ईरान के खतरे के बाद कुवैत का बड़ा कदम, तेल बिक्री पर Force Majeure लागू, प्रोडक्शन भी घटाया, जानें क्या होगा असर

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कुवैत पेट्रोलियम कॉर्प ने तेल बिक्री पर फोर्स मेजर लागू करने की घोषणा की है. कंपनी ने कहा कि यह कदम ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर दिए गए खतरों के कारण उठाया गया है. हालात को देखते हुए कंपनी ने कच्चे तेल के उत्पादन और रिफाइनिंग क्षमता को एहतियात के तौर पर कम कर दिया है.

कुवैत ने तेल बिक्री पर फोर्स मेजर लागू करने की घोषणा की है. Image Credit: money9live

Kuwait Petroleum Corp force majeure: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब तेल बाजार पर भी दिखने लगा है. कुवैत पेट्रोलियम कॉर्प ने तेल बिक्री पर फोर्स मेजर लागू करने का एलान किया है. कंपनी का कहना है कि यह कदम ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर दिए गए खतरों के कारण उठाया गया है. हालात को देखते हुए कंपनी ने कच्चे तेल के प्रोडक्शन और रिफाइनिंग एक्टिविटी को एहतियात के तौर पर कम कर दिया है. कंपनी का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह सावधानी के तहत लिया गया है और हालात सामान्य होने पर प्रोडक्शन फिर बढ़ाया जाएगा.

फोर्स मेजर क्या होता है

फोर्स मेजर का मतलब ऐसी अचानक और असाधारण स्थिति से होता है जिसमें कंपनी चाहकर भी अपना तय काम या सप्लाई पूरा नहीं कर पाती. यह हालात युद्ध, प्राकृतिक आपदा, राजनीतिक तनाव या सुरक्षा खतरे जैसी वजहों से बनते हैं. ऐसी स्थिति में कंपनी अस्थायी रूप से प्रोडक्शन या सप्लाई रोकने की घोषणा कर सकती है और इसके लिए उसे कॉन्ट्रैक्ट तोड़ने का दोषी नहीं माना जाता. आसान शब्दों में कहें तो मजबूरी में काम रोकने की स्थिति को फोर्स मेजर कहा जाता है.

ईरान के खतरे के बाद लिया गया फैसला

कुवैत पेट्रोलियम कॉर्प ने बताया कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर ईरान की ओर से खतरे की बात सामने आई है. इसी कारण कंपनी ने रिस्क मैनेजमेंट और बिजनेस रणनीति के तहत तेल प्रोडक्सन कम करने का फैसला लिया. कंपनी के अनुसार यह कदम एहतियाती है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है.

ऑयल प्रोडक्शन और रिफाइनिंग में कमी

कंपनी ने कहा कि सुरक्षा कारणों से कच्चे तेल के उत्पादन और रिफाइनिंग क्षमता को अस्थायी रूप से कम किया गया है. कुछ रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रिजर्व की कमी के कारण कुछ तेल क्षेत्रों में उत्पादन रोकना पड़ा है. होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण तेल की आवाजाही प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है. इसी वजह से कंपनियां अपने संसाधनों को सुरक्षित रखने की रणनीति अपना रही हैं.

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कतर ने भी उठाया ऐसा ही कदम

क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच कतर ने भी अपने सबसे बड़े LNG सेंटर रस लफान में LNG प्रोडक्शन रोकने के बाद फोर्स मेजर जारी किया है. यह दुनिया का सबसे बड़ा LNG कॉम्प्लेक्स माना जाता है. पश्चिम एशिया की कई ऊर्जा कंपनियां इसी तरह की चुनौतियों का सामना कर रही हैं. जानकारों का कहना है कि अगर तनाव बढ़ता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका असर और बढ़ सकता है.

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