पैसे के दम पर ग्रीनलैंड? अमेरिका लोगों को कैश ऑफर कर खरीदना चाहता है देश! डेनमार्क बोला ‘नॉट फॉर सेल’

अमेरिका ग्रीनलैंड को अपने करीब लाने के लिए वहां के लोगों को सीधे Cash payment देने की योजना पर विचार कर रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रति व्यक्ति 10,000 से 100,000 डॉलर तक देने पर चर्चा हुई है. इस प्रस्ताव पर ग्रीनलैंड, डेनमार्क और यूरोपीय देशों ने कड़ा विरोध जताया है, जबकि खुद ग्रीनलैंड के लोग अमेरिका का हिस्सा बनने के पक्ष में नहीं दिख रहे हैं.

पैसे के दम पर ग्रीनलैंड? Image Credit: AI/Money9 live

Donald Trump: अमेरिकी राजनीति में एक बार फिर ऐसा बयान और योजना सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है. इस बार मामला किसी War और trade समझौते का नहीं, बल्कि एक पूरे द्वीप को खरीदने की सोच से जुड़ा है. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump से जुड़ी टीम ग्रीनलैंड को लेकर एक नई और चौंकाने वाली योजना पर विचार कर रही है.

अमेरिका ग्रीनलैंड के लोगों को सीधे नकद पैसे देने की योजना पर सोच रहा है, ताकि वे डेनमार्क से अलग होकर अमेरिका के करीब आ सकें. इसके सामने आते ही यूरोप और नाटो देशों में चिंता बढ़ गई है. सवाल यह है कि क्या किसी देश को लोगों को पैसा देकर अपने साथ जोड़ना संभव है. और अगर ऐसा हुआ, तो इसके Global impact क्या होंगे.

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की नई सोच

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के अधिकारियों ने अंदरूनी तौर पर ग्रीनलैंड के लोगों को प्रति व्यक्ति 10,000 डॉलर से लेकर 100,000 डॉलर तक देने पर चर्चा की है. ग्रीनलैंड की आबादी करीब 57,000 है. अगर यह योजना लागू होती है, तो कुल खर्च करीब 6 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. फिलहाल यह द्वीप डेनमार्क का एक Semi-autonomous region है और प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है.

पहले भी सामने आ चुका है ग्रीनलैंड खरीदने का विचार

यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका ने ग्रीनलैंड को लेकर ऐसी सोच दिखाई हो. इससे पहले भी व्हाइट हाउस के स्तर पर ग्रीनलैंड को खरीदने की बात उठ चुकी है. हालांकि डेनमार्क और ग्रीनलैंड दोनों ने साफ कहा है कि यह द्वीप बिक्री के लिए नहीं है. इसके बावजूद अमेरिका में इस मुद्दे पर चर्चा बार-बार सामने आती रही है.

रिपोर्ट के अनुसार, कैश पेमेंट इस योजना का सिर्फ एक हिस्सा है. इसके अलावा कूटनीतिक समझौते और यहां तक कि सैन्य विकल्पों पर भी विचार किया गया है. यह बात नाटो देशों के लिए चिंता का कारण बन गई है, क्योंकि अमेरिका और डेनमार्क दोनों नाटो के सदस्य हैं और ग्रीनलैंड को लेकर कई अंतरराष्ट्रीय समझौते पहले से मौजूद हैं.

ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री का कड़ा जवाब

ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री Jens-Frederik Nielsen ने इस प्रस्ताव पर सख्त प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने फेसबुक पर लिखा कि अब बहुत हो गया है. ग्रीनलैंड को जबरन अपने में मिलाने की कल्पनाएं बंद होनी चाहिए. उनका साफ कहना है कि ग्रीनलैंड का भविष्य ग्रीनलैंड के लोग खुद तय करेंगे. डेनमार्क के साथ-साथ फ्रांस, जर्मनी, इटली, पोलैंड, स्पेन, ब्रिटेन और डेनमार्क ने संयुक्त बयान जारी किया है. इन देशों ने कहा कि ग्रीनलैंड के भविष्य पर फैसला सिर्फ ग्रीनलैंड और डेनमार्क का अधिकार है. किसी बाहरी देश का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा.

अमेरिका क्यों चाहता है ग्रीनलैंड

रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि ट्रंप और उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम यह देख रही है कि संभावित खरीद कैसी हो सकती है. अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio ने पुष्टि की है कि वह अगले हफ्ते वॉशिंगटन में अपने डेनमार्क के समकक्ष से इस मुद्दे पर बातचीत करेंगे.

डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है. उनका दावा है कि रूस और चीन जैसे देशों के खिलाफ रणनीतिक बढ़त के लिए ग्रीनलैंड अहम भूमिका निभा सकता है. सर्वे बताते हैं कि ग्रीनलैंड के ज्यादातर लोग डेनमार्क से आजादी चाहते हैं. लेकिन वही सर्वे यह भी दिखाते हैं कि वे अमेरिका का हिस्सा बनना नहीं चाहते.

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