ईरान-अमेरिका युद्ध पर 14 दिन का ब्रेक! दोनों देशों ने लगाई मुहर, ट्रंप ने पाकिस्तान को बोला ‘थैंक्यू’

39 दिनों से जारी ईरान-अमेरिका टकराव में अब कुछ दिनों के लिए राहत मिल गई है. पाकिस्तान की मध्यस्थता के बाद 14 दिनों के लिए युद्ध पर ब्रेक लगा है. होर्मुज स्ट्रेट खोलने से लेकर शांति समझौते तक, कई शर्तों पर सहमति बनी है. अब दुनिया की नजर अगले 2 हफ्तों पर टिक गई है.

ईरान अमेरिका युद्धविराम Image Credit: FreePik

US Iran ceasefire: करीब 39 दिन से जारी ईरान-अमेरिका संघर्ष में फिलहाल थोड़ी राहत दिखी है. आखिरी वक्त तक हमले की चेतावनी देने के बाद अमेरिका ने दो हफ्तों के लिए अपने सैन्य ऑपरेशन रोकने पर सहमति जताई है. अमेरिका के 15 और ईरान के 10 शर्तों पर दोनों देशों की सहमति बनने के बाद 14 दिन के युद्धविराम की बात तय हुई है.

कैसे हुआ समझौता

इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान ने सबसे बड़ा रोल निभाया. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई. ट्रंप द्वारा ट्रूथ सोशल पर पोस्ट जानकारी के मुताबिक, इस प्रस्ताव में साफ शर्त रखी गई थी कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Hormuz Strait) को दोबारा खोलेगा और बदले में अमेरिका हमले रोक देगा. यही शर्त इस अस्थायी सीजफायर की नींव बनी.

अमेरिका और ईरान का बयान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पोस्ट में साफ कहा कि उन्होंने पाकिस्तान के नेताओं के साथ बातचीत के बाद “दो हफ्तों के लिए बमबारी रोकने” पर सहमति दी है. उन्होंने इसे “डबल-साइडेड सीजफायर” बताया और कहा कि अमेरिका अपने सैन्य उद्देश्यों को काफी हद तक हासिल कर चुका है.

ट्रंप के मुताबिक, ईरान की तरफ से दिए गए 10-पॉइंट प्रस्ताव को बातचीत का आधार माना गया है और अब यह समय है कि स्थायी शांति समझौते को अंतिम रूप दिया जाए.

ट्रंप द्वारा शेयर किए गए ईरान के आधिकारिक बयान में कहा गया है कि अगर ईरान पर हमले रोके जाते हैं, तो उसकी सेना भी अपने ऑपरेशन रोक देगी. बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि अगले दो हफ्तों तक होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित आवाजाही संभव होगी, लेकिन यह ईरानी सेना के समन्वय से होगा.

इससे साफ संकेत मिलता है कि ईरान संकट के वक्त भी अपनी मजबूत स्थिति स्थापित करने की पूरी कोशिश में है.

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वैश्विक शांति के लिए क्यों मायने रखता है ये फैसला

यह संघर्ष सिर्फ दो देशों का नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था से जुड़ा है. होर्मुज स्ट्रटे से दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है, और इसके बंद होने से ऊर्जा संकट गहरा गया था. अब 14 दिन की यह राहत सिर्फ युद्ध को रोकने का मौका नहीं, बल्कि यह तय करेगी कि क्या यह संघर्ष स्थायी शांति की ओर बढ़ेगा या फिर दो हफ्तों बाद हालात फिर बिगड़ेंगे. विश्वभर की नजर अब तय टाइमलाइन खत्म होने के बाद के फैसलों पर टिक गई है.

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