ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अपना फैसला बदलते हुए दोबारा पाबंदियां लगा दी हैं. यह वही समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल गुजरता है. ईरान ने आरोप लगाया है कि US ने समझौते का पालन नहीं किया. इससे पहले ईरान ने सीजफायर के बाद इस रास्ते को खोल दिया था. लेकिन US के बयान के बाद हालात फिर बदल गए हैं. इस घटनाक्रम से वैश्विक बाजार और तेल कीमतों पर असर पड़ सकता है.
ईरान ने फिर लगाया कंट्रोल
ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर दोबारा सख्त नियंत्रण लागू कर दिया है. सेना के संयुक्त कमान ने कहा है कि इस जलमार्ग पर फिर से पूरी निगरानी रखी जा रही है. ईरान का कहना है कि जब तक US उसकी बंदरगाहों पर पाबंदी रखेगा तब तक वह भी इस रास्ते को पूरी तरह खुला नहीं रखेगा. इससे जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है.
पहले खोला गया था रास्ता
शुक्रवार को ईरान ने लेबनान में सीजफायर के बाद इस रास्ते को खोल दिया था. इससे उम्मीद जगी थी कि तनाव कम होगा और व्यापार सामान्य होगा. लेकिन कुछ ही समय बाद हालात फिर बदल गए. US के बयान ने ईरान को अपना फैसला बदलने पर मजबूर कर दिया.
US ने क्या कहा
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट खुला रहेगा लेकिन ईरान के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी जारी रहेगी. उन्होंने साफ किया कि जब तक ईरान के साथ पूरा समझौता नहीं हो जाता तब तक यह पाबंदी खत्म नहीं होगी. ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान ने दोबारा इस रास्ते को बंद न करने की बात मानी थी.
क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है. यहां से करीब एक पांचवां हिस्सा वैश्विक तेल गुजरता है. साथ ही दुनिया के LNG व्यापार का भी बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होता है. इसलिए यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है.
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तेल बाजार पर पड़ सकता है असर
अगर होर्मुज स्ट्रेट पर पाबंदी जारी रहती है तो तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ सकती हैं. पहले से ही सप्लाई दबाव में है और ऐसे में यह संकट और गहरा सकता है. कई देश इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं.
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