ईरान का पलटवार, अमेरिकी ऑयल टैंकर पर किया हमला, हिंद महासागर में युद्धपोत डूबने के बाद एक्शन, रिपोर्ट में दावा

अमेरिका और ईरान के बीच समुद्री तनाव तेजी से बढ़ गया है. श्रीलंका के पास अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरान के युद्धपोत आईआरआईएस डेना को टारपीडो से डुबो दिया, जिसमें कई ईरानी नौसैनिक मारे गए. इसके कुछ ही घंटे बाद ईरान ने फारस की खाड़ी में एक अमेरिकी तेल टैंकर पर हमला करने का दावा किया. इस घटना के बाद स्ट्रीट ऑफ होर्मुज में तनाव और बढ़ गया है और वैश्विक समुद्री सुरक्षा व तेल आपूर्ति को लेकर चिंता गहरा गई है.

अमेरिका और ईरान के बीच समुद्री तनाव तेजी से बढ़ गया है.

US Iran conflict: पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच का युद्ध अब समुद्र तक पहुंच गया है. हिंद महासागर और फारस की खाड़ी के आसपास हाल के दिनों में कई सैन्य घटनाएं सामने आई हैं. अमेरिका ने श्रीलंका के पास एक ईरानी युद्धपोत को टारपीडो से डुबो दिया. इसके कुछ ही घंटे बाद ईरान ने दावा किया कि उसने फारस की खाड़ी में एक अमेरिकी तेल टैंकर पर हमला किया है. इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा और तेल सप्लाई को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है.

ईरान का अमेरिकी टैंकर पर हमला

युद्धपोत डूबने के कुछ घंटे बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दावा किया कि उसने उत्तरी फारस की खाड़ी में एक अमेरिकी तेल टैंकर को निशाना बनाया. ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार हमले के बाद जहाज में आग लग गई. हालांकि इस घटना को लेकर अमेरिका की ओर से तुरंत कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई. फिर भी इसे दोनों देशों के बीच सीधे टकराव के रूप में देखा जा रहा है.

श्रीलंका के पास डुबोया गया ईरानी युद्धपोत

अमेरिकी नौसेना ने हिंद महासागर में श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास ईरान के युद्धपोत आईआरआईएस डेना को निशाना बनाया. यह जहाज भारत के विशाखापत्तनम से लौट रहा था, जहां उसने हाल ही में दो नौसैनिक अभ्यासों में भाग लिया था. अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में हुए इस हमले में टारपीडो का उपयोग किया गया. धमाके के बाद जहाज का पिछला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और कुछ ही समय में वह समुद्र में डूब गया.

हमले में कई ईरानी सैनिक मारे गए

इस हमले में ईरान के 87 नौसैनिकों की मौत होने की खबर है. जहाज के कमांडर और कई वरिष्ठ अधिकारी उन लोगों में शामिल थे जिन्हें बचा लिया गया. करीब 32 लोगों को समुद्र से सुरक्षित निकाला गया. हालांकि अब भी 60 से अधिक नाविक लापता बताए जा रहे हैं. यह घटना हाल के वर्षों में ईरानी नौसेना के लिए सबसे बड़ी समुद्री क्षति मानी जा रही है.

अमेरिका ने इस्तेमाल किया आधुनिक टारपीडो

अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार इस हमले में मार्क 48 टारपीडो का इस्तेमाल किया गया. यह अमेरिकी नौसेना का एक शक्तिशाली हथियार माना जाता है. पनडुब्बियों से दागे जाने वाला यह टारपीडो बड़े युद्धपोतों को भी गंभीर नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखता है. बताया जा रहा है कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद यह पहला मौका है जब किसी अमेरिकी पनडुब्बी ने टारपीडो से किसी जहाज को डुबोया है.

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